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शनिवार, 20 अक्टूबर 2018

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बुढ़ापा पेंशन पर हुआ था देवीलाल का विरोध, आज सभी पार्टियों के एजेंडे पर है बुढ़ापे की लाठी!

बुढ़ापा पेंशन के रूप में 1800 प्रति महीना मिल रहे हैं. और हर साल ₹200 की बढ़ोत्तरी बुढ़ापा पेंशन में की जाती है.

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10 जून 2018

नया हरियाणा

पिछले कुछ दिनों में राजनीति के केंद्र में एक बार फिर बुढ़ापा पेंशन आई हुई है. इनेलो नेता अभय सिंह ने कहा कि मेरी सरकार आई तो बुढ़ापा पेंशन 2500रु होगी और इसके कुछ दिन बाद भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री बना तो पेंशन 3000 होगी. पेंशन के जरिए वोट लेने की कवायत तेज हो रही है. जबकि देवीलाल ने बुढ़ापे की लाठी के तौर पर पेंशन देने का काम किया था.

देश में सबसे पहले चौधरी देवी लाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते ही सभी 60 वर्ष बुजुर्गों को 100 रूपये महीने पेंशन योजना शुरू की। इस योजना के द्वारा वर्ष 1987 में प्रदेश के लगभग आठ लाख चालीस हजार बुजुर्गों को पेंशन का लाभदेकर सामाजिक सम्मान दिया गया। इस क्राांतिकारी कदम की देखा-देखी अन्य राज्यों ने भी बुजुर्गों को पेंशन देनी शुरू की। इस योजना के द्वारा वर्ष 1987 में प्रदेश के लगभग आठ लाख चालीस हजार बुजुर्गों को पेंशन का लाभ देकर सामाजिक सम्मान दिया गया। इस क्राांतिकारी कदम की देखा-देखी अन्य राज्यों ने भी बुजुर्गों को पेंशन देनी शुरू की। आज बुजुर्गों को बुढ़ापा पेंशन के रूप में 1800 प्रति महीना मिल रहे हैं. और हर साल ₹200 की बढ़ोतरी बुढ़ापा पेंशन में की जाती है.

