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मंगलवार, 11 दिसंबर 2018

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फुटबॉल: मदर ऑफ ऑल बॉल, वर्ल्ड कप में फुटबॉल पर लगेगी चिप

पहली रबर गेंद 1836 में गुडईयर ने बनाई थी.

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4 जून 2018

नया हरियाणा

21वें फुटबॉल वर्ल्ड कप का इंतजार खत्म होने को है। ठीक 10 दिन बाद यानी 14 जून से 32 देश की टीम खिताबी जोर-आजमाइश शुरू करेंगी। रूस में होने वाले इस टूर्नामेंट में पहली बार वीडियो असिस्टेंट रैफरी(वीएआर) का इस्तेमाल होगा। सभी मैच चिप लगी 'टेलस्टार-18' बॉल से खेले जाएंगे। 32 दिन चलने वाले टूर्नामेंट का फाइनल 15 जुलाई को होगा। मेजबान रूस ने इस टूर्नामेंट के आयोजन पर 12000 करोड रुपए खर्च किए हैं। 

पहली बार चिप लगी गेंद से होगा वर्ल्ड कप, 1970 की थीम पर पाकिस्तान में बनी है गेंद

फुटबॉल की सबसे पुरानी गेंद करीब साढ़े चार सौ साल पहले की उपलब्ध है। लेकिन फुटबॉल का इतिहास करीब 3000 साल पुराना है। पहले युद्ध जीतने पर विरोधियों के कटे हुए सिर को किक करने जैसा खेल प्रचलन में था।
ऐतिहासिक संदर्भों से जो तथ्य मिलते हैं, उसके मुताबिक गेंद के तौर पर मानव या जानवरों की खोपड़ी, जानवरों के ब्लाडर, कपड़ों को सीलकर बनाए गए गट्ठर का इस्तेमाल होता रहा है। 
चीन के हान साम्राज्य (करीब 2250 साल पहले) में जानवरों के चमड़े से बनी गेंद से फुटबॉल जैसा खेल प्रचलन में था। फुटबॉल की वैश्विक संस्था-फीफा इसे फुटबॉल के सबसे पुराने नियमबद्ध फॉर्मेट के तौर पर मान्यता देती है। वहां से यह दुनिया भर में फैला।
मध्यकाल में जानवरों (विशेषकर सूअर) के ब्लाडर को चमड़े से कवर किया जाने लगा था। ताकि गेंद को बेहतर शेप मिल सके। 19वीं शताब्दी में रबड़ के ब्लाडर आने तक फुटबॉल की गेंद बनाने की यही प्रक्रिया जारी रही।
पहली रबर गेंद 1836 में गुडईयर ने बनाई थी
1836- ब्रिटेन के चार्ल्स गुडईयर ने पहली बार जानवर के ब्लाडर की जगह रबर की गेंद बनाई।  उन्होंने इसका पेटेंट भी कराया था।
1862- एचजे लिंडन ने रबर के फुलाए जाने वाले ब्लाडर बनाए। उनकी पत्नी फुटबॉल के लिए जानवरों के ब्लाडर फूंक कर फुलाती थीं। उन्हें फेफड़े की बीमारी हो गई। तब लिंडन ने रबर के फुलाए जा सकने वाले ब्लाडर बनाए।
1863- उस समय नए-नए अस्तित्व में आए इंग्लिश फुटबॉल एसोसिएशन ने फुटबॉल के नियम बनाए। हालांकि, उन नियमों में गेंद के आकार के बारे में कुछ नहीं कहा गया था।
1872-  नियम संशोधित किए गए। तय किया गया कि गेंद निश्चित रुप से गोल होगी (स्फेरिकल)। इसका सरकमफेरेंस 27 से 28 इंच (68.6 सेंटीमीटर से 71.1 सेंटीमीटर)होगा। यही नियम आज भी जारी है।

13वीं बार एक ही कम्पनी की गेंद
- रूस में फीफा वर्ल्ड कप में जो गेंद इस्तेमाल होगी उसका नाम टेलस्टार-18 है। इसे फीफा की पार्टनर कंपनी और 1970 से वर्ल्ड कप में गेंद सप्लाई कर रही एडिडास ने डिजाइन किया है। इस कंपनी ने लगातार 13वीं बार वर्ल्ड कप की गेंद डिजाइन की है। इसका नाम एडिडास द्वारा 1970 में डिजाइन किए पहले टेलस्टार के नाम पर 'टेलस्टार-18' रखा है। 1970 के दशक में ब्लैक एंड वाइट टीवी चलन में थे। खेल के दौरान टीवी दर्शकों को गेंद आसानी से दिखे, इसलिए इसमें पहली बार सफेद के साथ काले पैनल का इस्तेमाल किया गया था।

टेलस्टार-18  का प्रोडक्शन पाकिस्तान के सियाल कोट स्थित कंपनी फॉरवर्ड स्पोटर्स ने किया है। यह कंपनी गेंद बनाने के लिए दुनिया भर में मशहूर है। कंपनी हर महीने 7 लाख गेंद बनाती है। 1994 से यह एडिडास के साथ काम कर रही है। 2014 और 2018 वर्ल्ड कप के लिए भी इसी कंपनी ने गेंद बनाया था। टेलस्टार-18 में एनएफसी चिप लगी है। इस चिप के जरिए गेंद को स्मार्ट फोन से कनेक्ट कर खेल से जुड़े कई अहम स्टेट हासिल किए जा सकते हैं। यह गेंद आम लोगों और खिलाड़ियों के खरीदने के लिए उपलब्ध है।


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