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फिर शुरु होगा किसानों का आंदोलन, हिसार किसान रैली में ऐलान,13 फरवरी को दिल्ली कूच करेंगे किसान

Haryana Farmer


Haryana News: हरियाणा के हिसार जिले के नारनौंद में शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के सदस्य संगठन भारतीय किसान नौजवान के बैनर तले एक रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में प्रदेश भर से हजारों किसान शामिल हुए। 


इस कार्यक्रम में अलग-अलग गांवों से किसानों का बड़ा समूह ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनों के साथ रैली स्थल पर पहुंचा। इसके साथ ही आज किसानों ने ऐलान किया है कि 13 फरवरी को दिल्ली में किसानों का मार्च सरकार के खिलाफ होगा। 


इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने मंच से कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो देशभर के किसान सबसे पहले बलिदान देंगे। नेता देंगे, उन्होंने यह भी कहा कि किसान अपने ट्रैक्टर ट्रॉली में 6-6 महीने का राशन तैयार रखें।


13 फरवरी दिल्ली मार्च की मुख्य मांगें


  • सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाए और एमएसपी स्वामीनाथन आयोग के सी2+50% फॉर्मूले के अनुसार फसलों की एमएसपी तय की जाए।
  • देश के किसानों और मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाना चाहिए।
  • भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को दोबारा लागू किया जाए।
  • लखीमपुर खीरी के शहीद और घायल किसानों को न्याय मिलना चाहिए।
  • भारत को डब्ल्यूटीओ से बाहर आना चाहिए और सभी मुक्त व्यापार समझौतों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
  • इसके अलावा अन्य 7 मांगें भी 13 फरवरी के दिल्ली मार्च के एजेंडे में शामिल हैं।


इस कार्यक्रम में ये नेता शामिल हुए


इस कार्यक्रम में सरदार जगजीत सिंह दल्लेवाल, कुरबुरु शांताकुमार, अमरजीत मोहदी, रमनदीप सिंह मान, सूरजभान गुर्जर, सरदार जरनैल सिंह चहल, सरदार इंद्रजीत सिंह कोठबुधा, सरदार सुखजिंदर सिंह खोसा, अभिमन्यु कोहर, लखविंदर सिंह, आत्माराम झोरड़, जफर मेवाती, सुखजीत सिंह समेत देशभर से किसान नेताओं ने हिस्सा लिया।


संघ की जिला कमेटी से दशरथ मलिक, हर्षदीप सिंह गिल, बलवान सिंह लोहान, सीलू लोहान, जंगी लोहान, विशाल सिंह, जगदीप सांगवान, परमवीर श्यामसुख, हवासिंह खरब, बब्लू बेरवाल, राजू खरड़, बिंदर खोखा, संदीप पेटवाड़, संदीप चनैत, दलबीर खर्ब, जोगिंदर मान, जगबीर मलिक, जगबीर माजरा आदि शामिल थे।


आपको बता दें कि करीब तीन साल पहले किसानों ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया था। जिसमें किसानों ने करीब एक साल तक धरना जारी रखा, किसानों की मांगों को देखते हुए सरकार से बातचीत भी की गई। 


इस आंदोलन के बाद सरकार ने तीनों कानून वापस ले लिये। ऐसे में अब देखना होगा कि सरकार किसानों की इन 6 मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

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