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नया हरियाणा

शुक्रवार, 16 नवंबर 2018

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हरियाणा विधानसभा चुनावों के ऐसे परिणाम जिन्होंने रोक दी थी दिलों की धडकनें!

राजनीति में नजदीकी हार लंबे समय तक टीस बनकर चीस मारती रहती है.

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15 जून 2018

नया हरियाणा

वैसे चुनाव में हार एक वोट से हो या सौ से. जीत तो जीत ही कहलाती है. हां इतना जरूर कह सकते हैं कि मुकाबला जितनी नजदीकी होता है उतनी अधिक रोचकता बढ़ती चली जाती है. जैसे खेलों में एक तरफा मुकाबला रोचकता कम कर देता है, वैसा ही हाल राजनीति में होता है. वैसे सच्चाई यह भी है कि नजदीकी हार लंबे समय तक एक टीस दे जाती है और साथ एक मलाल यह भी रहता है कि ऐसा कर लेता या वैसा कर लेता तो शायद जीत जाता. आइये आज आपको ऐसे  नजदीकी मुकाबलों से आपको रू-ब-रू करवाते हैं.
यूं तो चुनाव जीतने के लिए अच्छी रणनीति होना सबसे जरूरी होता है, लेकिन कई बार भाग्य साथ न दे तो प्रत्याशी को चंद वोटों से हार का मुंह देखना पड़ता है. 
2014 के विधान सभा में ऐसे ही रोचक मुकाबले हुए थे. जब जीतने वाले प्रत्याशी और हारने वाले प्रत्याशी दोनों के पसीने छूट गए थे.
राई सीट पर कांग्रेस के जयतीर्थ दहिया ने इनेलो के इंद्रजीत को मात्र 3 वोट से हराया था. यहां मामला इतना नजदीक था कि कई बार गिनती की गई. 
मंगलसेन (जनसंघ/भाजपा): हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंनत्री और करनाल में भाजपा की साख बनाने वाले मंगलसेन 1968 में जनसंघ के टिकट पर रोहतक से जनसंघ की टिकट पर चुनाव लड़े थे। उन्हें उस समय 17 हजार 534 मत हासिल हुए, जबकि उनके मुकाबले चुनाव लड़ रहे कांग्रेस पार्टी के देवराज को उस समय 17 हजार 468 मत मिले थे। यानी मंगलसेन 66 मतों से यह चुनाव जीत सके थे।
हेमराज (निर्दलीय): 1968 के चुनाव में हथीन सीट पर हेमराज निर्दलीय मैदान में थे, जबकि उनके सामने उस दौर के दिग्गजज नेता देवी सिंह कांग्रेस के टिकट पर ताल ठोंक रहे थे। हेमराज को 7381 और देवी सिंह को 7311 मत हासिल हुए थे। इस तरह से हेमराज ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 70 वोटों से चुनाव जीत गए थे।
रुलिया राम (स्वरतंत्र पार्टी): 1968 के चुनाव में घरौंडा विधानसभा सीट से स्व तंत्र पार्टी ने रुलिया राम को मैदान में उतारा था। उस दौर में स्वमतंत्र पार्टी की राज्यं में खास हैसियत नहीं थी। इसके बावजूद स्वतंत्र पार्टी के रुलिया राम ने 12 मतों से जीत हासिल की थी। रुलिया को 7754 मत मिले थे।
कर्नल राम सिंह (जनता पार्टी): 1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी ने रेवाड़ी से कर्नल राम सिंह को टिकट दिया था। उन्होंसने चुनाव में 19 हजार 563 मत हासिल करके कांग्रेस विशाल हरियाणा पार्टी के शिव रतन सिंह को 86 मतों से शिकस्त दी।
राव बंसी सिंह (कांग्रेस): 1977 में अटेली हलके में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे राव बंसी सिंह व जनता पार्टी के अजीत सिंह के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। राव बंसी सिंह ने 19,343 वोट हासिल करके अजीत सिंह को 66 मतों से पराजित किया। अजीत सिंह को 19 हजार 277 वोट मिले थे।
धर्मपाल सिंह (हविपा): 1991 के विधानसभा चुनाव में दादरी हलके से धर्मपाल सिंह हरियाणा विकास पार्टी के उम्मीरदवार थे। धर्मपाल ने कांग्रेस के जगजीत सिंह को 80 मतों से पराजित किया। धर्मपाल सिंह को 20 हजार 918 और जगजीत सिंह को 20 हजार 838 मत मिले।
भागमल (जनता पार्टी): 1982 के विधानसभा चुनाव में साढौरा सीट पर जनता पार्टी व कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर थी। यहां से जनता पार्टी के उम्मीदवार भागमल ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रभुराम को 10 मतों से पराजित किया। भागमल को जहां 20 हजार 981 वोट मिले वहीं प्रभुराम को 20 हजार 971 मतों से संतोष करना पड़ा।
राजेश शर्मा (कांग्रेस): 1982 में यमुनानगर में कांग्रेस के राजेश शर्मा ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा की कमला वर्मा को 63 मतों से हराया। राजेश शर्मा ने 16 हजार 289 वोट हासिल किए, जबकि कमला वर्मा को 16 हजार 226 वोट मिले।
वीरेंद्र सिंह (जनता दल): 1991 के चुनाव में नारनौंद हलके में जनता दल पार्टी के वीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस के जसवंत सिंह को हराया। हार का अंतर रहा केवल 38 मतों का। वीरेंद्र सिंह को जहां 20 हजार 11 वोट मिले वहीं जसवंत सिंह ने 19 हजार 973 वोट हासिल किए।
हुक्म सिंह (कांग्रेस): 1991 में रोहट (अब नहीं रहा) हलके से कांग्रेस के हुक्म सिंह ने जनता पार्टी के महेंद्र सिंह को 38 मतों से पराजित किया। हुक्म सिंह को 19 हजार 834 मत मिले जबकि महेंद्र सिंह को 19 हजार 796 वोट हासिल हुए।
रमेश चंद्र (समता पार्टी): 1996 में घरौंडा हलके से भाजपा के रमेश चंद्र ने समता पार्टी के रमेश राणा के सामने कड़े मुकाबले में 11 मतों से जीत हासिल की। रमेश चंद्र को 20 हजार 230 वोट मिले, जबकि रमेश राणा को 20 हजार 219 मिले।
रेखा राणा (इनेलो): 2005 के विधानसभा चुनाव में घरौंडा हलके पर फिर से कांटे की टक्कर हुई। यहां से इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की उम्मीदवार रेखा राणा ने 21 मतों के अंतर से जीत हासिल की। रेखा राणा ने आजाद उम्मीदवार जयपाल शर्मा को पराजित किया। जयपाल को 25 हजार 216 वोट मिले थे, जबकि उसके मुकाबले रेखा राणा ने 25 हजार 237 वोट हासिल किए।


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