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नया हरियाणा

सोमवार , 27 मई 2019

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ओमप्रकाश चौटाला भर्ती घोटाले में लगी मैडम का भावुक वायरल खत का पोस्टमार्टम

किसी अज्ञात मैडम द्वारा लिखा गया यह खत सोशल मीडिया पर वायरल करने की मंशा से लिखा गया है.

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7 जुलाई 2018



नया हरियाणा

ओमप्रकाश चौटाला जी के नाम खत(नाम छिपाकर) लिखने वाली मैडम को इस बार मनोहर सरकार द्वारा सृजनात्मक लेखन के लिए कोई विशेष पुरस्कार देना चाहिए. आखिर इतनी शुद्ध और भावुक हिंदी साहित्यकार ही लिख सकता है.

वैसे मैडम जी के बहाने इनेलो ने ये तो खुद साबित कर दिया कि हरियाणा सरकार का ईमानदारी से नौकरी देने का दावा उसको बैकफुट पर धकेल रहा है. तभी ये तथाकथित ईमानदारी वाला खत लिखकर फ्रंटफूट पर खेलने की एक्टिंग की जा रही है.

वैसे खत एक मैडम ने लिखा और खुद की ईमानदारी का ठप्पा लगाकर 3205 जेबीटी टीचरों को पर्ची और जेब खर्ची वाले घोषित कर दिया. दूसरी तरफ मैडम के पत्र में खुद के चयन को लेकर जो हैरानी शो की गई है. उस यकीन न होने के स्तर तक की गई है. जो कि ओमप्रकाश चौटाला जी की एक खराब छवि का निर्माण करती है.

तरारे में आकर कई बार कदम उलटे पड़ जाते हैं. सोशल मीडिया के दौर में बढ़िया कंटेंट राइटर रखने चाहिए. चंगू-मंगू के भरोसे सोशल मीडिया पर कुछ भी नहीं ठेल देना चाहिए. वैसे भी मैडम जी को यह खत तिहाड़ जेल में पोस्ट करना चाहिए था. 

होर की. दादा लखमीचंद कह गए हैं- 
धौरै बैठण आल्या नै पिछाणण सीख ल्यो
कद गोभी खोद देंगे यो भापणा सीख ल्यो. (कल्पना)

सोशल मीडिया में वायरल खत--

श्रीमान ओमप्रकाश चौटाला जी,
चरण स्पर्श ।
                   आज बड़ी पीड़ा और भावुकता के साथ आपको ये  पत्र लिख रही हूं । मुझे नहीं पता कि ये पत्र आपको मिलेगा या नहीं  लेकिन भगवान से मेरी प्रार्थना है कि ये पत्र आपको मिले और आप इसे पढ़ें। 
             मैं गांव के एक किसान परिवार में पैदा हुई । मैं तीन बहनों में दूसरे नंबर की थी और सबसे छोटा एक भाई है। ज़मीन कम थी तो पिता जी खेती के साथ मिस्त्री का काम भी करते थे। गाँव में एक पांचवी तक का प्राइवेट और दूसरा 8वीं तक का सरकारी स्कूल था । बड़ी बहन कभी स्कूल नहीं गई इसलिए घर में आठवीं पास करने वाली मैं पहली सदस्या थी। आठवीं की बोर्ड की परीक्षा में मैं क्लास( गाँव) में फर्स्ट आई थी। गाँव मे स्कूल नहीं होने के कारण आठवीं के बाद मेरा पढ़ना बंद हो गया।  2 साल बाद बड़ी बहन के साथ ही मेरा भी विवाह एक ही घर में हो गया और शादी के एक साल बाद सुसराल चली गई। पढ़ाई तीन साल पहले छूट चुकी थी और मैंने कभी सपनों में भी  आगे पढ़ने की नहीं सोची थी। परिवार जॉइंट था, बड़ी बहन के पति खेती करते थे और मेरे पति प्राइवेट बस में ड्राइवर थे। पता नहीं क्यों ( शायद बड़ी बहन के कहने पर ) मेरे पति ने मेरा एडमिशन  नौंवी क्लास में सुसराल के स्कूल में करवा दिया।
पूरे स्कूल में मैं एकमात्र बहू थी और घूंघट में स्कूल जाती थी। दसवीं की बोर्ड परीक्षा में भी मैं स्कूल में फर्स्ट आई । सौभाग्यशाली इतनी की उसी साल मेरी सुसराल का स्कूल बारहवीं तक हो गया, लेकिन थी बस आर्ट्स वो भी सिर्फ तीन सब्जेक्ट।  ग्याहरवीं क्लास में मैं एक बेटे की माँ बनी और बारहवीं की परीक्षा में हम 14 ही बच्चे पास हुए और 71%अंको के साथ मैं दूसरे स्थान पर रही। उसके बाद   एक साल तक मैंने 12-12 घंटे पढ़कर जेबीटी में एडमिशन की तैयारी की । मेरा जेबीटी में एडमिशन हुआ और मैं तीन बस बदलकर 44 कि०मी०दूर  पढ़ने जाती थी। जेबीटी करते हुए मुझे दूसरा लड़का हुआ। जेबीटी करने के बाद मैं सुसराल के ही प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगी।

