Privacy Policy | About Us | Contact Us

नया हरियाणा

सोमवार , 23 जुलाई 2018

पहला पन्‍ना English लोकप्रिय हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप

हरियाणा में 10 लोकसभा सीटों पर होगा भाजपा का सफाया!

हरियाणा में विपक्ष किस विजन के साथ मोदी सरकार को टक्कर दे पाएगा.

Haryana Lok Sabha seats, Karnal, Ambala, Kurukshetra, Gurgaon, Faridabad, Rohtak, Sirsa, Hisar, Bhiwani Mahendragarh, Sonipat, naya haryana, नया हरियाणा

22 जून 2018

नया हरियाणा

क्या हरियाणा में भाजपा का 10 लोकसभा सीटों से सफाया होगा? यह सवाल कम विपक्ष की इच्छा ज्यादा लगता है. जबकि ऐसा करने के लिए विपक्ष के पास कोई खास रणनीति नहीं है. विपक्ष केवल इस भरोसे बैठा है कि मोदी का भूत जनता के सिर से उतर जाएगा. बिना बड़े विजन के विपक्ष मुगालते में रह सकता है और अपनी हार का ठिकरा ईवीएम पर फोड़ सकता है.

हरियाणा में भाजपा 10 लोकसभा सीटों पर जीतने की रणनीति बना रही है और मीडिया वालों को यह बता रही है कि हम जीती हुई 7 सीट भी हार रहे हैं. विपक्ष इसी में खुश हो जाएगा कि मोदी लहर नहीं रही. ये तो आरएसएस का सर्वे भी बता रहा है. यह रणनीति युद्धों में सबसे ज्यादा आजमाई हुई रणनीति है.

जिसमें सामने वाले को जीत का अहसास करवाकर कमजोर किया जाता है. अमित शाह फिलहाल इस रणनीति में सफल हुए हैं. कांग्रेस और इनेलो को यह यकीन हो गया है कि मोदी लहर हरियाणा में खत्म हो गई है.

जबकि जनता में मोदी का जादू कम जरूर हुआ है पर उनकी बातों से लगता है कि उन्हें उम्मीद अब भी मोदी में ही नजर आती है.

दरअसल पत्रकार और राजनीति के विश्लेषक जब लोकसभा सीटों का आकलन करते हैं तो वो वर्तमान सांसदों का आकलन करते हैं जबकि भाजपा की यह रणनीति रहती है कि वह ज्यादातर नए चेहरे चुनावी मैदान में उतारती है और खासकर विपक्षी खेमे में सेंध लगाकर उनके चेहरों को टिकट देती है.

इसलिए चुनाव के समय नेताओं का पार्टी बदलना काफी हद तक निर्णायक होता है. चलती हुई सरकार में कोई नेता विपक्षी दल में जाता है तो उसके जीतने की संभावनाएं उतनी कम हो जाती हैं, जबकि विपक्षी दल का नेता जब सरकार में शामिल होता है तो उसके जीतने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं.

जब तक भाजपा 10 सीटों पर केंडिडेट घोषित नहीं कर देती तब तक हार का तो सवाल ही नहीं बनता. केंडिडेट और मोदी लहर दो बड़े फैक्टर चुनाव जीतने में सहायक होंगे. सबसे बड़ी बात मोदी सरकार ने अभी अपना चुनावी पैंतरा तो खेला ही नहीं है. वर्तमान हालात में मोदी सरकार की जीत मुश्किल लग रही है, पर इन्हीं हालातों के साथ मोदी-अमित शाह चुनाव में उतरेंगे. यह कल्पना राजनीति में अल्प-ज्ञानी ही कर सकता है.

चुनाव प्रबंधन के दो बड़े खिलाड़ी 2019 के चुनाव को क्या रंग देते हैं, इसकी कल्पना के कुछ सूत्र ही पकड़े जा सकते हैं. राम मंदिर का फैसला, धारा 370 का हट जाना, किसानों को फसल की डेढ गुना कीमत देना आदि-आदि.


बाकी समाचार