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नया हरियाणा

रविवार, 22 जुलाई 2018

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जीएसटी के एक साल बाद का हाल : कहीं है खुशी, कहीं गम

राहुल गांधी तो जीएसटी को गब्बर टैक्स कहकर संबोधित करते हैं.

ONE YEAR OF GST HARYANA, naya haryana, नया हरियाणा

1 जुलाई 2018

नया हरियाणा

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर दादरी के व्यापारियों के साथ-साथ आमजन के बीच कहीं खुशी तो कहीं गम हैं। जीएसटी को लेकर जहां एक साल बाद भी आमजन के समझ से बाहर है वहीं व्यापारियों की मिलीजुली प्रतिक्रिया है। जीएसटी को लेकर बातचीत कर ये जानने की कोशिश की गई है कि आखिर जीएसटी से उन्हें कितना फायदा हुआ है या जीएसटी लागू होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

 

एक जुलाई को देश में गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स यानि जीएसटी लागू होने को एक साल पूरा हो गया है। जीएसटी के साथ व्यापारियों और आम लोगों का साल भर का ये सफर काफी उतार चढ़ाव भरा रहा। शुरुआती दिक्कतों के बाद सरकार ने जीएसटी में कुछ बदलाव किए और कुछ सामानों पर लगने वाली जीएसटी की दरों को भी घटाया। अब जब जीएसटी के एक साल पूरा हो रहा है तो व्यापारियों के साथ-साथ आमजन में कुछ ने सही तो कुछ ने गलत करार दिया।  

 

कपड़ा व्यापारी राजेश गुप्ता का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद कपड़े की कीमत बढ़ गई है और काम घटने से रोजगार पर भी असर पड़ा है। हालांकि ग्राहक जीएसटी के झंझट में नहीं पडऩा चाहता है। वहीं खल-बिनौला की दुकान चलाने वाले हरिओम को जीएसटी को लेकर खासी नाराजगी है। उनका कहना है कि जिन चीजों पर पहले टैक्स नहीं था उन पर भी टैक्स लग गया है जिससे उनके व्यापार पर असर पड़ा है। पहले उसकी दुकान से अच्छा-खासा फायदा मिल जाता था तो अब सामान के रेट पर जीएसटी लागू होने पर ग्राहक कम आ रहे हैं। अन्य दुकानदारों का कहना है कि हर महीने जीएसटी रिटर्न भरने में लंबी कागजी प्रक्रिया होती है। जिसके लिए उनको अलग से अकाउंटेंट रखना पड़ता है और उसको 25-30 हजार रुपये देने पड़ते हैं जिससे छोटे व्यापरियों का नुकसान हो रहा है।

 

अकाउंटेंट सचिन कुमार कहते हैं कि जीएसटी लागू होने से रिटर्न भरने में कोई दिक्कत नहीं आती। इससे व्यापार में स्पष्टता होती है और किसी प्रकार का गलत कार्यों के पचड़े से बच सकते हैं। वहीं मीना गोयल का कहना है कि सरकार ने जीएसटी लगाकर सहीं किया। इसी के कारण आज अनाप-शनाप रेट से पीछा छुट गया है। आज हमे सही रेट पर सामान मिल रहा है। मनीष कुमार कहते हैं कि पहले व्यापारियों की मनमर्जी चलती थी, अब जीएसटी लागू होने के बाद हमें सही रेट पर सामान मिल रहा है। वहीं ज्वलैर्स मुकेश सोनी कहना कि जीएसटी लगाने में जल्दबाजी की गई है आम लोगों को अभी तक भी नही पता कि जीएसटी क्या है। जो कार्य सौ रूपये का था वो अब बीस रूपये का रह गया है। स्वीटस दुकान के मालिक अशोक स्वामी का कहना है कि जबसे जीएसटी लगी है तब से सारे देश व प्रांत की व्यवस्था बिगड़ गई है। इससे जनता काफी परेशान है। वहीं गारमैंटस व्यापारी अशोक का कहना है कि जीएसटी लगने से पहले सभी कार्य दो नंबर के होते थे अब सारे काम एक नंबर के होते हैं। पहले अलग-अलग स्थानों से माल आने पर अलग-अलग टैक्स देना पड़ता था वो अब एक बार ही देना पड़ता है। जीएसटी से हम ओर हमारे ग्राहक दोनों खुश हैं। वहीं दुकानदार ने बताया कि ऑनलाइन पैमेंट की सुविधा से भी ग्राहक काफी खुश हैं। वहीं सुरजभान ने बताया कि सरकार के जीएसटी लागू करने के बाद भी नकली बिल बनाकर दो नंबर काम किया जाता है आम जनता को पत्ता ही नही होता कि दुकानदार ग्राहक से कितनी जीएसटी लगाकर बिल वसूल कर रहा है।


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