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नया हरियाणा

शनिवार, 23 जून 2018

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अभय सिंह संभालेंगे इनेलो की कमान, दुष्यंत थाम सकते हैं भाजपा का दामन!

इनेलो में अभय सिंह और दुष्यंत चौटाला को लेकर कोई शह और मात का खेल नहीं चल रहा है.

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9 जून 2018

नया हरियाणा

इनेलो में अभय सिंह और दुष्यंत चौटाला को लेकर कोई शह और मात का खेल नहीं चल रहा है, बल्कि यह बात सभी जानते हैं कि इनेलो की कमान अभय सिंह अभी तक संभाल रहे हैं और आगे भी वही संभालेंगे. हां, इतना जरूर है कि मीडिया और सोशल मीडिया पर शह और मात के खेल को प्रायोजित जरूर करवाया जा रहा है. 
यह बात भी उतनी ही सच है कि पार्टी के भीतर कुछ युवा दुष्यंत से नजदीकियां होने के कारण उनको पार्टी का सर्वेसर्वा के रूप में देखना चाहते हैं. जिसे पार्टी हित के रूप में प्रचारित किया जाता है और युवा होने की दलील दी जाती है. जबकि राजनीति के हिसाब से अभय सिंह भी युवा ही हैं और उनकी पार्टी के भीतर पकड़ मजबूत भी है.
शह और मात वाले कयास लगाने का मूल कारण इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला द्वारा राज्य कार्यकारिणी का भंग किया जाना है. इसमें धक्केशाही खोजना या कब्जे की संभावनाएं तलाशना उचित नहीं लग रहा है. अभय सिंह इनेलो के अघोषित रूप में सुप्रीमो बनकर चार साल से सारा कामकाज संभाल रहे हैं. 
ऐसे में अजय सिंह के पुत्रों के लिए दो ही संभावनाएं बचती है. पहला यह कि वह अभय सिंह के नेतृत्व को स्वीकार कर पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता दिखाए और दूसरा विकल्प किसी अन्य पार्टी का दामन थाम लें. अगर राजनीतिक नजरिए से लंबी पारी खेलनी हो तो दुष्यंत चौटाला को भाजपा में चले जाना चाहिए. इसके दो फायदे होंगे. पहला यह कि चाचा अभय सिंह के द्वार भाजपा के लिए बंद हो जाएंगे. दूसरा भाजपा की सत्ता है तो ऐसे में खुद को स्थापित करने के लिए प्रर्याप्त स्कोप भी बनता है. 
इनेलो के भीतर टिकट की दावेदारी करने वालों के लिए जरूर यह असमंजस का समय है. उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि किसका दामन थामकर रखें और किससे किनारा करके रखें. ऐसे में कुछ राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी दोनों तरफ अपना हाथ नरम रखे हुए हैं. संभावनाएं यही हैं कि दुष्यंत के भरोसे तैरने वालों के डूबने के ज्यादा चांस लग रहे हैं. प्रेम ही आग का दरिया नहीं होता, जानी, राजनीति उससे भी खतरनाक दलदल होती है. जिसमें जितना ज्यादा जोर लगाओगे, उतना फंसते चले जाओगे. और हां राजनीति संभावनाओं का खेल है, जितनी संभावनाएं बढ़ेंगी, उतनी रोचकता बढ़ती जाएगी. इसीलिए भारत में राजनीति मनोरंजन का सबसे सशक्त माध्यम है.
 


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