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मंगलवार, 23 जनवरी 2018

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संजीत सरोहा: मानवीय मूल्यों को समृद्ध करते युवा ऊर्जावान लोककवि

आत्महीनता के दौर में संजीत सरोहा आत्मविश्वास की अनूठी मिसाल पेश करते हैं और युवाओं को समाजहित को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरणा का काम करते हैं।


Sanjita Saroha: The young energetic folklore who enrich human values, naya haryana

1 नवंबर 2017

संजू सैनी

इंसान की आदत है हमेशा से अपने अतीत को बेहतर बताना और आने वाले कल से डरा रहना। इसी लिए हम हमेशा अपनी पुरानी चीजों को ज्यादा याद करते हैं, चाहे वो खेल हो या कोई और काम ही क्यों ना हो। हम सभी को अपने बीते दिन याद आते है और सब को अपने भविष्य में जानने की जिज्ञासा होती है कि आगे क्या होगा। ऐसे हम न तो अपने भूतकाल को जी सकते और न हम भविष्य को।और इन दोनों के द्वंद्व में हम अपने वर्तमान को जीना छोड़ देते हैं। 

साहित्यकार अपने साहित्य के माध्यम से हमें तीनों काल (अतीत, वर्तमान और भविष्य) की सैर कराने का मादा रखते हैं। ताकि हम अतीत से सीख सकें और वर्तमान में भविष्य को लेकर सचेत हो जाए। साहित्यकारों की इस निर्णायक भूमिका को लिए समाज हमेशा से साहित्यकारों का ऋणि रहा है। हरियाणवी संस्कृति और उसकी माटी की सुंगध वाले लोक युवा कवि संजीत सरोहा अपनी कविताओं के माध्यम से सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं। किसान, गरीब,स्त्री और हर स्तर पर पीड़ित समूह की आवाज बनकर उनकी कविताएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं। संजीत सरोहा की कविता में जो पीड़ा उभरकर आती है, वह हमें संवेदनशील मनुष्य बनने के लिए प्रेरित करती है।

आईये मिलवाते हैं ऐसी ही शख्सियत यानी नौजवान कवि संजित सरोहा से। जो आज के इस दौर में भी अपने भूतकाल में जाकर खोज करने की खासियत रखते हैं, वरना तो आज का दौर इतना तेज हो गया है कि छोटे-छोटे बच्चों को भी ऑन लाइन गेमिंग के बिना मजा नहीं आता। जबकि संजीत सरोहा हमें अपनी संस्कृति के उन पुराने मूल्यों से जोड़ते हैं, जिन्हें भागमभाग भरी जिंदगी में हम पीछे छोड़ते जा रहे हैं और अपने स्वार्थों को ज्यादा महत्त्व दे रहे हैं। जबकि संजीत सरोहा अपने गुरु रामरहीम से मिली शिक्षा का पालन करते हुए समाजहित के लिए रचनात्मक प्रयास करते रहते हैं। तकनीक के दौर में संजीत सरोहा तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अपनी सामाजिक भूमिका को नहीं भूले हैं। यही विशेषता उन्हें सामान्य लोगों से अलग करती है। जबकि हर तरफ तकनीक की इतनी तेज आंधी चल रही है कि कभी-कभी अच्छे खासे पढ़े लिखे भी खुद को पिछड़ा महसूस करते हैं। आत्महीनता के दौर में संजीत सरोहा आत्मविश्वास की अनूठी मिसाल पेश करते हैं और युवाओं को समाजहित को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरणा का काम करते हैं।

संजीत सरोहा सच्चे अर्थों में हरियाणवी संस्कृति के लोक कवियों की परंपरा को समृद्ध कर रहे हैं। मात्र 22 वर्ष की आयु में पहली से लेकर बारहवीं तक इनकी शिक्षा गांव की ही रही है । इनकी खासियत यह है कि ये संस्कृति को बचाने के लिए ढोल नहीं पीटते और न हरियाणा की कमियों को टोकरा सिर पर लेकर घूमते हैं। बल्कि सकारात्मक सोच के साथ मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाने का सार्थक कार्य कर रहे हैं। ऐसे नौजवान और ऊर्जावान युवा कवि संजीत सरोहा का नया हरियाणा स्वागत करता है। नया हरियाणा हर उस शख्सियत का साथ देगा जो बोलने में कम और करके दिखाने में ज्यादा विश्वास रखेगा। 

एक छोटे से गांव से निकल कर ये मुकाम हासिल किया है संजीत ने, खुद को ही नहीं बल्कि उसके गांव सिवाडा या यूं कहें हरियाणा की संस्कृति को समृद्ध करके  युवा साथियों को भी गर्व महसूस करवाया है। नया हरियाणा की शख्सियत में आपका सदा स्थान रहेगा। 

(लेखक :  संजू सैनी एक युवा फिल्म लेखक हैं)


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