Hindi Online Test Privacy Policy | About Us | Contact

नया हरियाणा

शनिवार, 7 दिसंबर 2019

पहला पन्‍ना सर्वे लोकप्रिय 90 विधान सभा हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप English

पढ़िए रिश्वत से जुड़े पटवारियों के रोचक किस्से

गाम की लाइफ लाइन माने जाने वाले पटवारियों से गाम के लोग सबसे ज्यादा तंग हैं।

Haryanvi patvari, naya haryana, नया हरियाणा

20 जुलाई 2018



नया हरियाणा

ग्रामीण समाज में पटवारी ही एक ऐसी पोस्ट है जिससे सबसे ज्यादा वास्ता ग्रामीणों को पड़ता है। क्योंकि जमीन से जुड़े मामलों में यह सबसे निचली पोस्ट है। ग्रामीणों का शोषण इस पहली सीढ़ी से शुरू होकर तहसीलदार की पोस्ट तक जाता है। लम्बरदार, पटवारी और तहसीलदार तीनों ने मिलकर ग्रामीणों का खून जोंक की तरह चूसने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

इन भ्रष्टाचार के केंद्रों से जुड़ी खबरें आप पढ़ते रहे हैं। इस बार इनसे जुड़े रोचक किस्से आपको पढ़वाते हैं।

 सिरसा में पटवारी दो हजार रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार। इंतकाल दर्ज करने के नाम पर रिश्वत ले रहा था। सफेद पजामा कुर्ता वाला पटवारी कमरे से बाहर आता हुआ।

इस तरह के मामले से जुड़ा एक किस्सा पत्रकार धर्मेंद्र कंवारी ने शेयर किया है-

एक पटवारी ने किसी काम के लिए बनिये से रिश्वत मांग ली। बनिये ने पैसे देने की हामी तो भर दी, साथ में पुलिस को भी सूचना दे दी। अगले दिन जैसे ही उसने रिश्वत के पैसे दिए पुलिस ने पटवारी को दबोच लिया। मौका-ए-वारदात के लिए दो अन्य कर्मचारियों को गवाह बनाया गया। मामला अदालत में पहुंचा तो पटवारी ने दोनों गवाहों को खरीद लिया। अदालत में गवाही शुरू हुई तो वकील ने पहले गवाह से पूछा-जब रिश्वत दी गई तब पटवारी कहां बैठा था-वो बोला, जी कुर्सी पर बैठा था। अब दूसरे का नंबर आया तो उसने कहा कि नहीं जनाब पटवारी तो दरी पर बैठा था। यह देख बेचारा बनिया परेशान हो गया। अब वकील ने उसे कटघरे में बुलाया और पूछा कि जब आपने रिश्वत के पैसे दिए तब पटवारी कहां बैठा था। बनिया बहुत तेज था। वो बोला-जज साहब सच बताऊं-ये पटवारी इंसान तो पांच रुपये का नहीं और मैंने दे दिए 500। बस फिर क्या था, 500 का नोट हाथ में आते ही ये उछलने लगा, कभी कुर्सी पर बैठे, कभी दरी और और कभी तख्त पर। बस इतने में पुलिस ने दबोच लिया।


दूसरा किस्सा पत्रकार अजय लाठर ने शेयर किया है-

एक बार गन्नौर में सोनीपत के तत्कालीन सीटीएम जेपी थम्मन ऐसे ही छापे में ड्यूटी मजिस्ट्रेट थे। रिश्वत के रुपये पटवारी ने पटवार खाने में ले भी लिए, लेकिन 4 घण्टे बाद भी बरामद नहीं हुए। सभी आदमियों की तलाशी ले ली, फाइलें भी चेक कर ली। मैं उनको फोन करूँ तो फोन काट दें। एक बार अटेंड किया तो बोले बहुत बड़े पंगे में फंसा हूं, बाद में बात करूंगा। उम्र में काफी बड़े थे, मैंने कहा पंगा बता दो सर। उन्होंने सारी बात बताई, बोले रुपये देने वाला बोल रहा है , उसने पटवारी को दे दिए, लेकिन बरामद नहीं हो रहे। मैंने 5 मिनट बाद फोन करके कहा, सर एक बार कुल आदमी गिनो, पतवार खाने में कितने हैं। उन्होंने गिनती कर बताई तो फिर कहा कि अब यहां निकाले गए जूते/जूती गिनो। एक जोड़ी ज्यादा निकले। विजिलेंस वालों ने पटवारी को 4 धरे तो बताया, रुपये लेकर मौके का फायदा उठाकर गहमागहमी के बीच चेला बिना जूते पहने भाग गया। 2 घण्टे बाद चेला ट्रैस हुआ। इस रेड में 6 घण्टे से ज्यादा समय लगा, लेकिन पैसे चेले से बरामद हो गए और पटवारी अंदर। बाद में पटवारी पैसे देकर बरी आया या फंसा? यह पता नहीं।


बाकी समाचार