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नया हरियाणा

रविवार, 19 अगस्त 2018

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बाराती नहीं, दूल्हा बनने की तैयारी करो हनुमान बेनीवाल!

उन्होंने कहा कि तीसरे मोर्चे के बजाय कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ दूसरा मोर्चा तैयार कीजिए.

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13 जून 2018

राकेश सांगवान

मेरी हनुमान बेनीवाल से पहली और अबतक की आख़री मुलाक़ात दिसम्बर 2015 , में हुई थी । वो मुलाक़ात मैंने Vimal Choudhary के कहने पर की थी । यूनियनिस्ट मिशन को शुरू हुए अभी साल भी नहीं हुआ था , विमल और मेरी मुलाक़ात फ़ेसबूक और मिशन के माध्यम से ही हुई थी , उन दिनों मैं जयपुर में था तो विमल बोला कि भाईसाहब , हनुमान जी से मुलाक़ात करके देखो शायद हमारे विचार मेल खा जाए । हनुमान जी का बेटा बीमार था तो वो पहली मुलाक़ात हॉस्पिटल में ही हुई थी । मुलाक़ात लम्बी थी तो सभी बातें यहाँ साँझा नहीं कर पाउँगा , मुलाक़ात में कुछ अहम विषयों पर चर्चा हुई , जिसमें हनुमान जी ने बताया कि आज उनको इनेलो , रालोद , समाजवादी पार्टी सभी चुगा डालने की कोशिश कर रहें हैं कि हमारे साथ आ जाओ , क्या किया जाए ? इस पर मैंने उन्हें यही सुझाव दिया कि यदि आपको नेता बनना है तो अकेले चलो और आज हनुमान का नाम है इसलिए ये लोग चुगा डाल रहें हैं , और दूसरी बात ये कि ये सभी बरगद के पेड़ है और बरगद के पेड़ के नीचे घास भी नहीं उगती और हनुमान अभी पौधा है , अगर ग़लती से भी ये पौधा किसी भी बरगद के पेड़ के नीचे गया तो वही सूख जाएगा । फिर हनुमान जी बोले कि राकेश जी नई पार्टी बनाने के लिए संसाधन चाहिए वो तो नहीं है ! मैंने कहा जब एक अग्रवाल बनिया केजरीवाल जिनकी आबादी मुट्ठी भर है वो दिल्ली का मुख्यमंत्री बन सकता है तो फिर हनुमान तो जाट बिरादरी से है , वो बिरादरी जो वाघा से लेकर मुज़फ़्फ़रनगर , कश्मीर से भोपाल तक भरी पड़ी है , इतनी आबादी है कि डला मारो तो जाट पर जाकर पड़े , और इन जाटों को एक बार मुद्दे की समझ आ गई तो बाक़ी की किसान कमेरी जातियाँ ज़रूर साथ आएँगी और फिर ये सभी अपने आप संसाधन जुटा देंगे । केजरीवाल बन सकता है तो हनुमान क्यों नहीं ? अगले दिन कुचामन में उनकी रैली थी मुझे बोले आप भी चलो , मैंने किसी कारण जाने से मना कर दिया परकेजरीवाल वाली जो बात मैंने बोली वही बात रैली में बोलते सुने ।

