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नया हरियाणा

रविवार, 23 सितंबर 2018

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बैकडोर से नौकरी देकर पक्का करने के लिए बनाई हुड्डा ने 21 दिन में 4 पॉलिसी!

अफसरों और मुख्यमंत्री सभी के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए, ताकि भविष्य में खिलवाड़ न हो सके।

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26 जून 2018

नया हरियाणा

भूपेंद्र हुड्डा सरकार ने हरियाणा में नौकरियों की बंदरबांट के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जाकर ऐसी पॉलिसियां बनाई जो कोर्ट में जाते ही धराशाई हो गई। इन नीतियों के कारण योग्य युवाओं की योग्यता के साथ खिलवाड़ किया गया और दूसरी तरफ लगाए गए अपने चहेतों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर दिया।  सुप्रीम कोर्ट को इन मामलों में संज्ञान लेकर उन पर अफसरों पर भी कार्यवाही करनी चाहिए, जिन्होंने मुख्यमंत्री पद की चापलूसी के लिए अपनी डयूटी का सही से निर्वाह नहीं किया.

-16 जून 2014ः ग्रुप बी के कर्मचारी जिनकी 28 मई 2014 तक 3 साल की सर्विस पूरी हो चुकी है, पक्के होंगे।

-18 जून 2014ः ग्रुप सी के कर्मचारी जिनकी 28 मई 2014 तक 3 साल की सेवा पूरी हो चुकी है, नियमित होंगे।
-7 जुलाई 2014ः ग्रुप बी के जो कर्मचारी 31 दिसंबर 2018 तक 10 साल का सेवाकाल पूरा कर लेंगे नियमित होंगे।
-7 जुलाई 2014ः ग्रुप सी व डी को जो कर्मचारी 31 दिसंबर 2018 तक 10 साल का सेवाकाल पूरा कर लेंगे पक्के होंगे।

हाईकोर्ट का फैसला

- 2014 पॉलिसी में पक्के हुए कर्मियों की जगह 6 माह में नियमित भर्ती हो
- हुड्डा सरकार के कार्यकाल में बनाई गई 3 व 10 साल की रेगुलराइजेशन पॉलिसियों समेत वर्ष 2014 में बनी सभी रेगुलराइजेशन पॉलिसियों को रद्द।
- कच्चे कर्मचारियों की जगह 6 महीने में रेगुलर भर्ती की जाये और तब तक इन कच्चे कर्मचारियों को सेवा में रखा जा सकता है।
- इन पॉलिसियों के तहत पक्के हुए कर्मचारियों को दिए गए सभी लाभ वापस लिए जाएंगे।
- सरकार भविष्य में किसी भी कच्चे कर्मचारी को पक्का भी नहीं कर पाएगी और न ही रेगुलराइजेशन पॉलिसी बना सकेगी।
- कच्चे कर्मचारियों को आयु में छूट देने का विकल्प। भविष्य में होने वाली पहली रेगुलर भर्ती में उनके सेवाकाल के समय के बराबर आयु में सिर्फ एकबार के लिए छूट दी जाएगी।
- वर्ष 2011 या उससे पहले की किसी रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत पक्के हुए कर्मचारियों पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कई शर्तें भी हटाई :3 अगस्त 2011 की अधिसूचना में 10 अप्रैल 2006 तक 10 साल की सेवा पूरी करने वाले एडहॉक, कांट्रेक्ट, वर्कचार्ज, डेलीवेजिज व पार्ट टाइम काम करने वाले कर्मियों को स्वीकृत पद पर रेगुलर किया जाना था। उसमें शर्त थी कि संबंधित कर्मी या तो रोजगार कार्यालय के जरिया या विज्ञापन जारी कर विभागीय चयन समिति ने रखा हो। इस शर्त को भी हटाया गया।
फैसले का सबसे ज्यादा असर इन पर :फिलहाल 4,654 कर्मियों की नौकरी पर खतरा है। भविष्य में जिन पर इस फैसले का असर पड़ेगा उनमें सबसे ज्यादा 16 हजार गेस्ट टीचर्स हैं। कॉलेज गेस्ट व एक्सटेंशन लेक्चरर, डाटा एंट्री अॉपरेटर और विभिन्न विभागों में नियुक्त कच्चे कर्मचारी प्रभावित होंगे।
2011 की पॉलिसी में लिखा था आगे से कच्चे कर्मी नहीं होंगेःउमा देवी केस में दिए फैसले के अनुसार हरियाणा सरकार ने 29 जुलाई 2011 को रेगुलाइजेशन पॉलिसी बनाई। जिसमें 10 अप्रैल 2006 को कट अॉफ डेट मानते हुए 10 साल की सर्विस पूरे करने वाले बी, सी व डी सभी कर्मियों को पक्का किया गया। साथ ही स्पष्ट लिखा कि ये वन टाइम पॉलिसी है और भविष्य में कोई भी एडहॉक, कांट्रेक्ट, दैनिक वेतन कर्मचारी नियुक्त नहीं किया जाएगा।
उमा देवी पर फैसला क्यों था :उमा देवी का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो उसे 5 जजों की संवैधानिक पीठ को सौंप दिया गया। 10 अप्रैल 2006 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि राज्यों में बैकडोर से नौकरी देकर पक्का करना संवैधानिक है। सभी राज्य वन टाइम पॉलिसी बनाकर 10 अप्रैल 2006 तक 10 साल की नौकरी पूरा कर चुके कर्मियों को पक्का कर दें लेकिन भविष्य में रेगुलर भर्ती ही की जाए। कोर्ट ने पॉलिसी बनाने के लिए 6 माह का समय दिया था, हालांकि हरियाणा ने पॉलिसी लाने में 5 साल लगाए।
पूर्व सीएम दे रहे बिल से नौकरी बचाने का सुझाव :हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रही है, लेकिन वहां राहत के आसार कम है। पहली वजह है कि हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के फैसले के प्रकाश में ही आया है। दूसरी सरकार के एडवोकेट जनरल भी अपनी राय में कह चुके हैं कि 2014 की रेगुलाइजेशन पॉलिसी वैध नहीं थी। एेसे में सरकार इस मामले को कुछ माह खींचना चाहेगी ताकि गेंद अगली सरकार के पाले में जाए। करीब एक साल बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव हैं। हालांकि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार को अध्यादेश या विशेष सत्र में बिल लाकर नौकरी बचाने का सुझाव दे रहे हैं।
हाईकोर्ट के फैसले पर तीन सदस्यीय कमेटी करेगी मंथन :कांग्रेस सरकार की पॉलिसी पर हाई कोर्ट के आए फैसले के बाद 4600 से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरी को लेकर सरकार ने कदम उठाया है। सरकार ने इस मामले में मुख्य सचिव के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी में सीएस के अलावा फाइनेंस कमिश्नर और एलआर को शामिल किया गया है। राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि यह कमेटी जल्द ही इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेंगे। कमेटी यदि रिव्यू पीटिशन या सुप्रीम कोर्ट में जाने की सिफारिश करती है तो सरकार पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की वजह से कर्मचारियों का भविष्य अंधकार होने से बचाने के लिए सरकार प्रयासरत है।
 


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