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नया हरियाणा

मंगलवार, 17 सितंबर 2019

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इस मुलाकात को लेकर कांग्रेस और इनेलो वाले ज्यादा बेचैन न हो!

जाटों में भाजपा की छवि बिलकुल वैसी ही बन चुकी है जैसी कभी चौधरी भजन लाल की थी , मतलब जो भी जाट इनके साथ गया समझो वो जाति बाहर हो गया !

Amit Shah, Army chief  Dalbir Suhag, naya haryana, नया हरियाणा

1 जून 2018



राकेश सांगवान

सोशल मीडिया में जनरल दलबीर सिंह सुहाग की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ यह तस्वीर बहुत वाइरल हुई , लोगों की तरह तरह की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली , जाटों में तो इस तस्वीर को लेकर ख़ासा रोष दिखा , जाट इस मुलाक़ात को जनरल साहब की भाजपा सदस्यता ग्रहण करना समझ बैठे और इसके साथ ही बात चला दी गई कि भाजपा जनरल साहब को रोहतक लोकसभा सीट से चुनाव लड़वा सकती है । हालाँकि , अब तक जनरल साहब या भाजपा की तरफ़ से ऐसा कोई बयान नहीं कि जनरल साहब ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की या भविष्य में करेंगे , ये सब सिर्फ़ एक मुलाक़ात के आधार पर क़यास लगाए जा रहे हैं । कई जाटों में जनरल साहब के नाम के सर्टिफ़िकेट टाइप करवा लिए हैं बस बाँटने बाक़ी हैं ।जाटों में भाजपा की छवि बिलकुल वैसी ही बन चुकी है जैसी कभी चौधरी भजन लाल की थी , मतलब जो भी जाट इनके साथ गया समझो वो जाति बाहर हो गया !

जनरल साहब के सेनाध्यक्ष बनने के पीछे बहुत राजनीति चली थी । जनरल वी.के सिंह हर हाल में सुहाग साहब के प्रमोशन को रोकना चाहते थे । दिल्ली में इसको लेकर बहुत लॉबीइंग और घेराबंदी की गई । यूपीए के अंदर इसके लिए लॉबीइंग की हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भुपेंद्र सिंह हुड्डा ने तो विपक्ष पर दबाव बनने के लिए कमाडेंट हवा सिंह सांगवान के नेतृत्व में जाट आरक्षण संघर्ष समिति की तरफ़ से तत्कालीन विपक्ष की नेता श्रीमती सुषमा स्वराज को ज्ञापन दिया गया । और अंत में इस लॉबीइंग से सुहाग साहब के प्रमोशन का रास्ता साफ़ हुआ ।

अब बात इस मुलाक़ात की तो जहाँ तक मुझे जानकारी है वो ये है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ख़ास लोगों से मुलाक़ात का एक अभियान चलाया है , सिर्फ़ औपचारिक मुलाक़ात । यह एक राजनीतिक स्टंट होता है । हमारे भिवानी के एक नेता जी जो राजनीतिक मौसम के वैज्ञानिक भी माने जाते है उनके बारे में मशहूर है कि शहर में कोई व्यक्ति जिसका प्रभाव ठीक हो और चुनाव में उन्हें डेंट मार सकता है , नेता जी क्या करते है कि अगले के ना चाहते हुए भी धक्के से चाय पीने के बहाने उससे अकेले मिलने चले जाते , अंदर सिर्फ़ चाय ही पिएँगे कोई राजनीतिक बात नहीं होगी । बाहर आने पर उनके वर्कर पूछते कि इस मुलाक़ात का क्या फ़ायदा ? नेता जी कहते कि ये हमारा तो नहीं हो सकता पर इसको लिबाड़ (ख़राब/गंदा) तो दो ताकि ये किसी का भी ना हो सके । और इस मुलाक़ात में भी मुझे वहीं लिबाड़ने वाला स्टंट ही नज़र आता है । बाक़ी लोकतंत्र है , सबकी अपनी सोच और अधिकार है कि कोई किसी भी पार्टी को वोट कर सकता है , कोई सी भी पार्टी की सदस्यता ले सकता है , सो अमित शाह की जनरल साहब से मुलाक़ात से मेरे ख़्याल से कोई ख़ास विचलित होने वाली बात तो है नहीं ।


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