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नया हरियाणा

मंगलवार, 13 नवंबर 2018

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हरियाणा के अफसर क्यों नहीं कर रहे अपनी संपत्तियों को सार्वजनिक!

सरकार को इस मामले में सख्ती से काम लेना चाहिए.

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23 जून 2018

नया हरियाणा

आखिर जनता की सेवा के नाम पर मेवा कूटने वाले अफसरों की पहचान हो सके, इसके लिए जरूरी है कि उनके पास कितनी और कहां पर संपत्ति है. इसका पब्लिक को पता होना चाहिए. बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक की संपत्ति सार्वजनिक होनी चाहिए. 

हरियाणा के 33 आईएएस और आईपीएस अधिकारी अपनी संपत्ति सार्वजनिक न करने पर अड़े हुए हैं। 9 वर्ष पुराना केस राज्य सूचना आयोग में विचाराधीन है। इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई 26 जून को राज्य सूचना आयुक्त योगेंद्र पाल गुप्ता व हेमंत अत्री की डिवीजन बेंच करेगी। 
आयोग ने कार्मिक विभाग के अवर सचिव, डीजीपी कार्यालय के अधीक्षक, पुलिस मुख्यालय के एसपी (कानून व्यवस्था) व अपीलकर्ता पीपी कपूर को भी सुनवाई के लिए बुलाया है। कुल 69 में से 36 आईएएस ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की सहमति वर्ष 2010 में सरकार को दे दी थी, जबकि 33 आईएएस ने मना कर दिया था। तब से केस सूचना आयोग में लंबित है। 

आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि 9 वर्ष पूर्व 16 दिसंबर 2009 को उन्होंने मुख्य सचिव को आरटीआई भेजकर प्रदेश के सभी आईएएस, आईपीएस, एचपीएस, एचसीएस अफसरों की संपत्ति का ब्योरा मांगा था। पुलिस मुख्यालय ने तो इस सूचना को देने से स्पष्ट मना कर दिया, जबकि सरकार ने सभी आईएएस अधिकारियों से इस बारे में उनकी राय मांगी थी। इस पर आईएएस अशोक खेमका, समीर माथुर, उमाशंकर, पीके दास, डा. जे गणेशन, डॉ. अमित अग्रवाल सहित कुल 36 आईएएस ने संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की सहमति सरकार को दे दी थी। 

फेसबुक पर राजेश नांदल ने इस पर करारा व्यंग्य करते हुए लिखा है कि-

सरकारी मास्टर और मास्टरनी अपनी तनख्वाह पै घणै इतरावै थे ,इब सरकार न सारी संपत्ति व टूम ठेगरी का भी बयोरा मांग कर छुट्टियां खराब कर दी..घर आली टूम पूछ तै ही सीठणे से सुनावैगी..जायरौय बयाह मे थारे घर आलै न मर पड़ कै एक गूठी घाली थी उस का रिकॉर्ड सरकार न भी मांग लिया...
कोई नयूँ कहगी ,तेरी मां जो टूम ,ठेगरी घाली थी दूसरे दिन ले के अपणै धड़ महं धर ली थी अर आज ताई उस न हवा नी लागण दी .
कोई नयूँ कहगी ,थारै उस टाईम था इतणा बयोत ,इब बकवाद कर रहया ,पहलम घड़वा दे फेर बुझिये ,एक दो गुठी सै वो पीहर त जापै मह चूची धुवाई ले क आई थी इब वे भी तेर अर तेरी सरकार क रड़कन लागी...

कोए नयूँ कहगी, मेरा तो तमनै फददू काट.दिया ,दुनिया त दिखाणं खातिर निरी घाल दी अर दूसरे दिन मुहं दिखाई होए पाछै ,तेरी मां न नयूँ कह कै मीठी बोल क उलटी उतरवा ली ,लयाँ बेटी मननै दे मै संभाल क धर दयूं गी अर वे फेर तेरे भाई की बहूं क चढा दी ,मनै रौला मचाया तो नयूँ बोली तेरी नई गड़वा देंगे और इब तेरी तंख्वाह हाथ में लेण जोंगी हुई तो पलाट लेवण अर बनावैण का रोलाँ पडैगा ,इब मेरे इतणै पुराने जख्मों न हरा ना करै...
इसे इसे तो घणै लाठठे बाजँगे,,
काश सरकार कभी सारे टैक्सीज का भी बयोरा मांग ले कि आमजन कितना टैक्स पे करता ...।
काश इसका बयोरा भी सार्वजनिक करें कि मंत्रियों की संपत्ति चंद सालों में कितनी रफ्तार से कितने गुना अधिक कैसे हो जाती है....मास्टर सारी उम्र इमानदारी की कमाई से रिटायरमैंट तक बच्चों को जिम्मेदारी व मकान ही बना पाता... हां कुछ टयूशन वाले व्यापारी भाई बहुत धन खींचते हैं पर बाकी बेचारे .....।।।।


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