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नया हरियाणा

शनिवार, 17 नवंबर 2018

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कुलदीप बिश्नोई अपने स्वर्गीय पिता भजनलाल की कसम खाकर कहें कि जो मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा वो गलत है -जवाहर यादव

आम बातचीत में कसमें खाने-खिलाने का रिवाज अब राजनीति में भी प्रवेश करता दिख रहा है।

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25 जून 2018

जवाहर यादव

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कुलदीप बिश्नोई को आईना क्या दिखाया, उनका परिवार तो मानो सुधबुध खो बैठा है। कोई गलत जानकारी बांटे जा रहा है, तो किसी को यह ही समझ नहीं आ रहा कि सीएम साहब ने आदमपुर क्षेत्र में जनसभा में किस चुनाव का जिक्र किया था। ना किसी के पास मुख्यमंत्री  की बातों का जवाब है, ना उन्हें होश है कि लोगों के बीच फजीहत से कैसे बचना है। असल में भजनलाल के सारे वंशज एक से एक नमूने हैं, और अब खुद कुलदीप बिश्नोई के भाई और पत्नी CM साहब की बात को सही साबित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल  ने स्पष्ट तौर पर 2009 विधानसभा चुनाव का जिक्र किया है। उन्होंने बात शुरू करते वक्त ही कहा कि दो चुनाव पहले, पिछले लोकसभा चुनाव से पहले वाले विधानसभा चुनाव के वक्त.. इससे हरियाणा का कोई सामान्य राजनीतिक शख्स भी जान जाएगा कि बात 2014 की नहीं, 2009 की हो रही है। लेकिन चंद्रमोहन और रेणुका बिश्नोई को यह बात समझ नहीं आई, उनकी सुई 2014 पर अटकी हुई है। 2014 विधानसभा चुनाव से पहले तो गठबंधन वैसे ही टूट चुका था और 2011  में जब गठबंधन हुआ था तब यह स्पष्ट था कि कुलदीप बिश्नोई पहले ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे। चौधरी भजनलाल का तो तब स्वर्गवास हो चुका था इसलिए उनके नाम की चर्चा हो भी कैसे सकती थी।
असल में कुलदीप बिश्नोई के परिवार को अपनी झेंप मिटाने का कोई तरीका तो सूझा नहीं। इसलिए उन्होंने सोचा कि लोगों को कन्फ्यूज कर दिया जाए। इसी तरह लोगों को बेवकूफ बनाकर राजनीति करने की वे पहले कोशिश करते रहे हैं और यही तरीका अब अपना रहे हैं। यही कारण है कि भजनलाल की प्रदेश स्तर की राजनीतिक विरासत को कुलदीप ने दो विधानसभा हलकों में समेट दिया है।
रेणुका बिश्नोई ने कहा है कि आदमपुर के विकास के लिए ट्रक भरके चिट्ठियां मुख्यमंत्री को उनके पति ने लिखी हैं। रेणुका को आदर के साथ यह चुनौती है कि वे जनता के सामने वे तमाम चिट्ठियां लेकर आएं जिनका वे जिक्र कर रही हैं कि उन पर सरकार ने काम नहीं किया। हरियाणा की जनता देखे कि उन चिट्ठियों से ट्रक भरा जा सकता है या शर्ट की जेब।
इस स्थिति में भी कुलदीप बिश्नोई का गायब रहना दिखाता है कि उनके मन में कोई खोट है। भाई और पत्नी के जरिए जवाब देने की बजाय कुलदीप को खुद सामने आना चाहिए और बताना चाहिए कि 2009 में वैसी बातें हुई थी या नहीं जैसी माननीय मुख्यमंत्री जी ने बताई हैं। जैसे जवाब दो दिन से भजनलाल परिवार के सदस्यों की तरफ से आ रहे हैं उनसे तो यह और ज्यादा साबित हो जाता है कि चौधरी भजनलाल जैसी राजनीतिक सूझबूझ उनके वंशजों में बिल्कुल नहीं है। यही तो सीएम साहब कह रहे हैं।


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