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नया हरियाणा

बुधवार, 19 सितंबर 2018

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फरवरी 2016 में कांग्रेसियों ने जलाया था रोहतक!

जाट आरक्षण आंदोलन की आड़ लेकर अपनी राजनीतिक रंजिशें मिटाई गई.

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10 जुलाई 2018

नया हरियाणा

रोहतक, सोनीपत और झज्जर में आगजनी, लूट और दंगों से जुड़े एक मामले में केन्द्रीय जाँच एजेंसी सीबीआइ की तरफ से 51 लोगों के खिलाफ दायर की गई चार्जशीट में 11 नए लोगों के नाम सामने आए हैं जिनमें हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नजदीकी और पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा के बेटे गौरव हुड्डा और रोहतक के पूर्व कांग्रेसी विधायक बीबी बत्रा के पीए का नाम भी शामिल है. इससे पहले गिरफ्तार किए हुए आरोपियों में सुदीप कलकल और मनोज दुहन के कांग्रेसी नेताओं के साथ के रिश्ते जगजाहिर हैं. चार्जशीट में सीबीआई ने जो एविडेंस और कॉल डिटेल्स लगाईं हैं उनसे आसानी से समझा जा सकता है को जो भी हुआ था उसके पीछे आरक्षण नहीं बल्कि गहरा राजनीतिक षड्यंत्र था.
सीबीआई की चार्जशीट से साफ लगता है कि आंदोलन की आड़ में कुछ कांग्रेसी नेताओं ने पूरा षड्यंत्र रचा था जिसमें वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के परिवार के मासूम बच्चों और महिलाओं को जिंदा जला देने की कोशिश करने की साजिश को अंजाम दिया गया था. सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में साजिश करने वालों को कुछ चेहरों को बेनकाब कर दिया है जबकि कुछ अभी भी पर्दे में ही हैं. इस केस में सीबीआई की जांच अभी भी जारी है. उम्मीद जताई जा रही है कि सही दिशा में जांच आगे बढ़ी तो प्रदेश के कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के गिरेबान तक भी आंच पहुंच सकती है. अभी तक की जांच में भले ही वो हाथ और चेहरे पकड़ में आ गए हैं जो सामने आकर दंगे कर रहे थे, पर उस शैतानी दिमाग के चेहरे से नकाब हटना अभी बाकी है जिसने ये सारा चक्रव्यूह रचा है. जिसकी कीमत पूरे हरियाणा ने भाईचारा खोकर और रोहतक ने खुद को बर्बाद होकर चुकाई है. दूसरी तरफ इन पकड़े गए आरोपियों के साथ हुड्डा परिवार के साथ सीधे संबंध उन्हें शक के घेरे में लाकर खड़ा कर देते हैं. 
यह तथ्य भी किसी से नहीं छिपा है कि जाटों को आरक्षण का लॉलीपॉप भूपेन्द्र हुड्डा ने दिया था. वकील होते हुए अपने राज में उन्होंने इस तरीके से आरक्षण दिया गया कि वह कोर्ट में जाते ही धराशाई हो गया लेकिन इसके बावजूद आरक्षण के आंदोलनकारियों ने उन्हें इसका दोषी नहीं माना बल्कि वर्तमान सरकार पर ही कई तरह के आरोप लगाये. 