Privacy Policy | About Us | Contact Us

नया हरियाणा

शनिवार, 22 सितंबर 2018

पहला पन्‍ना English लोकप्रिय हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप

अभय सिंह चौटाला ने बिगाड़ा हुड्डा और बिश्नोई का खेल!

अभय सिंह चौटाला की इस चाल को राजनीति के शतरंज पर ढाई की चाल कहा जाना चाहिए.

Abhay Singh Chautala, Bhupendra Singh Hooda, Kuldeep Bishnoi, Ashok Tanwar, Mayawati, naya haryana, नया हरियाणा

19 जून 2018

नया हरियाणा

अशोक तंवर को अभय सिंह चौटाला ने अभय दान दिलवा दिया, वरना अशोक तंवर की कांग्रेस के अध्यक्ष पद से छुट्टी लगभग तय थी. आपको याद हो भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुलदीप बिश्नोई की मुलाकात. इन दोनों की मुलाकात ने पूरे हरियाणा की राजनीति में हलचल मचा दी थी, क्योंकि चिर-विरोधियों की मुलाकात के दूरगामी फायदे-नुकसान होते हैं. भूपेंद्र हुड्डा और कुलदीप बिश्नोई की दुश्मनी का ठोस आधार है.
 2005 में भजनलाल की जगह छीनकर मुख्यमंत्री बनने वाले भूपेंद्र हुड्डा लगातार कुलदीप बिश्नोई के निशाने पर रहे हैं और रही-सही कसर हुड्डा ने उनके एमएलए तोड़कर सरकार बनाकर कर दी थी. उसके बाद तो लगता था कि दोनों नेताओं के संबंध कभी सामान्य नहीं होंगे. पर राजनीति में दुश्मनी और दोस्ती दोनों फायदा-नुकसान देख कर की जाती हैं.
लेकिन राजनीति की मजबूरियों ने यह बता दिया है कि कोई भी दूरी स्थाई नहीं होती है.  लोहड़ी व मकर संक्रांति के कार्यक्रम में भूपेंद्र हुड्डा के घर में कुलदीप बिश्नोई का पत्नी रेणुका के साथ पहुंचना यह साबित कर गया था कि राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही अस्थाई होती हैं. जरुरतों के हिसाब से दोनों ही बनती और बिगड़ती रहती हैं. कुलदीप बिश्नोई और भूपेंद्र हुड्डा का नया याराना इसका प्रमाण है.
पर इस परिणाम का कारण है अशोक तंवर का कांग्रेस में बढ़ता कद. जिसे बढ़ते देखकर हुड्डा और बिश्नोई दोनों की नींद हराम हो रही है. ऐसे में तंवर के पर काटने के लिए दोनों नेता लामबंद हुए. पर इन दोनों के खेल को खराब किया अभय सिंह चौटाला की चाल ने. अभय सिंह ने जैसे ही बसपा के साथ गठबंधन किया, वैसे ही अशोक तंवर का कांग्रेस में दोबारा जरूरत बढ़ गई. दरअसल एक चाल से अभय सिंह ने सिसायत के कई समीकरण में उलट फेर कर दिए. उन्होंने सबसे ज्यादा हुड्डा और बिश्नोई का खेल बिगाड़ा! अब कांग्रेस पर यह दवाब साफ दिख रहा है कि वह भाजपा की काट के तौर पर गैर जाट की राजनीति के नेता बिश्नोई को आगे करे या जाट नेता भूपेंद्र हुड्डा को. या दलित और युवा चेहरे तंवर पर दांव खेले. हालांकि लग यह रहा है कि कांग्रेस भाजपा वाली रणनीति अपनाते हुए मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा चुनाव से पहले नहीं करेगी.

अभय सिंह चौटाला की इस चाल को राजनीति के शतरंज पर ढाई की चाल कहा जाना चाहिए. क्योंकि इस चाल से उन्होंने हुड्डा और बिश्नोई दोनों को कमजोर कर दिया है और कांग्रेस के भीतर तंवर के प्रेशर को बढ़ाकर अपना राजनीतिक फायदा कर लिया है. दूसरी तरफ बसपा गठबंधन से इनेलो के वोट प्रतिशत में वृद्धि होना स्वाभाविक है.


बाकी समाचार