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नया हरियाणा

शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

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हरियाणा दिवस पर विशेष: हाम छोरी हरियाणे की

हरियाणा दिवस की 51वीं वर्षगांठ पर आज हम आपके लिए लेकर आए हैं सुनीता करोथवाल जी की बेहतरीन कविता. जिसमें हरियाणा की छोरियों की यश गाथा का वर्णन है

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1 नवंबर 2017

सुनीता करोथवाल

हरियाणा दिवस की 51वीं वर्षगांठ पर आज हम आपके लिए लेकर आए हैं सुनीता करोथवाल जी की बेहतरीन कविता. जिसमें हरियाणा की छोरियों की यश गाथा का वर्णन है और समाज में उनकी निर्णायक भागीदारी को बयान किया गया है. ताकि कोई इस गलत फहमी में न रहे कि छोरियां छोरो से किसी क्षेत्र में कम हैं.

ओलिम्पिक तक धाक सै म्हारी,या बात नहीं बतलाणे की ।
हाम छोरी हरियाणे की भाई हाम छोरी हरियाणे की ।।

लाम्बी ठाड्डी सुथरी भतेरी,माणस बगरे काम म्हारे
लाठी,दाती ,खुरपे,कसौले रये सै हथियार म्हारे,
खेत कमावां,आच्छया खावां, शर्म नहीं बतलाणे की 
हाम छोरी हरियाणे की भाई छोरी हरियाणे की ।। 

मार मंडासा,आवां कमा कै ,खेत मैं कटता दोफारा,
धरती के म्है दलक लागज्या, सिर तै उतरै घास म्हारा 
मर्दां बरगी बीर सां हाम,नहीं किते खतराणे की ।।
हाम छोरी हरियाणे की..

बचपन तै नदियाँ मैं नहाये,हलवा,खीर चूरमे खाये
दूध,दही माखन की हांडी ,घर मैं सदा रै म्हारे पाये
रग रग मैं जोश भरया बैठया,सै आदत्त धमकाणे की 
हाम छोरी हरियाणे की..

रवां ठाड तै,खावां पाड़ कै, जो कोये हामनै घूरैगा
हाथ पाड़ के हाथ मैं देदयां, जो भी हामनै छेड़ेगा
आदत्त सै बचपन तै म्हारी, कुश्ती के पेंच लड़ाणे की।
हाम छोरी हरियाणे की..

ना डरणा,ना डरकै जीणा,घुट घुट के कदे ज़हर ना पीणा
सुनीता करोथवाल जोश तूं भर ले ,सै जितणा बी रोश वो कर ले
अपणे हक्क की खातिर लड़ना,या बात नहीं कतराणे की ।
हाम छोरी हरियाणे की
हाम छोरी हरियाणे की ।।

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सुनीता करोथवाल मूलतः भिवानी की रहने वाली हैं और हरियाणवी भाषा और संस्कृति पर इनकी गहरी पकड़ है. कवि हृदय सुनीता जी अपने काव्य के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति की जड़ों को मजबूत करती है तथा संदेश देती हैं.

 


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