ख़ैर , इस मुलाक़ात के बाद मेरी कभी उनसे मुलाक़ात नहीं हुई बस दो तीन दफ़ा फ़ोन पर ही बातचीत हुई । उस मुलाक़ात के बाद से मैं उन्हें फ़ेसबूक पर फ़ॉलो करता रहता हूँ । फ़ेसबूक पर ही मैंने उन्हें बार-बार तीसरा मोर्चा शब्द बोलते सुना , जिस पर मैंने कई बार पोस्टों में लिखा कि शायद यहाँ पढ़कर कोई उन्हें बता दे कि तीसरा कुछ नहीं होता । ये बात मैं उन्हें फ़ोन पर या मिलकर भी बता सकता था , मिला इसलिए नहीं कि साथ मिलकर जो पार्टी बनाने की बात हुई थी उस पर उनकी ना कोई प्रतिक्रिया और ना ही कोशिश हुई , सिर्फ़ रैली पर रैली , ऐसा करने से लोगों में अविश्वास पैदा होता है कि पता नहीं पार्टी बनाएगा या ख़ुद ही किसी पार्टी में जाएगा । और ये अविश्वास मेरे मन में भी कई बार आया , तरह-तरह के सवाल आए कि जब अलग पेड़ बनना ही है तो देरी क्यों ? इंतज़ार किस बात का ? या रैली करके ख़ुद की क़ीमत तैयार की जा रही है ? ख़ैर , सवाल दिमाग़ में चलते रहते हैं पर फिर भी मेरी उम्मीद भाई पर टिकी हुई है और जैसा कि भाई कि हर स्पीच को ध्यान से सुनता रहता हूँ । सीकर रैली से कुछ दिन पहले झुनझुनू के पिलानी , नवलगढ़ के live प्रोग्राम देख रहा था जिसमें बार-बार तीसरा मोर्चा रट लगाई हुई थी , मुझसे रहा नहीं गया और उन्हें फ़ोन पर मेसिज किया कि तीसरा कुछ नहीं सिर्फ़ ख़ुद की मानसिक हार है । शायद बात भाई के समझ आई होगी , सीकर रैली में ये तीसरे मोर्चे की रट सुनने को नहीं मिली । पर इस रैली में दो नई बात छेड़ दी , पहली JMM वाली और दूसरी दूल्हा नहीं बना तो बारात में ज़रूर जाऊँगा ।

अब ये JMM की सलाह किसने दी कौन राजनीतिक ज्ञानी है मुझे नहीं पता । JMM यानी जाट मुस्लिम मेघवाल , कोई पूछे कि ये क्या और कैसा समीकरण है ? जाति और धर्म ? क्या जाट और मेघवाल मुस्लिम नहीं ? जाति और धर्म की राजनीति तो पहले ही उन लोगों ने पेटेंट करवा रखी हैं तो फिर आप उन्हीं के रास्ते को पकड़ कर उनकी काट कैसे कर पाओगे ? राजनीति मतलब वर्गीकरण , किसान की बात करते हो तो फिर चौधरी छोटूराम की तरह वर्ग की ही राजनीतिक करो , कमेरे-लूटेरे का वर्गीकरण करो , और जो कोई जाट भी इस वर्गीकरण का विरोध करे उसे फिर लूटेरे वर्ग का समझो । लड़ाई व्यवस्था की है तो व्यवस्था का वर्गीकरण करो ।

यह सब बातें खुले में लिख कर मैं हनुमान बेनीवाल का विरोध या ख़ुद को उनसे ज़्यादा होशियार दिखाने की कोशिश नहीं कर रहा । यहाँ यह सब लिखने का मेरा सिर्फ़ इतना ही मक़सद है कि उनके इर्द-गिर्द रहने वाले इन बातों को पढ़े , ध्यान में रखें , इन पर विचार करें और नेता जी को सही सुझाव देते रहें हैं क्योंकि ज़रूरी नहीं एक ही व्यक्ति के दिमाग़ में सभी विचार आएँ । और नेता जी का हौंसला बढ़ाए और बताएँ कि हनुमान जी बात दूल्हा बनने की है बाराती बनने की नहीं , बाराती तो पहले भी बहुत बन चुके , हम आपको बाराती बनाने नहीं आपके बाराती बनने आए हैं , अब बात सिर्फ़ दूल्हा और दुल्हें की ख़ुद की बारात की बात होगी , अब बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना नहीं बनेगा । अब से कोई तीस साल पहले दूल्हा बनने का एक मौक़ा आया था पर उस घोड़ी पर ताऊ देवी लाल ने किसी और को बैठा दिया था , तीस साल बाद फिर से दूल्हा बनने की एक उम्मीद जगी है तो अब माड़ी बात करके इस उम्मीद को मार मत देना , अगर अब नहीं तो फिर भविष्य में कोई भी दूल्हा बनने का ख़्वाब भी नहीं लेगा । और ये ख़्याल रखना इस दूल्हे पर सिर्फ़ राजस्थान ही नहीं , हरियाणा , वेस्ट-यूपी, दिल्ली , पंजाब , एमपी तक के लोगों की नज़र टिकी हुई है , हनुमान जी दूल्हा बन घोड़ी पर बैठने की तैयारी करो ये सब लोग बाराती बनने की बाँट देख रहें हैं ।


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