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बुधवार, 21 नवंबर 2018

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सीबीआई की जांच में बडे झूठ का पर्दाफाश, नेकीराम कॉलेज में पुलिस ने किसी की जाति पूछकर नहीं पीटा

छात्रों को पुलिस द्वारा पीटे जाने की घटना को कुछ लोगों को एक षडयंत्र के तहत यह कहकर फैलाया कि पुलिस ने वहां केवल उन्हीं छात्रों को पीटा जो जाट थे बाकी को हाथ भी नहीं लगाया।

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16 जुलाई 2018

नया हरियाणा

जाट आरक्षण आंदोलन में पंडित नेकीराम कॉलेज के हॉस्टल में छात्रों को पुलिस द्वारा पीटे जाने की घटना को कुछ लोगों को एक षडयंत्र के तहत यह कहकर फैलाया कि पुलिस ने वहां केवल उन्हीं छात्रों को पीटा जो जाट थे बाकी को हाथ भी नहीं लगाया। इस बड़े झूठ को फैलाकर आंदोलन की आंग में घी डाला गया और छात्रों का इस्तेमाल हिंसा और लूट में किया गया। सीबीअाई जांच से पहले तक इस अफवाह का जवाब नहीं मिला था कि पुलिस ने 18 फरवरी 2016 को पंडित नेकीराज कॉलेज के हॉस्टल में घुसकर विद्यािर्थयों की जाति पूछकर केवल उन्हीं को जमकर पीटा जो केवल जाट समाज से थे।
सीबीआई ने जब इसकी जांच की तो यह एक बड़ा झूठ निकली। इस झूठ की आड़ में साजिश रचने वालों का मकसद साफ हो रहा है कि छात्रों को भावुक कर आंदोलन को भड़काना था। वित्तमंत्री निवास पर आगजनी, लूट, हिंसा और परिवार के सदस्यों को जान से मारने की कोशिश की जांच जब सीबीआई को सौंपी गई तो उसने इस अफवाह की तह तक जाकर पड़ताल की है ताकि असली कारणों तक पहुंचा जा सके। सीबीआई की चार्जशीट में दर्ज बयान में यह साफ जो जाता है कि केवल जाट छात्रों पर पुलिस की बर्बरता का झूठ फैलाना दरअसल उस राजनैतिक षडयंत्र का हिस्सा था कि इस घटना को भी जातीय रंग दे दिया जाए। 

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सीबीआई अपनी चार्जशीट में नेकीराम कॉलेज, जाट कॉलेज के वार्डन सहित कई छात्रों के बयान सीबीआई ने 161 सीआरपीसी के तहत दर्ज किए हैं। इन सभी के बयान को पढने के बाद ये साफ हो जाता है कि पुलिस ने 18 फरवरी को नेकीराम कॉलेज में घुसकर छात्रों की पिटाई की थी क्योंकि कुछ छात्रों ने कॉलेज के बाहर पुलिस को गालियां दी और उन पर पत्थ्ार फेंककर हॉस्टल में घुस गए थे। इसके बाद 100-150 पुलिसकर्मी हॉस्टल में घुसे और जो भी छात्र सामने आया उसे ही पीटना शुरू कर दिया। पुलिस की इस पिटाई में न केवल जाट छात्र घायल हुए बल्कि अनेक दूसरी जाति के छात्रों की भी पुलिस ने पिटाई की। इन छात्रों ने सीबीआई को दर्ज कराए बयानों में साफ कहा कहा पुलिस ने किसी भी छात्र को जाति पूछकर नहीं पीटा। ऐसे में यह साफ हो जाता है कि जाट आरक्षण आंदोलन में फैलाया गई ये बात एक बड़ी झूठ और षडयंत्र का हिस्सा थी ताकि जाट समाज के छात्रों को भड़काया जा सके। 

