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बुधवार, 19 सितंबर 2018

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SYL की पहली परीक्षा में अभय सिंह चौटाला हुए फेल

पार्टी ने खुद माना जेल भरो आंदोलन रहा फ्लॉप.

Abhay Singh Chautala, naya haryana, नया हरियाणा

4 जुलाई 2018

कुलदीप श्योराण

बसपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के अभय चौटाला के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। पार्टी ने खुद ही है मान लिया है कि अभय चौटाला पहली ही परीक्षा में फेल हो गए हैं।
पार्टी हाईकमान ने 1 मई 2018 को भिवानी में आरंभ हुए जेल भरो आंदोलन को फ्लॉप मानते हुए उसका दोबारा आयोजन करने के निर्देश दिए हैं । पार्टी मुखिया पूर्व सीएमओम प्रकाश चौटाला के आदेश पर 17 जुलाई को भिवानी में जेल भरो आंदोलन दोबारा किया जाएगा। इससे पहले 6 जुलाई को दादरी में भी जेल भरो आंदोलन किया जाएगा ।
बसपा के साथ गठबंधन के बाद इनेलो ने 1 मई से पूरे प्रदेश में एसवाईएल को लेकर जेल भरो आंदोलन करने का ऐलान किया था । 1 मई को पहला कार्यक्रम भिवानी में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में उम्मीद से काफी कम़ लोग शामिल हुए थ। बेहदे कम लोगों के कारण पूर्व CM ओम प्रकाश चौटाला बहुत नाराज हुए और उन्होंने दोबारा से यह कार्यक्रम करने के आदेश जारी कर दिए। प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार होगा कि कोई राजनीतिक कार्यक्रम फ्लाप होने के चलते दोबारा आयोजित किया जाएगा।
भिवानी का वह कार्यक्रम इसलिए फेल हुआ था क्योंकि अभय चौटाला ने अपने भाई अजय चौटाला की कर्मस्थली भिवानी और दादरी में उनके बेटों दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला को प्रभारी बनाने की बजाय उनकी अनदेखी करने का काम किया था जिसके कारण पार्टी कैडर भी नाराज हो गया था और इसी कारण कार्यक्रम में काफी कम कार्यकर्ताओं ने भाग लिया था। अजय के परिवार को जानबूझकर इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी नहीं दी गई थी ताकि उसकी सफलता का श्रेय उनको ना मिले।
लेकिन वह प्रोग्राम फेल होने के कारण अभय ग्रुप की वह साजिश उनपर ही भारी पड़ गई और अब ओम प्रकाश चौटाला के आदेश पर कार्यक्रम को दोबारा सफल बनाने की जिम्मेदारी सांसद दुष्यंत चौटाला को सौंपी गई है। कार्यक्रम की बड़ी सफलता के लिए आज दुष्यंत चौटाला ने भिवानी में वर्करों की मीटिंग भी ली।
1 मई को हुए जेल भरो आंदोलन के कार्यक्रम में भिवानी व दादरी जिलों के कार्यकर्ता शामिल हुए थे। 2 जिलों के वर्करों की संख्या ओमप्रकाश चौटाला को बेहद कम लगी । इसीलिए उन्होंने आयोजकों को फटकार लगाते हुए बड़ा कार्यक्रम दोबारा करने के आदेश जारी किए। भिवानी में जेल भरो आंदोलन का कार्यक्रम दोबारा होना अभय चौटाला के पहली परीक्षा में फेल होने पर मोहर लगाने का काम कर गया। भिवानी के अलावा कई दूसरे जिलों में भी उम्मीद से काफी कम भीड़ आई जिसके कारण गठबंधन के पक्ष में माहौल नहीं बन पाया है ।

खरी खरी बात यह है कि भिवानी में जेल भरो आंदोलन का दोबारा आयोजन इस बात का सबूत है कि खुद इनेलो ने पहले के कार्यक्रम को फेल मान लिया है। जब इनेलो के गढ़ में ही कार्यक्रम फ्लोप हो गया तो दूसरे जिलों के कार्यक्रम की असलियत का अंदाजा आराम से लगाया जा सकता है । इनेलो ने मीडिया में जारी प्रेसनोटों में गिरफ्तारी देने वाले की लोगों की संख्या 5 गुना से लेकर 10 गुना तक अधिक बताने का प्रयास किया।
हकीकत यह है कि इनेलो बसपा गठबंधन का यह पहला शक्ति प्रदर्शन प्रदेश की जनता पर जोरदार प्रभाव छोड़ने में पूरी तरह से विफल रहा है । जनता तो दूर खुद इनेलो के पूरे कैडर ने भी इसमें भागीदारी नहीं की। हर कार्यक्रम में बसपा के चंद वर्करों के अलावा सिर्फ पार्टी पदाधिकारी ही नजर आए।
इन कार्यक्रमों के फेल होने में एक बड़ा कारण अजय चौटाला परिवार को अनदेखी करना भी है । दुष्यंत चौटाला को सिर्फ फरीदाबाद, नारनौल, भिवानी व हिसार जिलों के कार्यक्रमों में ही देखा गया। इनकी अनदेखी के कारण ही जेल भरो आंदोलन सफलता हासिल करने में नाकाम रहा। भिवानी में यह कार्यक्रम दोबारा आयोजित करना इनेलो की जगहंसाई कराने के लिए काफी है।
आधे प्रदेश में जेल भरो आंदोलन के दौरान काफी कम भीड़ आना इस बात का प्रतीक भी है कि सत्ता हासिल करने के लिए जरूरी माहौल बनाने में अभय चौटाला नाकाम साबित हो रहे हैं।
अगर इनेलो बसपा गठबंधन सत्ता हासिल करना चाहता है तो पार्टी मुखिया ओमप्रकाश चौटाला को पार्टी की कमान को लेकर दोबारा से गंभीरतापूर्वक विचार करना ही पड़ेगा। अभय चौटाला की अगुवाई में गठबंधन के सत्ता के सरताज बनने के आसार बेहद कम नजर आ रहे हैं।

 


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