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नया हरियाणा

शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

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जिंदल यूनिवर्सिटी के रेप के आरोपी छात्रों को सुप्रीम कोर्ट का झटका, हाई कोर्ट का फैसला पलटा

सोनीपत की इस प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में रेप की घटना ने सनसनी मचा दी थी. घटना के आरोपियों को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से राहत मिल गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राहत पर अडंगा लगा दिया है. पढ़िए क्या है पूरी खबर-

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6 नवंबर 2017

नया हरियाणा

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोनीपत की जिंदल यूनिवर्सिटी में बलात्कार के मामले में दोषी करार दिए तीन युवाओं की सजा निलंबित कर दी थी। हाईकोर्ट के इस फैसले को प्रतिवादी पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। मामले में युवाओं को जिला अदालत ने बलात्कार और ब्लैकमेल के आरोप में दोषी करार दे इनमें से दो को 20 वर्ष और एक को सात वर्ष की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता के बयान से दोनों ही पक्षों की विकृत मानसिकता और असंयमी रवैया सामने आया है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर दी थी।

 ये है पूरा मामला

- 11 अप्रैल 2015 को ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी में गैंगरेप का सनसनीखेज मामला सामने आया था। यूनिवर्सिटी में लॉ डिपार्टमेंट के तीन छात्रों ने यूनिवर्सिटी की 20 साल की छात्रा को ब्लैकमेल कर दो साल तक उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए विवश किया था। बीबीए की छात्रा ने 11 अप्रैल 2015 को राई थाना में गैंगरेप का मामला दर्ज कराया था।
- छात्रा ने आरोप लगाया था कि तीनों के कब्जे में उसकी आपत्तिजनक तस्वीर है। आरोपी नवंबर 2013 से ब्लैकमेल कर उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए विवश कर रहे हैं। तीनों आरोपी लॉ डिपार्टमेंट के अंतिम वर्ष के छात्र थे। उनके खिलाफ गैंगरेप और आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया था।
- छात्रा ने बताया था कि सोनीपत के आरोपी हार्दिक सिकरी ने उससे कई बार संबंध बनाए और आरोपी करण छाबड़ा ने दो बार और विकास गर्ग ने एक बार उसका शारीरिक शोषण किया था। पुलिस ने मामले में हार्दिक सिकरी, विकास गर्ग और करण छाबड़ा के खिलाफ गैंगरेप सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

सोनीपत कोर्ट ने सुनाई थी ये सजा

- 26 मई 2017 को मामले में सोनीपत कोर्ट ने 2 दोषियों को 20-20 साल और तीसरे दोषी को 7 साल कैद की सजा सुनाई थी। तीनों दोषियों को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनीता ग्रोवर की अदालत ने दो दिन पहले ही दोषी करार दे दिया था।
- मामले में दो दोषियों पर 20-20 हजार और एक पर 10 हजार रुपए जुर्माना भी किया गया है। जुर्माना न भरने की सूरत में 10 महीने की अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी। दोषियों के मोबाइल, लैपटॉप से मिले विक्टिम के अश्लील फोटो, उसे भेजे गए मैसेज, फोरेंसिक जांच रिपोर्ट और 43 लोगों की गवाही सजा दिलाने में अहम साबित हुई थी।
- 43 गवाहों में 15 यूनिवर्सिटी के ही कर्मचारी थे। हार्दिक और कर्ण के खिलाफ आईपीसी 376डी और विकास के विरुद्ध 376 के तहत केस दर्ज किया गया था। इन धाराओं में अधिकतम सजा क्रमश: 20 और 7 साल ही बनती है, वही इनको दी गई थी।

हाईकोर्ट ने की थी टिप्पणी, विकृत मानसिकता का मामला है ये

- इसी सजा के खिलाफ इन तीनों दोषी युवाओं ने हाईकोर्ट में अपील की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केस की क्रॉस एग्जामिनेशन सहित पीड़िता और दोषी करार दिए गए युवाओं के बयान का अध्ययन किया  तो सामने आया कि पीड़िता को पहले युवक ने अपनी नग्न तस्वीर भेजी थी। 
- उसके बाद पीड़िता को भी अपनी तस्वीर भेजने को कहा था  काफी दबाव के बाद पीड़िता ने भी अपनी फोटो भेज दी। फिर इसी फोटो के आधार पर लड़की ने ब्लैकमेल और बलात्कार करने का आरोप लगाया है।  
- हार्दिक द्वारा सेक्स टॉय खरीदने की मांग पर पीड़िता ने यह मांग पूरी की थी। पीड़िता ने अपने बयान में कबूल किया था कि न सिर्फ बियर, बल्कि ड्रग्स भी लेती
 रही है।
- हाईकोर्ट ने कहा था कि यह मामला एक त्रासदी है, जिसमें युवा की असंयमित और विकृत मानसिकता ही सामने आई है। इसका खामियाजा इनके परिवारों को भुगतना पड़ा है। 
- ऐसे में हाईकोर्ट इस मामले में सुधारवादी नजरिया लेते हुए इन तीनों दोषियों को मनोचिकित्सक से काउंसलिंग करवाए जाने का आदेश देती है, इसकी जिम्मेदारी हाईकोर्ट ने एम्स को दी थी। इनके इलाज की पूरी जानकारी हाईकोर्ट को दिए जाने के आदेश दिए गए थे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने तीनों दोषी युवाओं को अपने पासपोर्ट हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करवाए जाने के भी आदेश दिए थे.

 

(खबर विभिन्न मीडिया सोर्सेज़ से)


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