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नया हरियाणा

रविवार, 26 मई 2019

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हरियाणवी पहलवान लीला राम : भारत को दिलाया था पहला स्वर्ण पदक!

वेल्स के शहर कार्डिफ को कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन के लिए 12 साल इंतजार करना पड़ा.

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29 जून 2018



नया हरियाणा

वेल्स के शहर कार्डिफ को कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन के लिए 12 साल इंतजार करना पड़ा. 1946 में वहां कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन होना था जो दूसरे विश्व-युद्ध के कारण नहीं हो सका था. छठा संस्करण ब्रिटिश एम्पायर व कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम से वेल्स में हुआ. भारत को 1934 के बाद मतलब 24 वर्षों के लम्बे अंतराल के बाद वर्ष 1958 में वेल्स के कार्डिफ़ शहर में तीन पदक हासिल हुए.
भारत में इन खेलों को मिल्खा सिंह की कामयाबी के लिए भी याद किया जाता है. फ्लाइंग सिख ने भारत को पहली बार स्वर्ण पदक दिलाया. देश में उस दिन जश्न मना था. मिल्खा सिंह ने 440 गज की दौड़ में रिकॉर्ड बनाकर इन खेलों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. वहीं बाद में हरियाणा के लीला राम ने 100 किलोग्राम वर्ग के कुश्ती मुकाबलों में स्वर्ण पदक जीतकर इस खुशी को दोगुना कर दिया था.
लीला राम सांगवान का जन्म 30 नवंबर 1930 को हरियाणा के चरखी दादरी जिले में हुआ था.  वे  भारत के पहले ऐसे पहलवान थे, जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने 1958 के ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल खेलों में हेवीवेट (100 किग्रा) श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता। लीला राम ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हेवीवेट और सुपर हेवीवेट श्रेणियों में फ्रीस्टाइल कुश्ती में भाग लिया।
हरियाणा का कुश्ती में ऐतिहासिक योगदान
हरियाणा के उदयचंद ने विस्व कुश्ती में तीसरा स्थान प्राप्त किया था. सज्जन सिंह ने रुस्तमें हिंद की उपाधि से सम्मानित किया गया है. मास्टर चंदगीराम ने रिकार्ड दो बार भारत केसरी व हिंद केसरी का सम्मान हासिल किया.
वर्तमान में सुनील कुमार, योगेश्वर दत्त, गीतिका जाखड़, साक्षी मलिक, फौगाट बहनें(विनस, रितु, गीता, संगीता व बबीता) आदि हैं.
1948 में, वह उस समय नसीराबाद में स्थित ग्रेनेडियर रेजिमेंटल सेंटर में शामिल हो गए, जहां कुश्ती में उनका करियर शुरू हुआ। उन्होंने 50 के उत्तरार्ध और 60 के दशक के उत्तरार्ध में राष्ट्रीय हेवीवेट चैंपियन के रूप में शासन किया। लीला राम कुश्ती टीम के कप्तान थे, जिन्होंने मेलबर्न में 1956 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भाग लिया था। 1958 में, उन्होंने कार्डिफ़ में आयोजित ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता. उन्होंने फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के जैकबस हनकोम को हराया। इस सीरिज में, उन्होंने आयोजन के पहले राउंड में कनाडा, पाकिस्तान और इंग्लैंड से पहलवानों को हराया। 1956 में, भारत-ईरान ट्रायल के दौरान, उन्होंने रुस्तम-ए-ईरान मोहम्मद अली को हराया। 
सक्रिय कुश्ती से सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने खेल के साथ अपने संबंध बनाए रखे। वह भारतीय कुश्ती टीम के मुख्य कोच थे, जिन्होंने 1968 में मेक्सिको शहर में आयोजित ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और दिल्ली में आयोजित विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में भाग लिया था। वह 1973 तक सेवा टीम के कोच के रूप में बने रहे। उन्होंने 1980 से 1988 तक हरियाणा सरकार के खेल विभाग के सहायक निदेशक के रूप में कार्य किया। 1998 में, लिला राम को खेल में उनके योगदान की मान्यता में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।11 अक्टूबर 2003 को भिवानी जिले में चरखी दादरी में उनकी मृत्यु हो गई।
 


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