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सर छोटूराम आदि बिसरा दिये गए किसानों के मसीहा

कहा जाता है कि सर छोटूराम मुसलमानों में गांधीजी से भी ज्यादा पूज्य थे।

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6 जनवरी 2018

शंभूनाथ शुक्ल

आधुनिक भारत के निर्माताओं में तीन लोग ऐसे हुए हैं, जिन्होंने गरीब किसान और जनता की भलाई के लिए अपना पूरा जीवन खपा दिया। हालांकि उनको वैसी देशव्यापी प्रतिष्ठा नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे लेकिन गरीब किसान उन्हें नहीं भूले। भले वे हिंदू हों या मुसलमान। न तो इन्होंने कभी किसानों को जातियों में बांटा, न धार्मिक आधार पर भेदभाव किया, न क्षेत्रीय आधार पर। इसीलिए किसानों के बीच इनकी लोकप्रियता कभी नहीं घटी।
इन तीनों नेताओं ने न तो मुसलमानों को वोट बैंक समझा, न उन्हें अपने से अलग। ये हैं, पहले, अविभाजित पंजाब के रेवेन्यू मंत्री सर छोटूराम, दूसरे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और तीसरे पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु के राज में भूमि सुधार मंत्री रहे विनय कृष्ण चौधरी। विनय कृष्ण चौधरी ने पश्चिम बंगाल में जो भूमि सुधार किया, उससे मुसलमान सर्वाधिक लाभान्वित हुए और ज़मीनें बंगाली भद्रलोक के हाथ से चली गईं।

इसी तरह उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार में चौधरी चरण सिंह की विरासत कोई नहीं संभाल सकता। चौधरी चरण सिंह ने सीलिंग एक्ट बनाकर यूपी के रजवाड़ों, जमींदारों और बड़े भूमिधरों की खाट खड़ी कर दी थी। इसका सीधा लाभ मुसलमानों और छोटी जोत वाले किसानों को हुआ था। चौधरी साहब खरी बात मुंह पर बोलते थे। कहते हैं कि एक बार मुजफ्फरनगर में जाटों की एक पंचायत ने कह दिया-चौधरी अबकी आपको वोट नहीं करेंगे। चौधरी साहब ने जवाब दिया-जेब में डाल लो अपना वोट। मुसलमान हो या हिंदू, जाट हो या गूजर अथवा ब्राह्मण या दलित और यादव, चौधरी साहब ने कभी किसी को खास तवज्जो नहीं दी, लेकिन किसानों का कल्याण किया।
इसी तरह के थे आज़ादी के पहले के सर छोटूराम। जो अविभाजित पंजाब की सर सिकंदर हयात की सरकार में राजस्व मंत्री थे। उन्होंने भूमि सुधार के ऐसे नेक काम किये, जिसके कारण पंजाब के मुस्लिम किसान उन्हें अपना मसीहा समझते थे। बहुत लोग सोचते और मानते भी हैं कि भाखड़ा नंगल बांध पंडित जवाहरलाल नेहरू का बनवाया हुआ है, वे गलत हैं। भाखड़ा नंगल बांध जिस नेशनल हीरो की ताक़त पर बना, वह हीरो थे सर छोटूराम।
सर छोटूराम जब 1935 में अविभाजित पंजाब के राजस्व मंत्री थे तब उन्होंने महाराजा बिलासपुर को भाखड़ा नंगल बांध के लिए ज़मीन देने और बनवाने के लिए राज़ी कर लिया था। सर छोटूराम ने उसका ब्लू प्रिंट भी बनवा लिया लेकिन इसी बीच सरकार चली गई। पंजाब सरकार ने उनके प्रोजेक्ट को जब ओके किया तब ही 1945 की 9 जनवरी को उनकी मृत्यु हो गई। संस्कृत और अंग्रेजी के आधिकारिक विद्वान सर छोटूराम का जन्म अविभाजित पंजाब के रोहतक जिले के गढ़ी सांपला गांव में 24 नवम्बर 1881 को एक सामान्य जाट परिवार में हुआ था। तब पंजाब के ही एक अन्य कस्बे दिल्ली, जो तब रोहतक जिले की ही एक तहसील थी, के सेंट स्टीफेंस से संस्कृत आनर्स करने के बाद उन्होंने आगरा से क़ानून की डिग्री ली। कुछ दिन वकालत की, फिर 1916 से 1920 तक रोहतक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। पर जल्दी ही कांग्रेस की आपाधापी देखकर उनका जी ऊब गया और उन्होंने एक यूनियनिस्ट पार्टी बनाई। यह कांग्रेस के उलट हिंदू-मुस्लिम एकता की जबरदस्त समर्थक थी और हिंदू तथा मुस्लिम जाट किसानों का इसे पूरा समर्थन था। इस पार्टी में मुस्लिम खूब थे। पंजाब में सरकार बनी और सर छोटूराम राजस्व मंत्री बने। कहा जाता है कि सर छोटूराम मुसलमानों में गांधीजी से भी ज्यादा पूज्य थे।

यह सही है कि भाखड़ा नंगल की परिकल्पना सर छोटू राम ने की थी। इस परिकल्पना को डॉ. अम्बेडकर ने आगे बढ़ाया जब वह 1942 से 1946 तक वायसराय की कार्यकारिणी के सदस्य थे। उस समय पीडब्ल्यूडी विभाग उनके पास था। इस दौरान अम्बेडकर ने पूरे देश में बाढ़ नियंत्रण, नदी बांध विद्युत उत्पादन, सिंचाई तथा जल यातायात संबंधी बहुउद्देशीय योजनाएं बनाई थीं।
यह भी उल्लेखनीय है कि हमारी वर्तमान बिजली व्यवस्था भी डॉ. अम्बेडकर की ही देन है। उन्होंने ही सेंट्रल तथा स्टेट पावर कमीशनों की स्थापना की थी। भारत के आधुनिकीकरण में सर छोटू राम की तरह डॉ. अम्बेडकर के योगदान को भुला दिया गया है। 1991 में केंद्र सरकार ने पहली बार जल संसाधनों के विकास, जल सिंचाई तथा बहुउद्देशीय योजनाओं की परिकल्पना में डॉ. अम्बेडकर के योगदान को पहचाना और इस संबंध में शोध पुस्तक छापी।


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