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सीबीआई के सामने दर्ज कराए बयान में महेंद्र के किनाना गांव के आशुतोष ने कहा कि उसके पिता भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। जाट आरक्षण के समय वह पंडित नेकीराम कॉलेज में पढ रहा था और 18 फरवरी की शाम को खाना खाने के बाद वह मोबाइल पर फिल्म देख रहा था। तभी कुछ लोगों ने जोर से दरवाजा खटखटाया तो देखा कि वो पुलिसकर्मी थे और बहुत गुस्से में लग रहे थे। दरवाजा खोलते ही उन्होंने हमें पीटना शुरू कर दिया और बोले कि इनको बाहर ले चलो, इनको हम दिलाते हैं आरक्षण। इसके बाद हम पीटते हुए ही बाहर निकले। इस दौरान किसी भी पुलिसकर्मी ने जाति के बारे में नहीं पूछा लेकिन जो भी सामने आया उसे पीटा। बाद में हमें पता चला कि कॉलेज के बाहर जाटों के छात्रों ने पुलिस पर पत्थर फेंके थे और इससे पुलिसकर्मी गुस्सा उन्हें सबक सिखाने के इरादे से अंदर घुसे थे। 18 को ही मुझे कॉलेज की वेन में  पीजीआई ले जाया गया और इलाज करवाया गया।
इसी कॉलेज के छात्र मनीष सैनी ने सीबीआई को बताया है कि 18 फरवरी 2016 को वह नेकीराम कॉलेज  के हाॅस्टल के कॉरिडोर में घूम रहा था तभी पुलिसकर्मी अंदर घुसे और मुझे पीटना शुरू कर दिया। वो हम सबको गालियां भी निकाल रहे थे। मुझे देखते ही उन्होंने कहा कि एक और मिल गया, इसको भी मारो। मनीष ने बताया कि वह जाट नहीं था, ना ही उन्होंने मेरी जाति पूछी लेकिन मुझे फिर भी मारा। मेरे पांव व सिर पर पुलिस की लाठियां लगी थी। किसी तरह बचकर मैं दूसरे हॉस्टल की छत पर पहुंचा तो पहले से ही वहां 15-20 स्टूडेंट चोट से कराह रहे थे। जिसमें सभी जाितयों के छात्र शामिल थे। मेरा पीजीआई में एक्सरे व सीटी स्कैन हुआ और कई दिन लग एक इस चोट से उबरने में लेकिन ये भी सत्य है कि किसी भी छात्र को जाति पूछकर नहीं पीटा गया। 
इसी तरह भिवानी के खुशहालपुरा गांव निवासी छात्र राकेश ने बताया कि वह जाति से जाट है और उसके पिता 24 बीघा में खेती करते हैं। वह जाट आरक्षण के समय पंडित नेकीराम कॉलेज में बीएससी कर रहा था और अरावली हॉस्टल के डी थ्री रूम नंबर में रह रहा था। 18 फरवरी 2016 को 8 बजे रात के खाने के बाद मैं अपने कमरे में ही था जहां मुझे घसीटकर बाहर निकाला गया। दूसरे विद्यािर्थयों को भी पीटते हुए ऐसा ही किया जा रहा था, हालांकि पुलिसवाले किसी भी जाति पूछकर नहीं पीट रहे थे उनके सामने जो आया उसे ही पीटा। मुझे चोट से उबरने में 20 दिन लगे।  