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नया हरियाणा

बुधवार, 13 दिसंबर 2017

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'पत्रकारिता दिवस' पर प्रधानमंत्री समेत सभी जानी मानी हस्तियों ने दी शुभकामनाएं

पत्रकारिता आजादी से पहले एक मिशन थी। आजादी के बाद यह एक प्रोडक्शन बन गई। हाँ, बीच में आपातकाल के दौरान जब प्रेस पर सेंसर लगा था। तब पत्रकारिता एक बार फिर थोड़े समय के लिए भ्रष्टाचार मिटाओं अभियान को लेकर मिशन बन गई थी। धीरे-धीरे पत्रकारिता प्रोडक्शन से सेन्सेशन एवं सेन्सेशन से कमीशन बन गई है।

naya haryana

16 नवंबर 2017

नया हरियाणा

प्रथम प्रेस आयोग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एंव पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद की कल्पना की थी। परिणाम स्वरूप चार जुलाई 1966 को भारत में प्रेस परिषद की स्थापना की गई जिसने 16 नंवबर 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया। तब से लेकर आज तक प्रतिवर्ष 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्व में आज लगभग 50 देशों में प्रेस परिषद या मीडिया परिषद है। भारत में प्रेस को वाचडॉग एंव प्रेस परिषद इंडिया को मोरल वाचडॉग गया है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस, प्रेस की स्वतंत्रता एंव जिम्मेदारियों की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस 1966 से प्रति वर्ष मनाया जाता है। प्रथम प्रेस आयोग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एवं पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद् की कल्पना की थी। इसके तहत चार जुलाई 1966 को भारत में प्रेस परिषद् की स्थापना की गई जिसने 16 नंवबर 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया। तभी से प्रतिवर्ष 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाया जाता है।   
आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पत्रकारो को बधाई दोतो हुए कहा कि एक स्वतंत्र प्रेस एक जीवंत लोकतंत्र का आधारशिला है। हम सभी प्रकारों में प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कायम रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। मोदी ट्वीट करते हुए लिखा कि मीडिया देश के 125 करोड़ भारतीयों के कौशल, शक्ति और उनकी रचनात्मकता को अधिक से अधिक स्थान देगा। उन्होंने मीडिया, खास तौर से संवाददाताओं और कैमरापर्सन के ‘‘कठिन परिश्रम’’ की प्रशंसा की, जो मौके पर पहुंचकर ‘‘अथक परिश्रम’’ करते हैं और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों को उनका ‘‘आकार’’ देते हैं।


इस ट्वीट के अलावा मोदी ने एक और ट्वीट तरते हुए लिखा कि वर्तमान समय में हम सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता को देख रहे हैं और लोगों में मोबाइल फोन के जरिए समाचारों को प्रति रूझान बढ़ा है। 
केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने भी राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर मीडियार्किमयों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता का प्रयोग जिम्मेदारी और तार्कीक तरीके से किया जाना चाहिए।  स्मृति ईरानी ने ट्वीट किया है, ‘‘राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर सभी मीडिया र्किमयों को शुभकामनाएं। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में लोकप्रिय, सक्रिय और स्वतंत्र प्रेस हमारे लोकतांत्रिक जड़ों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। प्रेस की स्वतंत्रता का प्रयोग जिम्मेदारी और ताॢकक तरीके से करने का संकल्प लें।’’ 
खोजी पत्रकारिता के नाम पर आज पीली व नीली पत्रकारिता हमारे कुछ पत्रकारों के गुलाबी जीवन का अभिन्न अंग बनती जा रही है। भारतीय प्रेस परिषद ने अपनी रिपोर्ट में कहा भी है 'भारत में प्रेस ने ज्यादा गलतियाँ की है एंव अधिकारियों की तुलना में प्रेस के खिलाफ अधिक शिकायतें दर्ज हैं।' 
पत्रकारिता आजादी से पहले एक मिशन थी। आजादी के बाद यह एक प्रोडक्शन बन गई। हाँ, बीच में आपातकाल के दौरान जब प्रेस पर सेंसर लगा था। तब पत्रकारिता एक बार फिर थोड़े समय के लिए भ्रष्टाचार मिटाओं अभियान को लेकर मिशन बन गई थी। धीरे-धीरे पत्रकारिता प्रोडक्शन से सेन्सेशन एवं सेन्सेशन से कमीशन बन गई है।परंतु इन तमाम सामाजिक बुराइयों के लिए सिर्फ मीडिया को दोषी ठहराना उचित नहीं है। जब गाड़ी का एक पुर्जा टूटता है तो दूसरा पुर्जा भी टूट जाता है और धीरे-धीरे पूरी गाड़ी बेकार हो जाती है। समाज में कुछ ऐसी ही स्थिति लागू हो रही है। समाज में हमेशा बदलाव आता रहता है। विकल्प उत्पन्न होते रहते हैं। ऐसी अवस्था में समाज असमंजस की स्थिति में आ जाता है। 

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