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नया हरियाणा

बुधवार, 19 सितंबर 2018

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चंडीगढ़ है हरियाणा का, पंजाब को नया चंडीगढ़ बसाकर अपनी राजधानी बना लेना चाहिए : मनोहर लाल

चंडीगढ़ को लेकर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल तीनों ही दावा करते रहते हैं.

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11 जुलाई 2018

नया हरियाणा

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चण्डीगढ़ पर हरियाणा का दावा करते हुए कहा कि पंजाब नया-चण्डीगढ़ बसा रहा है और पंजाब को नया-चण्डीगढ़ को अपनी राजधानी बना लेना चाहिए तथा चण्डीगढ़ को हरियाणा के लिए छोड़ देना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने यह बात मंगलवार को चण्डीगढ में  एक कार्यक्रम के दौरान ट्राई-सिटी अर्थात पंचकूला-चण्डीगढ- एसएएस नगर/मोहाली के योजनागत ढांचागत विकास को लेकर बुलाई गई पैनल चर्चा में कही। इस मौके पर चण्डीगढ के प्रशासक  बीपी बदनौर, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्द्र सिंह और हरियाणा सुशासन सुधार प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन व सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत प्रो. प्रमोद कुमार ने भी ट्राईसिटी के योजनागत ढांचागत विकास तथा अन्य मुद़्दों के समाधान के संबंध में अपने-अपने विचार रखें।

चंडीगढ़ में मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान ट्राई-सिटी अर्थात पंचकूला-चण्डीगढ- एसएएस नगर/मोहाली के योजनागत ढांचागत विकास को लेकर बुलाई गई पैनल चर्चा में  मुख्यमंत्री ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह मंच ट्राईसिटी के योजनागत विकास की चर्चा के लिए बुलाया गया था, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्द्र सिंह द्वारा ट्राईसिटी के विकास के मुददे पर चर्चा न शुरू  करके चण्डीगढ के विषय पर अपनी बात रखी गई, जिस पर उन्होंने कहा कि इस पर उन्हें अपना जवाब देना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चण्डीगढ़ पर हरियाणा का दावा करते हुए कहा कि पंजाब नया-चण्डीगढ़ बसा रहा है और पंजाब को नया-चण्डीगढ़ को अपनी राजधानी बना लेना चाहिए तथा चण्डीगढ़ को हरियाणा के लिए छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचकूला-चण्डीगढ़-एसएएस नगर/मोहाली के योजनागत ढांचागत विकास के लिए हरियाणा, पंजाब एवं चण्डीगढ को आपसी सहयोग व समन्वय के साथ काम करना होगा और इसके लिए हरियाणा, पंजाब व चण्डीगढ प्रशासन व शासन को मिलकर एक ऐसा तंत्र बनाना होगा जिससे चण्डीगढ के साथ लगते पंचकूला व मोहाली में एक योजनागत ढांचागत विकास किया जा सके। उन्होंने कहा कि ट्राईसिटी के योजनागत विकास के लिए तथा कोई बोर्ड या प्राधिकरण गठित करने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री को उनके द्वारा एक पत्र भी लिखा गया है।

उन्होंने कहा कि ट्राईसिटी के योजनागत विकास के लिए एनसीआर योजना बोर्ड का उदाहरण लिया जा सकता है और इस प्रकार से ट्राईसिटी योजना बोर्ड बनाया जा सकता है और ढांचागत मुद्दों के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर विचार कर उन्हें निपटाया जा सकता है। उन्होंने ट्राईसिटी कन्फलीक्ट शब्द के संबंध में कहा कि यह शब्द मीडिया की देन हैं जबकि इसकी जगह पर कम्पलशन अर्थात बाध्यकरण होने के साथ-साथ सहयोग व समन्वय भाव के साथ के ट्राईसिटी का योजनागत विकास किया जा सकता है। 
    चण्डीगढ के राजस्व को 60 और 40 के अनुपात में पंजाब और हरियाणा को देने के संबंध में उन्होंने कहा कि सरकारों को काम ईज आफ डूईंग के तहत राजस्व को देखना नहीं हैं बल्कि चण्डीगढ के राजस्व पर चण्डीगढ के लोगों का पहला हक हैं और इसे उन पर प्रयोग किया जाना चाहिए तथा राजस्व की हिस्सेदारी ठीक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ट्राईसिटी में ढांचागत विकास के मुद्दे हैं और यदि ट्राईसिटी में कोई बड़ी सामान्य परियोजना आती हैं तो उस पर हरियाणा, पंजाब व चण्डीगढ को काम करना चाहिए जैसे कि नगर निगमों का एकीकरण, बेस्ट मैनेजमैंट पर कार्य, ट्राई-सिटी मैट्रो परियोजना इत्यादि पर कार्य किया जा सकता है और ऐसी परियोजनाओं के लिए बांड जारी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन तीनों शहरों के नगर निगमों को मिलकर काम करना चाहिए और इस पर एक बडी परियोजना बनाकर तीनों शहरों का विकास किया जा सकता है। 
    चण्डीगढ के प्रशासक बीपी बदनौर की बात का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि जिस प्रकार से गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण का गठन गत 6 माह पहले किया गया और उस प्राधिकरण के लिए सिटीजन एडवाईजरी काऊंसिल बनाई गई, ठीक उसी प्रकार से ट्राईसिटी के विकास के लिए भी सिटीजन एडवाईजरी काऊंसिल बनाई जाए ताकि लोगों के सुझाव लिए जा सकें और उसके अनुरूप ट्राईसिटी का विकास किया जा सकेंं। उन्होंने कहा कि ट्राईसिटी के विकास में यदि इस प्रकार से कोई गठन किया जाता है तो यह अच्छा रहेगा जिसमें नागरिकों की भी भागेदारी होगी। उन्होंने इस मौके पर मुख्यमंत्री ने चण्डीगढ के प्रशासक बीपी बदनौर को गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के गठन के संबंध में दस्तावेजों की एक प्रतिलिपी भी भेंट की। 

