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नया हरियाणा

शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

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पानीपत जिले की चार सीटों पर भाजपा की हालत खराब!

भूपेंद्र हुड्डा इन चारों सीटों पर मेहनत करते हुए साफ दिख रहे हैं, बाकी दल नदारद हैं.

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18 जून 2018

नया हरियाणा

पानीपत जिले के अंतर्गत चार विधान सभा सीटें आती हैं. पानीपत ग्रामीण, पानीपत शहरी, समालखा और इसराना. जिनमें से इसराना की सीट रिजर्व सीट है.
2014 के चुनाव में चारों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी. पानीपत ग्रामीण सीट पर भाजपा के महिपाल सिंह ढांडा ने निर्दलयी प्रत्याशी धारा सिंह रावल को हराया था. यहां पर महिपाल ढांडा को 62,074 वोट मिले थे. निर्दलीय धारा सिंह को 25,942 वोट मिले. इनेलो प्रत्याशी निशान सिंह को 23,804 वोट मिले. कांग्रेस के खुशीराम जागलान को 15,247 वोट मिले. हालांकि पानीपत ग्रामीण सीट पर हुड्डा और इनेलो दोनों की अच्छी खासी पकड़ है.  पकड़ जीत में बदल पाएगी या नहीं, चुनाव के समय बने माहौल पर निर्भर करेगा.
पानीपत शहर से भाजपा की रोहिता रेवड़ी को 92,757  वोट मिले और 5 बार के कांग्रेस विधायक बलबीर पाल शाह के भाई विरेंद्र सिंह शाह को 39,036 वोट मिले. रोहिता रेवड़ी 53,721 वोटों की जीत महिला विधायकों में सबसे बड़ी थी. इनेलो के सुरेश मित्तल को 2630 वोट मिले. पूरे हरियाणा में इनेलो का यहां सबसे कम वोट मिले थे. पानीपत शहरी सीट पंजाबी बहुल सीट है. भाजपा के फतेहचंद विज भी यहां से 5 बार विधायक रह चुके हैं. यहां कुल मिलाकर सीधी टक्कर कांग्रेस और भाजपा की है. कांग्रेस के बड़े नेता शाह परिवार में आपसी फूट उन्हें कमजोर किए हुए है. हालांकि रेवड़ी को लेकर जनता में खुशी नजर नहीं आ रही है.
इसराना सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. यह 2008 के बाद ही अस्तित्व में आई और 2009 व 2014 दोनों चुनावों में कृष्ण कुमार पंवार विजयी रहे. पहली बार इनेलो टिकट पर और दूसरी बार भाजपा टिकट पर. इससे पहले पंवार इनेलो टिकट पर अंसध से 1991, 96 व 2000 में विधायक बने थे. 2014 में कृष्णलाल पंवार को 40,277 वोट मिले. कांग्रेस के बलबीर सिंह को 38,449 वोट मिले थे. इनेलो को बलवान बाल्मीकि को 37,615 वोट मिले. अगले चुनाव में यहां सीधी टक्कर इनेलो और कांग्रेस के बीच होगी.
समालखा से निर्दलीय रवींद्र मछरौली को 53,294 वोट मिले और कांग्रेस के धर्मसिंह छौक्कर को 32,921 वोट मिले. भाजपा के शशिकांत कौशिक को 32,134 वोट मिले. इनेलो की रामभतेरी को 26,477 वोट मिले. फिलहाल यहां भाजपा के पास कोई मजबूत प्रत्याशी नहीं है. शशिकांत कौशिक इनेलो में शामिल हो गए हैं. दूसरी तरफ रवींद्र मछरौली से जनता नाराज चल रही है. ऐसे में मुकाबला सीधे इनेलो के शशिकांत कौशिक और धर्मसिंह छौक्कर के बीच दिख रहा है. अगर संजय छौक्कर धर्मसिंह की टिकट काटकर कांग्रेस की टिकट खुद ले आते हैं तो यहां इनेलो बढ़त में आ जाएगी. 
भाजपा पानीपत जिले की चारों सीटों पर फिलहाल सुस्ता रही है और भूपेंद्र हुड्डा लगातार इन चारों सीटों पर मेहनत कर रहे हैं और उन्होंने अपनी दूसरी जनक्रांति रथयात्रा आरंभ भी इसी जिले की समालखा सीट से की. भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा इन चारों सीटों पर काफी मेहनत कर रहे हैं. इनेलो को जितनी मेहनत करनी चाहिए उतनी कर नहीं रही है. भाजपा लगभग सभी सीटों पर पिछड़ती हुई दिख रही है. वर्तमान समीकरणों से यह लग रहा है कि भाजपा पंवार को छोड़कर तीन सीटों पर प्रत्याशी बदल सकती है.

कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए कि अगले चुनाव में भूपेंद्र हुड्डा की मेहनत से ये चारों सीटें कांग्रेस के खाते में चली जाए तो. उनकी सक्रियता इन सीटों पर साफ दिख रही है.
 


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