सरकारी नौकरी के लिए मैं हर जगह अप्लाई करती थी। हरियाणा में जेबीटी टीचर की नौकरी निकली मैंने भी अप्लाई किया। दिसंबर 1999 के पहले सप्ताह नारनौल में इंटरव्यू के लिए मेरे पास डाक से पत्र आया। सिफारिश के बिना हरियाणा में  सरकारी नौकरी नहीं मिलती इसलिए मैंने मेरे परिवार वालों पर खूब दबाव डाला की वो कोई  सिफारिश ढूंढे। मैं रोई, गिड़गिड़ाई, सरपंच के घर भी गई। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद कोई सिफारिश नहीं मिली। ये सोचकर कि नहीं होगा मैंने उदास मन से इंटरव्यू दिया और आकर अपनी प्राइवेट नौकरी में लग गई।  उम्मीद रत्ती भर भी नहीं थी इसलिए ना मैंने कभी रिजल्ट की चिंता की, ना कभी किसी से इसका जिक्र किया । 7 दिसंबर 2000 का दिन मुझे इसलिए याद है क्योंकि इस दिन ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। गाँव के ही एक लड़के ने शाम 7 बजे मेरे घर आकर मेरे पति को बताया कि भाभी जी सरकारी जेबीटी लग गई हैं। ये वो शब्द थे जो आज भी मेरे कान में गूँजते हैं। उस रात मैं एक मिनट भी नहीं सो पाई। मुझे सिर्फ मेरा ख्याल आया, मेरे भविष्य के सपने दिखे , ना सरकार मेरे दिमाग में आई, ना मुख्यमंत्री। 
मैं पढ़ाने लगी और ससुराल और परिवार की आदरणीय सदस्या हो गई। परिवार की छोटी- मोटी उलझनों को छोड़कर सब ठीक चल रहा था। मेरे परिवार और मुझे कभी सरकार और राजनीति से कभी कोई मतलब नहीं रहा इसलिए ना मैंने कभी आपको देखा , ना मैंने कभी आपसे मिलने की कोशिश की। 2009 तक ना मेरे परिवार ने कभी आपकी पार्टी को वोट किया । 
            जनवरी 2013 का वो दिन, स्कूल में ही मेरे स्कूल के एक टीचर ने मुझे बताया कि 3206 जेबीटी टीचर नियुक्तियों को लेकर ओमप्रकाश चौटाला को सजा हो गई है।  पहली बार मेरे जीवन में मैं कुर्सी से उठ नहीं पा रही थी। मेरे पैर अपने आप कांप रहे थे और हाथों से गिलास भी नहीं पकड़ा जा रहा था। लेकिन मैंने किसी को महससू नहीं होने दिया, ना किसी से कुछ और पूछा, ना मैं  घर पहुँचकर टीवी पर खबर सुनने की हिम्मत कर पाई , अगले दिन मैं स्कूल नहीं गई। दिन में ही मेरी बड़ी बहन ने मुझे बताया कि कह रहे है कि 10 साल की सजा हुई है। अकेले आपको नहीं बल्कि औरों को भी हुई है। मैं स्कूल जाने लगी लेकिन मैनें सबसे बातें करनी लगभग बंद कर दी। एक बैचेनी सी सारा दिन मुझे रहने लगी। मेरे दिमाग में मेरी पढ़ाई,  मेरा संघर्ष, इंटरव्यू, सिलेक्शन और आप हर पल घूमने लगे। मैं सारा दिन उन टीचरों को देखती रहती जो उसी टाइम कांग्रेस सरकार में , सिफारिश से, पैसों से नौकरी ले कर आए थे। जो पढ़ाई की कम और प्लॉटों की ज्यादा बातें करते थे। मैं उनका गुस्सा बच्चों पर उतारने लगी , बिना किसी वजह उन टीचरों से लड़ने की सोचने लगी। नींद में आप आपकी जेल,अंधेरा दिखता और घबराहट  होने लगी। कई बार आपसे मिलने की सोची लेकिन कोई डायरेक्ट जानकारी ना होने के कारण मिलने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।
