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नया हरियाणा

शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.साहिब सिंह वर्मा : गरीब, दलित और किसानों के मसीहा!

दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में आज भी साहिब सिंह वर्मा की सादगी की मिसालें दी जाती हैं.

Former Chief Minister of Delhi Dr. Sahib Singh Verma, naya haryana, नया हरियाणा

30 जून 2018

नया हरियाणा

गरीब, दलित, पिछड़े और किसानों के मसीहा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.साहिब सिंह वर्मा जी को उनकी पुण्यतिथि( 30 जून 2007) पर कोटि कोटि नमन और भावपूर्ण श्रद्धांजलि.

साहिब सिंह वर्मा भारतीय राजनीति का वो नाम जिन्हें उनकी सादगी और ईमानदारी के लिए जाना जाता है. बाहरी दिल्ली के मुंडका गांव में एक किसान परिवार में पैदा हुए साहिब सिंह वर्मा ने शिक्षा जगत के साथ-साथ केंद्र में मंत्रीपद और दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने तक का गौरव हासिल है. 15 मार्च 1943 को साहिब सिंह वर्मा का जन्म हुआ था. पिता मीर सिंह और माता भरपाई देवी दोनों किसान थे. किसानी करते हुए ही उन्होंने इनका लालन-पालन किया. किसान परिवार में जन्में वर्मा साहब आरंभ से ही आरएसएस से जुड़ गए थे. जिसके कारण उनकी समाज और राष्ट्र के प्रति रूचि में वृद्धि होती चली गई. मात्र 11 वर्ष की आयु में इनका विवाग इनकी नाम राशि साहिब कौर से 1954 में हुआ और जिनसे उनके दो बेटे और तीन लड़कियां हुईं.
दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए करने के पश्चात उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पुस्तकालय विज्ञान में पीएच.डी. की डिग्री हासिल की और दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह कॉलेज में लाइब्रेरियन पद पर कार्यभार संभाला. 
राजनीतिक जीवन
राजनीतिक जीवन की शुरूवात 1977 में दिल्ली नगर निगम के पार्षद के तौर पर की. तब उन्होंने शपथ अपने गुरु राधा किशन के नाम पर ली. जो स्वतंत्रता संग्राम में सेनानी रहे थे. जिनके आदर्शों का पालन साहिब सिंह वर्मा ने आजीवन किया. दिल्ली के मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना के नेतृत्व में बनी सरकार में ये शिक्षा और विकास मंत्री बने. परंतु 1996 में मदन लाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, जिसके कारण उनके स्थान पर मुख्यमंत्री का कार्यभार साहिब सिंह वर्मा को सौंप दिया गया था. दिल्ली में प्याज के बढ़ते दामों के कारण सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बना दिया गया था.
यह बात साहिब सिंह वर्मा को इतनी अखरी की उन्होंने तत्काल मुख्यमंत्री निवास खाली कर दिया और अपने परिवार सहित डीटीसी की बस पकड़ कर मुंडका अपने गांव पहुंच गए.
बाहरी दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्र में साहिब सिंह वर्मा की सबसे ज्यादा लोकप्रियता थी. जिसकी झलक 1999 के लोकसभा चुनाव में दिखी, जब उन्हें 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतवाकर संसद में भेजा गया और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी एनडीए की सरकार में आपको श्रम और नियोजन मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया.
मुख्यमंत्री रहते हुए भी आपकी सादगी के किस्से दिल्ली के लोगों के जुबान पर आज भी चढ़े हुए हैं. आप मोरी गेट के सरकारी स्कूल में मुख्यमंत्री होते हुए आम इंसान की तरह टहलते हुए मिल जाते थे. 
स्कूल और शिक्षा से आपके जुड़ाव की बानगी यहां तक थी कि जिस समय आपकी कार  की टक्कर एक ट्रक से हुई. उस समय 30 जून 2007 को आप सकीर जिला से नीम का थाना में एक विद्यालय की आधारशिला रखकर वापिस दिल्ली आ रहे थे. उस दुर्घटना में आपके साथ मौजूद कार चालक देवेश, सहायक नरेश अग्रवाल, सुरक्षाकर्मी जसवीर सिंह भी उस एक्सीडेंट का शिकार हो गए. उन्हें भी उपचार के दौरान बचाया नहीं जा सका.  
 

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