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नया हरियाणा

सोमवार , 22 अक्टूबर 2018

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बंसीलाल और इंदिरा गांधी के खिलाफ खोला था मोर्चा, राहुल गांधी का स्वीकारा नेतृत्व!

हुड्डा सरकार से रही सबसे ज्यादा तनातनी. उसी सरकार में हुए सबसे ज्यादा तबादले.

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15 जून 2018

नया हरियाणा

हरियाणा के रिटायर आईएएस अफसर प्रदीप कासनी ने राहुल गांधी और अशोक तंवर के साथ (14 जून 2018) कांग्रेस का हाथ थाम लिया. कासनी ने कहा- कांग्रेस में उदारवाद है कट्‌टरता नहीं। आज जो देश में आर्थिक परेशानी महसूस हो रही है, उसे कांग्रेस ही ठीक कर सकती है। वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। चुनाव पर कहा कि देखा जाएगा। लेकिन वे सभी 90 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के लिए संघर्ष करेंगे।

कासनी 1980 बैच के एचसीएस हैं, जो 1997 में आईएएस बने। 34 वर्ष की सर्विस में उन्होंने 71 बार तबादला झेला है। आईएएस अशोक खेमका और प्रदीप कासनी में कई समानताएं हैं। खेमका के भी 50 से ज्यादा बार ट्रांसफर हो चुके हैं। दोनों अधिकारियों को हरियाणा के ईमानदार और तेज-तर्रार अफसर का दर्जा हासिल है और दोनों को राज्य सरकार की उपेक्षा का सामना करना पड़ा।
हरियाणा के बेहद ईमानदार और तेज-तर्रार कहे जाने वाले आईएएस अफसर प्रदीप कासनी 28 फरवरी को रिटायर हुए थे। 34 साल की नौकरी में उनके 71 तबादले हुए। 

 1980 बैच के एचसीएस (हरियाणा सर्विस कमीशन) के अफसर कासनी 1997 में आईएएस बने थे। उन्होंने हरियाणा सरकार के साथ 1984 में अपनी सेवाएं शुरू की थीं।  उनकी पत्नी नीलम प्रदीप कासनी हरियाणा के राज्यपाल की एडीसी रह चुकी हैं और पिछले साल ही रिटायर हुई हैं। कहा जाता है कि उनकी पत्नी की सिफारिश पर उन्हें मनोहर लाल की सरकार में काफी स्पेस मिला था. पर किसी वीसी को फोन करने के लेकर तनातनी बढ़ती गई और पिछली सरकारों की तरह इस सरकार के भी चहेते होने से महरूम रहना पड़ा. बल्कि इस सरकार ने तो सरकारी भाषा में कहें तो खुडे लाइन लगा दिया. ऐसी जगह तबादला कर दिया. जहां के विभाग का अस्तित्व ही नहीं था.

 हुड्डा सरकार ने किए तबादलें, तंवर के साथ कांग्रेस का दामन थामा
प्रदीप कासनी के सबसे ज्यादा ट्रांसफर भूपेंद्र सिंह हुड्डा (कांग्रेस) की सरकार में हुए। खट्टर सरकार के साढ़े 3 साल के कार्यकाल में सितम्बर 2016 में एक महीने के अंदर 3 बार कासनी का ट्रांसफर किया गया।  अक्टूबर 2015 में खट्टर सरकार आने के बाद कासनी को अहम पदों पर तैनाती की उम्मीद थी, लेकिन गुड़गांव मंडल कमिश्नर की नियुक्ति के बाद यह उम्मीद धरी की धरी रह गई।

प्रदीप कासनी अपने फेसबुक लेखन से अपनी फेस वेल्यु एक वामपंथी की बनाई थी. जो भारत की राजनीति से परेशान अफसरशाही का प्रतीक बन कर उभरे थे. परंतु उनकी जो दाल अफसरशाही में नहीं गल पाई, उसकी पूर्ति शायद राजनीति में आकर करना चाहते हो. प्रदीप कासनी मूलतः हरियाणा के चरखी दादरी के गांव कासनी के रहने वाले हैं. इनका असली नाम प्रदीप श्योराण है.  उनके पिता धर्म सिंह किसान-मजदूर आंदोलन के नेता थे.  इमरजेंसी से पहले भिवानी में रिवासा कांड हुआ था. उस कांड से तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल के प्रति राज्य में गुस्सा था.  धर्म सिंह उस आंदोलन की अगुआई कर रहे थे. वह अपने साप्ताहिक अखबार लोक हरियाणा में बंसीलाल और इंदिरा गांधी के खिलाफ खुलकर लिखते थे. किशोर प्रदीप भी अखबार निकालने में उनकी मदद करते थे और सामाजिक आंदोलन में सक्रिय थे. जनसभाओं की मुनादी का जिम्मा उनके पास था.


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