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नया हरियाणा

सोमवार , 18 जून 2018

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हरयाणवी लुगाई नै लिख्या लोग के नाम लैटर, कती चालां पाड़ दिया

हरियाणवी लुगाई (पत्नी) ने लोग (पति) को खत लिखा है, खत क्या लिखा है, पति की सारी नौटंकियों को उघाड़ कर रख दिया और एक स्त्री की पीड़ा को हास्य और मार्मिकता के साथ चित्रित किया है. 

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4 नवंबर 2017

मोनिका शर्मा

हरियाणवी लुगाई (पत्नी) ने लोग (पति) को खत लिखा है, खत क्या लिखा है, पति की सारी नौटंकियों को उघाड़ कर रख दिया और एक स्त्री की पीड़ा को हास्य और मार्मिकता के साथ चित्रित किया है. 

ये जो थम (तुम) तड़के तड़के (सुबह) बूसे (बासी) बैंगण जिसा मुँह बना के राखो सो न..किते न टॉम क्रूज लागते... नू लागो हो जणू किसी पीपे में समान ठूस के भर दिया हो...

कदे-कदे दान्दरी (दांत) भी पाड़ दिया करो... किते न टूट के पड़े धरती प ये...
और पड़ भी गए (गिर भी गए) तो चुग चुग गिण गिण के ढा के दूँगी...
पर जिब जवाब न दो हो न तू नू लाग्गो हो जणू चप्पल कद्दू सा मुँह और जी म आवे है के काट काट के सब्ज़ी सी छोंक दू....
ये जो थम इतराओ हो न रूप रंग प...देखे घणा सीसा न देख्या करो... 

महारली मामी कहया करती, घणा सीसा देखें त लाड़ बावळा हो ज्या स...
ना ना, थमने कोनी कह रही, या कहावत स..
पर के करूँ थम सारे दिन इस सीसे सामने खड़े रहो सो किसे दिन चौन्ध पड़गी न आधासीसी हो ज्यागी...

बस बताऊँ सू मन्ने के स...
कदे कदे तो इतना छोह उठठे स के, जी मैं आवे है थम धनिया होते और मैं कुण्डी म गैर सोटे त कूट कूट चिटणी सी बना देती....
जी की तो पूछो ए मत न ... कदे जी करे है इस पाटे दूध (फटा दूध) बरगे मुँह न झाकरे म गैर लाहसी सी बिलो दूँ... 

जी मैं कदे कदे नू भी आवे है पूछू ,के खा के जामया था तेरी माँ न ...
सारे दिन गुस्से की आग म बलता रह स खिचड़ी बरगा मुँह करके न...
पर सारी मन की मन में ही कह लू सूं....
कुण देहि की सेवा करवावेगा इसे जाड्डे म....
भूली न सूं एक ब एक घुसण्ड मारया था कड़ म सुसरी 3 दिन कब्ज रही थी...
मन्ने के बेरा था यो खागड़ बन्ध गया पल्ले ....
घणी न लिखूं... जितना लिखूँगी मन्ने बेरा है उतनी ही सेवा पाणी होगी मेरी... इसे जाड्डे म हाड दुखेंगे....
कोई भूल चूक त किमे लिख दिया हो तो खसम माफ़ कर दिए...

मैं तो भली सी लुगाई सीधी पाधरी बाळक बुद्धि सूं नू ए बड़ बड़ कर दिया करूँ....
या सब छोड्डो, स्याणा ये बता दियो फोन करके के बनाऊँ रात न खाने म ...
थारी..(तुम्हारी)
जो भी कह लो ब्याह पाच्छे (शादी के बाद)के कोई नाम बोले है म्हारा...

 

मोनिका शर्मा हरियाणवी शैली में पत्र लिखती हैं और हरियाणवी भाषा व संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अहम् भूमिका निभा रही हैं. सोशल मीडिया पर इनके लेखन के दिवाने हरियाणा और दूसरों राज्यों के भी हैं.


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