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नया हरियाणा

बुधवार, 16 अक्टूबर 2019

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जाट होते हुए चौधरी भजनलाल ने की थी गैर जाट की राजनीति!

2005 के बाद भजनलाल का करिश्मा खत्म होना शुरू हुआ था.

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9 जून 2018



नया हरियाणा

हरियाणा के सामाजिक तानेबाने में जाटों की संख्या सबसे ज्यादा है. राजनीति में जिसकी संख्या जितनी ज्यादा, उसका वर्चस्व उतना ज्यादा होता है. भारतीय राजनीति में जातिगत समीकरण ही पॉवर जनरेट करते हैं और सत्ता का रास्ता आसान बनाते हैं. इस पॉवर पॉलिटिक्स में गैर जाट वोटों को ध्रुवीकरण अहम् हो जाता है. जैसे यही हालात यूपी और बिहार में यादवों के खिलाफ होती हैं.
हरियाणा की राजनीति में भजनलाल को बड़ा खिलाड़ी माना जाता है. भजनलाल हरियाणा की राजनीति में गैर जाट बेल्ट जीटी रोड पर बड़े नेता माने जाते थे. जाट होने के बावजूद भजनलाल ने गैर-जाट की राजनीति की. भजनलाल ने बिश्नोई पंथ का अनुसरण करते हुए अपने नाम के साथ बिश्नोई लगा लिया. जबकि उनका गौत्र मांझू है. जाट होकर नॉन-जाट का नेता कहलवाना कितना मुश्किल होता होगा लेकिन भजनलाल के परिवार के लिए यह काम बहुत आसान है. कहा जाता है कि जाटों के सबसे ज्यादा काम करवाने वाले चौधरी भजनलाल आज भी नॉन जाट की पहली पसंद थे. इसी के आसपास उनका बेटे कुलदीप बिश्नोई राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं.
भजनलाल की विरासत को तगड़ा झटका तब लगा था. जब 2005 में भजनलाल के नाम पर कांग्रेस को बहुमत मिला पर कांग्रेस हाईकमान ने जाट वोटरों को कांग्रेस में लाने के लिए हुड्डा को सीएम बना दिया था. भजनलाल के करिश्मे और गैर जाट पॉलिटिक्स दोनों के लिए ही यह पतन की शुरूआत थी. पर 2014 के चुनाव में भाजपा ने इस खाली पड़े स्पेस में गैर जाट मुख्यमंत्री का एंजेडा जीटी रोड बेल्ट पर बिल्ट कर दिया. देखते-देखते मोदी और गैर जाट मुख्यमंत्री के नाम पर जीटी रोड पर सारी सीटें भाजपा को मिल गई.
 


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