इसी तरह के बयान अलवर निवासी व नेकीराम कॉलेज के छात्र दीपक यादव ने सीबीआई के सामने दर्ज कराए हैं। उसे भी पुलिसकर्मियों ने नेकीराम कॉलेज में घुसकर पीटा था और उसकी बाएं बाजू पर एक जोर से लाठी लगी थी। इसी तरह से कमल सिंह ने बताया कि पुलिसवाले हॉस्टल में घुसे तो बोले हमें देखते ही बोले कि ये रहे निकालो इनको बाहर, हम जोर से चिल्लाए कि हम नहीं थे हमने कुछ नहीं किया लेकिन वे हमें पीटने लगे। वो किसी से उसकी जाति नहीं पूछ रहे थे बस सामने जाे दिखाई दे रहा था उसे पीट रहे थे। इसी तरह नांगल चौधरी के मनोज ने पुलिस को बयान दिया कि पुलिसवाले हॉस्टल में मुझे देखते ही पीटने लगे और बोल रहे थे कि तुम पुलिस को बेवकूफ समझते हो जो पत्थर मारकर यहां छिप जाओगे। पुिलस की पिटाई में घायल नेकीराम कॉलेज के ही छात्र नमन शर्मा ने भी बयान दर्ज कराया है कि उसे भी उस दिन पुलिस ने जमकर पीटा था। मैं जाति से शर्मा हूं लेकिन पुलिस ने मुझे भी जमकर पीटा, मेरे कई दूसरे साथी भी जो जाति से जाट नहीं थे उन्हें भी पीटा गया। इसी तरह से सोनीपत के महेरडा गांव के नीतिन दलाल ने भी बताया कि उसे भी पुलिसवालों ने उस दिन हॉस्टल में घुसकर पीटा। पुलिसकर्मी पिटाई करते हुए कह रहे थे तुम पुलिस को .... समझते हो। एक पुलिसकर्मी ने तो सिर पर ही लाठी मार दी। मुझे दूसरे साथियों के साथ पीजीआईएमएस ले जाया गया जहां हमारा इलाज हुआ। मैंने खुद या किसी दूसरे विद्यार्थी से नहीं सुना कि जाति पूछकर किसी को पीटा गया। इसी तरह के बयान सीबीआई के सामने गौरां गांव के पुनीत, खिड़वाली के राकेश, मौड़ी गांव के सचिन, फरमाना के विनय ने भी दर्ज करवाए हैं कि उन सबको पुलिस ने कॉलेज के अंदर घुसकर पीटा लेकिन किसी की जाति पूछकर पीटने जैसा कोई मसला  नहीं था। बस पुलिस के सामने जो आया उसी को पीटा क्योंकि बाहर वो पत्थ्ार फेंकने से गुस्से में थे। इसी के साथ ही सीबीआई ने नेकीराम कॉलेज के वार्डन सतीश कुमार, जाट कॉलेज के वार्डन जसमेर सिंह के भी सीबीआई ने बयान दर्ज किए हैं। कई पुलिसकर्मियों की भी स्टेटमेंट दर्ज हैं, जहां नेकीराम कॉलेज के बाहर छात्रों द्वारा पुलिस पर पत्थर फेंकने की बात कही गई है। 
इसी तरह पुलिसकर्मियों की सीबीआई के सामने दर्ज करवाए स्टेटमेंट से पता चलता है कि नेकीराम कॉलेज के सामने पत्थर फेंके जाने के समय ड्यूटी पर डीएसपी अमित दहिया, अनिल यादव और शमशेर सिंह थे। उस समय अमित भाटिया डीएसपी  और पुष्पा दहिया डीआईजी सौरभ सिंह के साथ जींद बाईपास पर थे। 

सुदीप कलकल ने भी बनाई थी फर्जी वीडियो- रोहतक में जातीय हिंसा भड़काने और जाटों को उत्तेजित करने के लिए सुदीप कलकल ने भी अपने हाथ पर लाल रंग लगाकर और उसे खून बताकर एक फर्जी वीडियो बनाकर वायरल किया था. इस वीडियो में कलकल ने कहा था की उसके साथ गैर जाटों ने मारपीट की है और जाट घरों से बाहर निकलकर इसका बदला लें. इस वीडियो को वायरल करने के थोड़ी देर बाद ही उसने फोन कॉल पर एक व्यक्ति से कहा था की उसे कोई चोट नहीं लगी है बल्कि उसने झूठ बोला था. इस वीडियो ने भी आग में घी का काम किया था और इसकी वजह से रोहतक में माहौल काफी ज्यादा ख़राब हुआ था.


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