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नया हरियाणा

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018

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हिसार: एक पार्टी से कोई भी दोबारा जीतकर नहीं पहुंचा लोकसभा

2014 में भजनलाल और देवीलाल परिवार की सीधी टक्कर थी इस सीट पर.

Hisar: No party has won again by winning a Lok Sabha, naya haryana, नया हरियाणा

4 जून 2018

नया हरियाणा

2014 के लोकसभा चुनावों में हिसार संसदीय सीट ‘हॉट सीट’ बनी हुई थी, क्योंकि यहां से हरियाणा की राजनीति के दो बड़े परिवारों की साख टकराई हुई थी. भजनलाल के बेटे और दूसरी तरफ देवीलाल के पड़पोते दुष्यंत चौटाला इस सीट से चुनाव लड़ रहे थे.  पूर्व सांसद और हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई राज्य में भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन प्रत्याशी के रूप में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के दुष्यंत चौटाला तथा कांग्रेस के  प्रो. संपत सिंह के साथ त्रिकोणीय मुकाबले में यहां का चुनाव काफी रोचक हो गया था. जिसमें जीत दुष्यंत चौटाला ने दर्ज की थी.
वर्ष 1967 में हिसार लोकसभा सीट बनने के बाद से 2014 तक के इस सीट के चुनावों के इतिहास पर नजर डालें तो यह सामने आता है कि कोई भी सांसद एक ही पार्टी से लगातार दूसरी बार निर्वाचित नहीं हो पाया है। जय प्रकाश को यहां से विभिन्न अंतराल में सर्वाधिक तीन बार सांसद बनने का श्रेय हासिल है लेकिन उन्होंने पिछली बार चुनाव लडने से इंकार कर दिया था।
हिसार सीट का रोचक इतिहास
इस सीट से वर्ष 1967 में कांग्रेस के रामकिशन गुप्ता, 1971 में कांग्रेस (जे) के मनीराम गोदारा, 1977 में जनता पार्टी के इंद्र सिंह श्योकंद, 1980 में जनता(एस) के मनीराम बागड़ी, 1984 में कांग्रेस के बीरेन्द्र सिंह, 1989 में जनता दल के जय प्रकाश, 1991 में कांग्रेस के नारायण सिंह, 1996 में हरियाणा विकास पार्टी के जय प्रकाश, 1998 में हरियाणा लोकदल के सुरेन्द्र बरवाला, 1999 इंडियन नेशनल लोकदल के सुरेंद्र बरवाला, 2004 में कांग्रेस के जय प्रकाश, 2009 में हजकां के भजनलाल, 2011 में हजकां कुलदीप बिश्नोई हिसार से सांसद चुने गए।
यहां से तीन बार जय प्रकाश सांसद बने परंतु तीनों बार उनकी पार्टी अलग थी. सुरेंद्र बरवाला दो बार सांसद बने, परंतु दोनों बार उनकी पार्टी का नाम अलग था-हरियाणा लोकदल और इंडियन नेशनल लोकदल. 
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वर्तमान सांसद दुष्यंत चौटाला इस इतिहास को बदल पाते हैं या नहीं. इस सीट पर अभी तक कोई सांसद उसी दल से दूसरी बार सांसद नहीं बना है. हो सकता है इस कारण से सांसद दुष्यंत चौटाला शायद सीट बदल लें. कुछ दिनों पहले उनकी माता नैना चौटाला के यहां चुनाव लड़ने की खबरें सोशल मीडिया पर देखने को मिली थी. खैर यह तो वक्त ही बताएगा कि सांसद इस बार चुनाव जीतकर इतिहास रचते हैं या इतिहास का शिकार होते हैं.
 


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