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नया हरियाणा

सोमवार , 20 अगस्त 2018

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भजनलाल की राजनीतिक विरासत खड़ी है तिराहे पर!

हरियाणा की राजनीति की पीएचडी कहे जाने वाले भजनलाल की राजनीतिक विरासत तिराहे पर खड़ी है.

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8 जून 2018

नया हरियाणा

हरियाणा की राजनीति की पीएचडी कहे जाने वाले भजनलाल की राजनीतिक विरासत तिराहे पर खड़ी है. भजनलाल के दोनों पुत्रों के सामने तीन विकल्प खुले हुए हैं. हालांकि चौथा विकल्प पहले ही इस्तेमाल करने के कारण वह अब बंद हो गया है. वह विकल्प था अलग पार्टी बनाना. जाहिर कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस में  अपना भविष्य तलाश रहे हैं. समस्या चंद्रमोहन के सामने हैं कि वह कांग्रेस, इनेलो और भाजपा रूपी तिराहे में किस मार्ग पर चलना पसंद करेंगे.

क्या यह महज संयोग है कि कुछ दिन पहले भजनलाल के बड़े बेटे चंद्रमोहन बिश्नोई ने इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला से मुलाकात की थी. जिसको लेकर हरियाणा की सियासी धरती गर्म हो गई थी. सोशल मीडिया पर अनेक तरह के कयास सिर उठाने लगे थे. ये कयास अभी चल ही रहे थे कि भजनलाल के छोटे बेटे कुलदीप बिश्नोई राहुल गांधी के संपर्क में लगातार रहते ही हैं और इनकी प्रियंका गांधी के साथ भी करीबी रिश्ते बताए जाते हैं. इन मुलाकातों को नेता भले ही ‘शिष्टाचार’ कह रहे हों, पर कुछ तो भीतर ही भीतर चल रहा है.

इन मुलाकातों के गर्भ में क्या छुपा है, यह भविष्य बताएगा. फिलहाल यह तो साफ है कि भजनलाल के दोनों पुत्रों के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है. दोनों एक पिता के तौर पर अपने पुत्रों के लिए राजनीतिक भविष्य तलाश रहे हैं. ऐसे में दोनों का एक जगह रहना किसी भी तरह ठीक नहीं होगा. इसलिए कुलदीप कांग्रेस में अपना भविष्य तलाश रहे हैं और चंद्रमोहन इनेलो या भाजपा में अपना भविष्य तलाश सकते हैं.

ऊंट किस करवट बैठेगा, यह कहना जल्दबाजी होगी. पर इतना साफ है कि चंद्रमोहन कांग्रेस में टिके रहने वाले बिल्कुल नहीं है. क्योंकि हरियाणा के राजनीतिक हालात ऐसे बने हुए हैं कि उसमें चंद्रमोहन ‘तुरुप का इक्का’ साबित हो सकते हैं. भले ही बेगम की वजह से उनका राजनीतिक जीवन कुछ समय के लिए गोते खा गया हो. पर अब उनकी नैय्या पार लगती हुई साफ दिख रही है. देखते हैं ऐसे जटिल समय में उनका राजनीतिक विवेक उन्हें क्या निर्णय लेने के लिए कहता है और वो किस पार्टी में अपनी कुर्सी रखना चाहते हैं.


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