आदित्य चौधरी ने बुढ़ापा पेंशन के विमर्श पर अपनी बात कहते हुए 2009 में लिखा है कि-
हरियाणा में बुजुर्गों को पेंशन देकर उनके वोट लेने का सभी पार्टियों का एजेंडा कई दशक से चल रहा है, जिस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री देवीलाल ने सम्मान के तौर पर हरियाणा में बुजुर्गों के लिए पेंशन शुरू कि थी उस समय विरोधी दलों ने ये आरोप लगाये थे कि इसके लिए पैसा कहाँ से आएगा. लेकिन देवीलाल ने इस बात कि परवाह ही नहीं कि और सामाजिक सुरक्षा के नाम पर बुजुर्गों को जो पेंशन शुरू कि गई उसे बुजुर्ग अपनी तनख्वाह कहने लगे, शुरू में हालाँकि ये १०० रूपये ही थी लेकिन ये मिलना भी बड़ी बात थी, कमाल ये हुआ कि जैसे ही पेंशन मिलना शुरू हुई बुजुर्गों का सम्मान भी बढ़ गया. बुजुर्ग देवीलाल को अपना सबसे बड़ा हितैषी मानने लगे. देवीलाल की गई शुरुवात इस पेंशन का आज जादू ये है कि सभी राजनितिक दल इसके नाम पर वोट बटोरना चाहते हैं. लेकिन जब वोट पड़ते हैं तो बीमारी से लाचार जो बुजुर्ग अपना वोट खुद नहीं डाल सकते वो उनकी मदद करने वाले लोगों को अक्सर कहते हुए सुने जा सकते हैं कि " भाई ताऊ कि पार्टी को वोट देनी है ". देवीलाल को ताऊ कहा जाता है, कुछ हद तक हमें मानना भी पड़ेगा कि हरियाणा में पेंशन चाहे किसी भी पार्टी कि सरकार ने बढ़ाई हो इसका ज्यादा फायदा देवीलाल परिवार की पार्टियों को ही मिला है.
2009 के लोकसभा चुनाव सिर पर हैं. हरियाणा में इनेलो, कोंग्रेस, भाजपा, हंजका और बसपा इत्यादि पार्टियाँ चुनावी मैदान में अपनी ताल ठोंक रही हैं. हालाँकि भाजपा और इनेलों में चुनावी गठबंधन हो चूका है. कांग्रेस अकेली है और हजंका के कुलदीप बिश्नोई बसपा से तालमेल बिठाने कि कोशिश में हैं. ये तालमेल हालाँकि मुश्किल ही है. इन चुनावों को लेकर सभी पार्टियों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने अपने एजेंडे भी बना लिए हैं. हरियाणा में वृद्धावस्था पेंशन लेने वाले बुजुर्गों कि काफी संख्या है और जिस भी पार्टी को इनका वोट मिलेगा वो निश्चित तौर पर फायदे में रहेगी. इस वोट बैंक को लुभाने के लिए लिए कोंग्रेस ने कहा है कि अब हरियाणा में ये पेंशन ७०० रूपये होगी यानी जिस घर में दो बुजुर्ग हैं उस घर में १५०० रूपये महिना आएगा. ये एक तरह से ग्रामीण लोगों के लिए.बड़ी रकम है जिससे कई खर्च निकल सकते हैं. लेकिन इस मामले में बड़ा पेंच ये है कि हरियाणा सरकार ने जो बजट पेश किया है उसमे कहीं भी इस बात का प्रोविजन नहीं है कि बढ़ी हुई पेंशन देने से जो अलग बोझ सरकारी खजाने पर पड़ेगा वो पैसा कहाँ से आएगा. सरकार चुनावी तैयारियों में लगी है. दबी जुबान ने कई अधिकारी और नेता साफ़ सखते हैं कि अगर लोकसभा चुनावों में कोंग्रेस ने अच्चा पर्दशन किया तो इस पैसे का कोई न कोई जुगाड़ कर ही किया जायेगा. और अगर पर्दर्शन अच्छा नहीं रहा तो आगामी विधान सभा चुनाव के चक्कर में इस पैसे का जुगाड़ तो करना ही पड़ेगा. यानी ये तो तय है ही कि बुजुर्गों को ७०० रूपये पेंशन मिलती रहेगी. हालाँकि ये नियमित तौर पर मिल पायेगी या नहीं ये बड़ा सवाल है जिसका जवाब किसी के पास नहीं है.
गौरतलब है कि जैसे ही लोकसभा चुनावों के दिन नजदीक आने शुरू हुए थे हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की घोषणाओं का दौर भी जारी हो गया था. पहले उन्होंने वृद्धावस्था पेंशन बढ़ा कर 500 रूपये की थी, लेकिन इसके ३ दिन बाद ही इसे एक बार फिर बढ़ाकर 700 रूपये महीना कर दिया है। बढ़ी हुई पेंशन की राशि एक अप्रैल २००९ से साढ़े ग्यारह लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंचनी शुरू हो जाएगी। अपनी इस घोषण के बाद मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा ने कहा, कि जिन लोगों को पिछले दस साल से वृद्धावस्था पेंशन मिल रही है, उन्हें अब 700 रूपये महीना मिलेंगे। जिन लोगों को पेंशन लेते दस साल से कम हुए हैं, उन्हें 500 रूपये दिए जाएंगे और हर साल इसमें 50 रूपये के हिसाब से बढ़ोतरी होती रहेगी। चार वर्ष बाद राज्य सरकार इस योजना की समीक्षा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बुढ़ापा पेंशन नहीं, बल्कि बुजुर्ग लोगों के लिए सम्मान भत्ता है। यानी एक तरह से सरकार ने बुजुर्गों को दो श्रेणी में बाँट दिया है. इसे लेकर उनमे गुस्सा होना स्वाभाविक है और क्या पता ये गुस्सा वोट देते समय सामने भी आ जाये.
ये भी काबिले गौर है कि भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने भी बुजुर्ग वोटों कि अहमियत को समझ लिया है शायद तभी उन्होंने घोषणा कि है कि सत्ता में आने पर राजग छोटे किसानों के लिए कृषि आय गारंटी योजना शुरू करेगा और बुजुर्ग किसानों को पेंशन देगा।उन्होंने कहा कि यदि सरकारी कर्मचारी पेंशन पा सकते हैं तो मुझे लगता है कि बुजुर्ग किसानों को भी क्यों पेंशन नहीं मिलनी चाहिए। उनकी इस घोषणा का फायदा इनेलो और भाजपा हरियाणा में उठा सकते हैं. हजकां के कुलदीप बिश्नोई भी कह चुके हैं कि पेंशन के मामले में उनकी सरकार आने पर अच्छी नीतियाँ बने जाएँगी. पूर्व में पेंशन का ज्यादा फायदा उठाने वाली इनेलो के राष्ट्रीय महासचिव अजय सिंह चौटाला कहते हैं कि केवल उनकी पार्टी कि सरकारों ने ही हरियाणा में बुजुर्गों को सम्मान दिया है. भविष्य में भी ऐसा ही होगा, बुजुर्गों के सम्मान के लिए जिस पेंशन को ताऊ देवीलाल ने शुरू किया था उसमे बढौतरी और स्थायित्व भी हम ही लेकर आयेंगे. चौटाला कहते हैं कि कोंग्रेस ने तो उन बुजुर्गों कि भी पेंशन काट दी है है कई साल से पेंशन ले रहे हैं और ऐसे लोगों कि पेंशन बने जा रही है जिनकी उम्र अभी इतनी नहीं है. सब कुछ राजनीती के लिए हो रहा है.
देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले लोकसभा चुनावों में राजनितिक दलों में से किस को पेंशन के इस पैंतरे का फायदा मिलता है. हरियाणा के बुजुर्ग इतिहास को ही दोहराते हैं या फिर पुरानी परिपाटी को तोड़कर एक नए इतिहास कि शुरुवात करते हैं.


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