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उचाना विधानसभा का राजनीतिक इतिहास, यहां सबसे बड़ी और सबसे छोटी जीत चौटाला परिवार के नाम, 5 बार कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह का जलवा


Uchana Assembly Constituency History

Uchana Assembly Constituency History:
उचाना विधानसभा हरियाणा के जींद जिले में स्थित एक विधानसभा क्षेत्र है। यह 1977 में बना था। यह क्षेत्र अपनी राजनीतिक उथल-पुथल के लिए जाना जाता है। यहां मुख्य रूप से दो राजनीतिक दल, कांग्रेस और इनेलो, एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं।


1967 में जब हरियाणा प्रदेश बना तब उस समय उचाना राजौंद विधानसभा क्षेत्र में आता था। 1977 में उचाना कलां अलग विधानसभा क्षेत्र बना तो पहले चुनाव 1977 में हुए। 


1977 में उचाना विधानसभा के पहले चुनावों में मुकाबला कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह और जनता पार्टी के रणबीर सिंह के बीच था, जिसमें बीरेंद्र सिंह ने 12120 वोट और रणबीर सिंह ने 10488 वोट लिए थे और बीरेंद्र सिंह की 1632 वोटों से जीत हुई थी। 


इसके बाद 1982 में फिर से कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह विधायक बने थे। 1987 में जब प्रदेश में परिवर्तन की लहर चली थी तो उचाना से लोकदल के देसराज नंबरदार ने 55361 वोट लेकर कांग्रेस के सूबे सिंह को 45248 वोटों से हराया था। इसमें सूबे सिंह को महज 10113 वोट ही मिल पाई थी। 


1991 में फिर से कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह ने जनता पार्टी के देशराज को हरा जीत हासिल की थी। 1996 में भी बीरेंद्र सिंह ही कांग्रेस पार्टी के उचाना से विधायक बने थे। 2000 में हुए विधानसभा चुनावों में इनेलो के भाग सिंह छात्तर ने कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह को हराया था।


2005 में फिर से कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह ने इनेलो के देशराज को 12800 से ज्यादा वोटों से हराया। 2009 में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने बीरेंद्र सिंह को हराया। 


2014 में बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता ने यहां से पहली बार बीजेपी के लिए जीत दर्ज की। उन्होंने उस वक्त इनेलो के युवा सांसद दुष्यंत चौटाला को हराया। फिर 2019 में दुष्यंत चौटाला इनेलो से अलग हो गए और अपनी खुद की पार्टी बना ली। जिसका नाम रखा जननायक जनता पार्टी। उन्होंने प्रेमलता को सबसे बड़े अंतर से हराया।


ओम प्रकाश चौटाला के नाम सबसे छोटी जीत का रिकॉर्ड


2009 में हुए विधानसभा चुनावों में इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला और कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह आमने-सामने थे। इसमें ओपी चौटाला को 62669 और बीरेंद्र सिंह को 62048 वोट मिले थे। ओम प्रकाश चौटाला ने बीरेंद्र सिंह को 621 वोटों के अंतर से हराया था, जो उचाना विधानसभा के इतिहास की सबसे कम वोटों से जीत थी।


सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड


मोदी लहर के दौरान 2019 विधानसभा चुनाव में उचाना से जेजेपी प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला ने भाजपा प्रत्याशी को 47452 मतों से करारी शिकस्त दे अब तक की सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड अपने नाम किया है। 


इससे पहले सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड इनेलो के देसराज नंबरदार के नाम था, जिन्होंने 1987 में कांग्रेस के सूबे सिंह को 45248 मतों के अंतर से हराया था। दुष्यंत चौटाला ने इस रिकार्ड को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ी जीत का नया रिकार्ड बनाया है। 


चुनावी इतिहास:


1977: बीरेंद्र सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते।

1982: बीरेंद्र सिंह फिर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते।

1987: देसराज नंबरदार इनेलो के टिकट पर चुनाव जीते।

1991: बीरेंद्र सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते।

1996: बीरेंद्र सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते।

2000: भाग सिंह छात्तर इनेलो की टिकट पर चुनाव जीते।

2005: बीरेंद्र सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते।

2009: ओमप्रकाश चौटाला इनेलो के टिकट पर चुनाव जीते।

2014: प्रेम लता सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतीं।

2019: दुष्यंत चौटाला जजपा के टिकट पर चुनाव जीते।


प्रमुख राजनीतिक दल:


कांग्रेस: कांग्रेस उचाना विधानसभा में एक प्रमुख राजनीतिक दल रहा है। बीरेंद्र सिंह, जो इस क्षेत्र से 5 बार विधायक रहे हैं, कांग्रेस के सदस्य थे। अब बीजेपी में है।


इनेलो: इनेलो भी उचाना विधानसभा में एक प्रमुख राजनीतिक दल रहा है। ओमप्रकाश चौटाला, जो इनेलो के सुप्रीमो हैं, इस क्षेत्र से 2009 में विधायक रहे थे। इनेलो ने यहां से तीन बार जीत दर्ज की है (एक बार बतौर लोकदल)।


भाजपा: भाजपा 2014 में पहली बार उचाना विधानसभा में जीतने में सफल रही। प्रेम लता सिंह, जो भाजपा की सदस्य थीं, 2014 में विधायिका बनीं।


जजपा: जजपा के गठन के बाद 2019 में उचाना विधानसभा में पहली बार चुनाव लड़ी और जीत गई। दुष्यंत चौटाला, जो जजपा के नेता हैं, 2019 में विधायक बने।

 

वर्तमान राजनीतिक स्थिति:


वर्तमान में, दुष्यंत चौटाला उचाना विधानसभा से विधायक हैं। वह जजपा के नेता हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में, मुख्य मुकाबला जजपा और भाजपा के बीच होने की संभावना है।




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