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जमाल पानीपती : समालखा में जन्मे उर्दू के बड़े शायर!

विभाजन के समय जमाल पानीपती का परिवार कराची में कूच कर गया.

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7 जून 2018

डॉ. नवीन रमण

पानीपत केवल अपनी तीन लड़ाइयों के लिए ही ज्यादा जाना जाता है. जबकि पानीपत की साहित्यिक ज़मीन ने कवि, लेखक और शायर पैदा किए हैं. पर साहित्यिकारों और उनकी रचनाओं पर युद्ध इतना भारी पड़ा कि बहुत कम लोग इनके बारे में जानते हैं. 
ऐसे ही एक प्रसिद्ध साहित्यकार हुए हैं पानीपत से. जमाल पानीपती के नाम से. इनका असली नाम गुलजार अहमद है और ये जमाल पानीपती के नाम से शायरी करते थे. जमाल का जन्म 15 जून 1927 को समालखा गांव में हुआ था. जो अब कस्बा बन चुका है. समालखा हलका पानीपत जिले में आता है. आजादी के बाद भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद जमाल का परिवार 1947 में कराची कूच कर गया. 11 जुलाई 2005 को जमाल पानीपती ने कराची में अपनी आखिरी सांस ली.
उनकी रचनाएं- अदब और रिवायत, इखतेलाफ के पहलू, नैफ से असबात तक, आला कलाम, जमील उद दीन अली का संचयन, सिलसिला तक्कालु का, फरीद जावेद का संग्रह, सलीम अहमद के शेरी कुलीयत के कामों और संकलनों का संग्रह.
जमाल पानीपती के दोहे
 दिया बुझा फिर जल जाए और रुत भी पल्टा खाए
फिर जो हाथ से जाए समय वो कभी न लौट के आए.
बड़े बुजुर्ग समय की अहमियत के प्रति सदा सचेत करते रहे हैं.
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कैसे कैसे वीर सूरमा जग में जिन का मान
जग से जीते समय से हारे समय बड़ा बलवान.
जग में ऐसे-ऐसे सूरमा हुए हैं जो जग से जीत गए थे, पर समय से हार गए थे. अर्थात् मनुष्य सारी सुख-सुविधाएं एवं संपदा जुटाने के बाद जब चैन या शांति से जीवन व्यतीत नहीं कर पाता तो उसे जीवन व्यर्थ लगने लगता है.
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मोती मूंगे कंकर पत्थर बचे न कोई भाई
समय की चक्की सब को पीसे क्या पर्बत क्या राई.
मनुष्य का जीवन नश्वर है और मृत्यु जन्म की तरह अटल सत्य है.
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सदा न उजला दिन ही रहे और सदा न काली रेन
रंग बदलता जाए समय और टुक-टुक देखें नैन.
मनुष्य के जीवन अच्छे और बुरे दिन आते-जाते रहते हैं.
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समय के सारे खेल हैं प्यारे कह गए जगत 'कबीर'
आप हँसाए आप रुलाये आप बँधाए धीर.
जमाल पानीपती ने कबीर के माध्यम से कहा है कि समय ही सारे खेल दिखाता है. कभी हंसाता है तो कभी रूलाता है.
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समय की रचना समय का फेर और समय के सब बहरूप
क्या अँधियारे क्या उजियाले क्या छाँव क्या धूप
जमाल पानीपती ने अपने दोहों में वक्त या समय के बदलते रंग-रूप को दार्शनिकता के साथ प्रस्तुत किया है. जिसमें समय को सर्वकाल बताया गया है.
 


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