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नया हरियाणा

रविवार, 17 नवंबर 2019

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सांसद दीपेंद्र हुड्डा बनकर गांव वालों को दिलाता था नौकरी!

ऐसे ही किस्से इस प्रसेप्शन को बढ़ावा देते हैं कि राज तो रोहतक में ही आया था.

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9 जून 2018



नया हरियाणा

हुआ यूं कि एक बार फरीदाबाद के एक अफसर के पास एक फोन आया कि मैं दीपेंद्र बोल रहा हूं. नकली दीपेंद्र ने किसी को नौकरी लगाने के आदेश दिए. अफसर मना कैसे करता. आखिर पापा मुख्यमंत्री थे. अब मुख्यमंत्री का लाल और सांसद भी हो तो उनके फोन के मायने होते हैं. अब अफसर ने फोन के आदेश का पालन किया.
अब जब काम हो गया तो नंबर बनाने का नंबर आया. अफसर ने उसी नंबर पर पलटकर फोन किया. फोन बंद आया. अफसर को लगा दिल्ली वाले लैंडलाइन पर बता देता हूं. वहां बात हुई तो ये राज खुला कि फोन करने वाला शख्स कोई ओर हैं.
बात पहुंचते-पहुंचते रोहतक साइबर क्राइम ब्रांच तक पहुंच गई. जांच हुई. खुलासा हुआ तो पता चला कि फोन करने वाला शख्स हलके का ही निकला. अब पुलिस कार्यवाही की बात हुई तो सारा गाम-राम उसकी मेर(हिमायत) में आ गया. सारे कहने लगे- भाई इसनै तो गाम का भला करया सै. गाम के कई छोरे नौकरी लगवा दिए दिल्ली.
फेर के था. मामला रफा-दफा करना पड़ा. असल में तो उन दिनों भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा और आशा हुड्डा बुनकर बहुत से लोग फोन कर देते थे. एक बार तो रोहतक जिले की खेड़ी साध गांव की एक स्कूल शिक्षिका ने भी नकली आशा हुड्डा बनकर किसी अफसर को फोन कर दिया था. भाई तभी बाकी हरियाणा के लोग कहते थे कि राज तो रोहतक का आया सै. घर-घर हुड्डा होरे थे.
पत्रकार पवन बंसल की बुक गुस्ताख़ी माफ में हरियाणा के न जाने कितने ही ऐसे रोचक किस्से भरे हुए हैं. हरियाणा की राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों को जरूर पढ़नी चाहिए.
 


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