               काफी महीनों से आपको ये पत्र लिखने की सोच रही थी। आज वही सवाल मैं आपसे पूछ रही हूं जो मेरे अंदर हर रोज उठते हैं और जिनको सुन सुनकर मेरे परिवार वाले परेशान हो चुके हैं।  चौटाला सर, आप तो मुख्यमंत्री रहे हो, आपको पता ही है आपसे पहले की सरकारों ने कैसे-कैसे लोगों को कैसी कैसी नौकरियां दी हैं। आपके बाद की सरकारों ने कैसे मोल की डिग्रियों से, नियम तोड़कर, लिस्ट बना-बना कर कितनी बड़ी-बड़ी नौकरी अयोग्य लोगों को दी है तो आप क्यों बिना किसी वजह के इतनी बड़ी सजा झेल रहे हो ?
चौटाला साहब बचपन से सुनती आ रही हूँ की किसने दंगे करवाये, किसने सिख मारे, किसने मुस्लिम मारे, किसने हिन्दू जलायें, किसी को भी एक दिन की सजा नहीं हुई तो आप इस 84 की उम्र में, इतनी विकलांगता के बावजूद इतने घोर अन्याय को कैसे सहन कर पा रहे हो ?
लोग बात करते हैं कि पिछली कांग्रेस सरकार में सब विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री अरबों रुपए की प्रॉपर्टी इक्कठी कर गए तो मेरे जैसी आम घर की लडक़ी को नौकरी देने के लिए आप जेल कैसे काट सकते हो ?
चौटाला सर ,  हालात आज के दिन इतने बुरे हैं कि सरकारी तो क्या लोग ठेके की नौकरी के लिए भी पैसे दे रहे हैं, कोई भी छोटा सा काम बिना पैसों के नहीं होता तो बिना एक रुपए का आरोप लगाए आपको सजा कैसे दी जा सकती है ?
कोई बैंको को लूटकर भाग रहा है, कोई किसानों को लूट रहा है, कोई कोयला खा रहा है, कोई जमीन खा रहा है, कोई  हस्पतालों की ऑक्सीजन बेच रहा है, कोई दवाइयों के घोटाले कर रहा है, किसी के ऊपर  मुकदमा तक दर्ज नहीं होता तो आपको 10 साल की सजा क्यों.....? वो भी रोजगार देने के लिए वो भी उनको  जिनको आप जानते तक नहीं ?
चौटाला साहब ज्यादा कानूनों का तो नहीं पता लेकिन सजा होने के बाद भी बड़ी कोर्ट से लोग बरी आते हैं, जमानत पर आते हैं जैसे सलमान खान, जैसे संजय दत्त, आपको इस उम्र में भी क्यों नहीं छोड़ रहे ?
 सर पता नहीं आप किस षडयंत्र का शिकार हो ? लेकिन जितनी आपकी हिम्मत है वो हमारे अंदर नहीं है। इतना कुछ उल्टा और गलत होने के बावजूद भी आप लड़ रहे हो, चल रहे हो, लोगों को लड़ने की हिम्मत देते हो , अब भी इतनी मजबूती से खड़े हो। 
जी पता नहीं भगवान आपसे मिलने का कभी मौका देगा या नहीं, लेकिन बस ये पत्र आप तक पहुँच जाए तो मेरा दर्द आधा हल्का हो जायेगा। मेरे घर की खुशी और आपके दर्द का सीधा संबंध है। मेरा घर आज गांव में बड़े घरों में गिना जाता है , मैं मानती हूँ कि ये सब कुछ मेरी मेहनत का नतीजा है लेकिन मेरे घर की रोटी के लिए, मेरे घर के लिए आप सलाखों में बंद हो बस ये पीड़ा ना रोटी खाने देती ना घर की छाया का आनंद लेने देती है।
आपके लिए ना कहीं बोल पाई, ना किसी को कुछ लिख पाई। पता नहीं ये पत्र किसके हाथ लगेगा इसलिए ना इसमें  अपना नाम लिखने की हिम्मत जुटा पाई।

माफी के साथ, नमस्कार ।

आपकी सैदव ऋणी 

3206 जेबीटी टीचर में से एक ।


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