10 साल के हुड्डा शासन में रोहतक में कभी जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर धरना प्रदर्शन भी नहीं हुआ और खट्टर सरकार आते ही यहां के जाट इतने आक्रामक हो गए कि पूरा शहर लूट और आगजनी के हवाले कर दिया. क्या यह महज संयोग है? साफ दिखता है कि इसके पीछे साजिशकर्ता खड़े हैं. दरअसल यह लूट, आगजनी और कैप्टन के परिवार पर जानलेवा हमला जाट आंदोलन की आड़ लेकर किए गए हैं. अपनी राजनीतिक रंजिश को जाट आंदोलन और जाट युवाओं को मोहरे बनाकर साफ तौर पर इस्तेमाल किए गए हैं. साथ में आंदोलन के भीतर अपने आदमी प्लांट किए गए हैं. कैप्टन अभिमन्यु के घर पर जाट आंदोलनकारियों के हमले का कोई औचित्य ही नहीं बनता था क्योंकि अभिमन्यु ने लगातार हर मंच पर मुखरता से जाट आरक्षण की वकालत करते रहे थे. आरक्षण के लिए चल रहे आंदोलन को कैप्टन अभिमन्यु ने खुले मंच से समर्थन दिया था और दूसरी तरफ राजकुमार सैनी के जाटों बाबत दिए गए बयानों पर कैप्टन अभिमन्यु ने को सीधे तौर पर उन्हें मूर्ख कहा था. आखिर आंदोलनकारियों के उनके घर पर हमला करने का कोई तो कारण होता? ऐसे में उनके घर पर हमले के पीछे राजनीतिक रंजिश साफ दिखती है, क्योंकि घर पर हमला करने वाले ज्यादातर आरोपी कांग्रेसी हैं और कई हुड्डा के नजदीकी हैं. दूसरी तरफ इन दोनों बड़े नेताओं की गैर-मौजूदगी में हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार प्रो. वीरेंद्र ने कमान अपने हाथ में ली और आंदोलन की आड़ में चल रहे षड्यंत्र को दिशा-निर्देश दिए. उनकी बातचीत पूरे देश ने मीडिया चैनलों पर सुनी थी. क्या यह महज संयोग है कि हुड्डा के नजदीकी सुदीप कलकल आदि ने इस पूरे हिंसक और हत्या करने की साजिश वाले षड्यंत्र को लीड किया? 
सीबीआई की करीब 5 हजार पन्नों की चार्जशीट में भूपेंद्र हुड्डा के साथ नजदीकी संबंध रखने वाले लोगों के फोन रिकार्डिंगस से साफ लगता है कि वित्त मंत्री के परिवार पर जानलेवा हमला साजिश के तहत किया गया है. पूरी प्लानिंग करके पहले जाटों को गैर-जाटों को एक दूसरे के खिलाफ भड़काया गया. इसके लिए सोशल मीडिया पर पूरी रणनीति के साथ मुहिम चलाई गई. गैर जाटों द्वारा सुदीप कलकल पर हमले का फर्जी वीडियो बनाकर वायरल किया गया. रोहतक शहर की गैर जाट दुकानों को टारगेट करके जलाया गया. सुदीप कलकल और मनोज दुहन के माध्यम से इसको अंजाम दिया गया. सीबीआई से अंदाज़ा लगता है की हुड्डा ने अपने खास लोगों को जाट आंदोलन के अंदर प्लांट करके रोहतक के बणिए, ब्राह्मण, पंजाबी और कैप्टन अभिमन्यु को टारगेट किया है. इन सभी पर कहां-कहां और कैसे हमला करना यह सब पहले से तय किया हुआ था. सोशल मीडिया के जरिए जाटों को कैसे भड़काना है और उनका राजनीतिक रंजिश के लिए इस्तेमाल करना है. यह भी पहले से तय था. हर जगह की रिपोर्ट दी जा रही थी कि कहां-कहां पर कैसे-कैसे घटनाओं को अंजाम दिया गया है.
रोहतक में माहौल ख़राब करने में सबसे बड़े बड़े मोहरे के तौर पर सुदीप कलकल और मनोज दूहन का इस्तेमाल किया गया. उन जाट युवाओं को जाति के नाम पर बलि का बकरा बना दिया. राजनीति बहुत गंदी चीज है, ये हम बचपन से सुनते आए हैं. पर सीबीआई की चार्जशीट पढ़ने के बाद यह यकीन हो गया कि गंदी राजनीति करने वाले अपने बाप-बेटे तक की बलि देते नहीं झिझकेंगे. यहां तो जाट कौम के जोशिले युवा थे. जिन्हें अपनी राजनीति की बलि चढ़वा दिया गया. फिलहाल इस मामले में सीबीआई की जाँच चल रही है. अभी कुछ और खुलासे होने बाकी हैं. अभी कुछ और चेहरों से पर्दे हटने हैं जिसके लिए थोडा सा इंतज़ार करना होगा.


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