चण्डीगढ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाने के संबंध में उठाए गए प्रश्न के संबंध में श्री मनोहर लाल ने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय एक प्रतिष्ठिïत विश्वविद्यालय हैं और इस विश्वविद्यालय में पहले हरियाणा का भी हिस्सा रहता था परंतु हरियाणा चाहता है कि इसमें हरियाणा को भी मिला लिया जाए और हरियाणा के कुछ कालेजों की मान्यता इस विश्वविद्यालय से दी जानी चाहिए ताकि गुणवत्तापरक शिक्षा हरियाणा के छात्रों को मिल सकें। पंचकूला में इण्डस्ट्रियल एरिया क्षेत्र के संबंध में आई जानकारी के बारे में उन्होंने कहा कि यदि पंजाब ने इण्डस्ट्रियल एरिया क्षेत्र की समस्याओं के निपटान में कुछ अच्छी नीतियां बनाई हैं तो उन नीतियों को मंगाकर व अध्ययन करवाकर पंचकूला के उद्यमियों को भी राहत देने का काम किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हालांकि पंचकूला और चण्डीगढ को जोडने वाले रास्तें कम है और लोगों को चण्डीगढ आने में दिक्कत होती हैं जबकि मोहाली का चण्डीगढ के साथ अच्छा संपर्क हैं। इसी प्रकार, हरियाणा चाहता हैं कि पंचकूला भी मोहाली की तरह आसानी से चण्डीगढ के साथ संपर्क बनाए रखें और इसी कडी में रेलवे लाईन के नीचे से एक अंडरपास का कार्य होना है जिसके बनने से पंचकूला और चण्डीगढ आने- जाने वाले लोगों को काफी सहुलियत मिलेगी। चण्डीगढ के प्रशासक बीपी बदनौर द्वारा चण्डीगढ स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को चण्डीगढ से बाहर फैलाने और देने के संबंध में कही गई बात का समर्थन करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि चण्डीगढ स्मार्ट सिटी में चलाई जा रही परियोजनाओं को पंचकूला में भी चलाया जा सकता हैं और पंचकूला के लोगों को भी इसका लाभ दिया जा सकता है, इसमें हरियाणा को किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होगी।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा में भूजल स्तर 1500 फुट तक जा चुका है जबकि पंजाब का भूजल स्तर 200 से 250 फुट तक हैं। इसी प्रकार, हरियाणा का ज्यादातर क्षेत्र पंजाब के मुकाबले डार्क जोन में जा चुका है और हरियाणा को पानी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मैंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्द्र सिंह को भी पाकिस्तान में जा रहे व्यर्थ पानी के प्रबंधन के लिए अनुरोध किया था जिससे दोनों राज्यों पंजाब एवं हरियाणा के साथ-साथ दिल्ली व राजस्थान को भी अतिरिक्त पानी मिल सकता है। इसलिए उस पानी को रोककर हरियाणा और पंजाब में प्रयोग किया जा सकता है और इसके लिए बांध या जलाशय बनाए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह मंच ट्राईसिटी के योजनागत विकास की चर्चा के लिए बुलाया गया था, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्द्र सिंह द्वारा ट्राईसिटी के विकास के मुददे पर चर्चा न शुरू  करके पानी के मुददे को उठाया गया, जिस पर उन्होंने कहा कि इस पर उन्हें अपना जवाब देना पड़ रहा है।    पंजाब को बड़े भाई का दर्जा देते हुए उन्होंने कहा कि पानी के प्रबंधन के लिए दोनों रज्यों पंजाब एवं हरियाणा को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हांसी-बुटाना नहर से भी दक्षिण हरियाणा के क्षेत्रों को पानी दिया जा सकता है लेकिन पंजाब इस पर एतराज कर रहा है जबकि हांसी-बुटाना नहर से पश्चिमी हरियाणा को मिलना है और इससे दक्षिण हरियाणा के जिलों जैसे नूूंह व महेन्द्रगढ में पानी दिया जा सकता है, जोकि एक प्रकार से पानी का प्रबंधन ही हैं और यह पानी हरियाणा के हिस्से का पानी है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल आयोग ने भी पानी के मुददे का समाधान करने के लिए पग उठाए हैं, लेकिन हरियाणा में पंजाब के मुकाबले कम पानी हैं। 


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