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नया हरियाणा

रविवार, 19 अगस्त 2018

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हिंदी पत्रकारिता दिवस के बहाने हरियाणा की हिंदी पत्रकारिता को भी याद कर लें

बाबू बालमुकुंद गुप्त हरियाणा पत्रकारिता के इतिहास में सबसे ख्याति प्राप्त पत्रकार रहे हैं. उनकी व्यंग्य शैली आज भी उतनी ही असरदार है.

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1 जून 2018

रणदीप घणघस

1826 में आज के ही दिन यानी 30 मई को कानपुर से आकर कलकत्ता (अब कोलकाता) में सक्रिय वकील पंडित जुगल किशोर शुक्ला ने वहां बड़ा बाज़ार के पास के  अमर तल्ला लेन, कोलूटोला से साप्ताहिक ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन शुरू किया, जो हर सप्ताह मंगलवार को  प्रकाशित होता था.
पर आज हम बात करेंगे हरियाणा की हिंदी पत्रकारिता की. हरियाणा की हिंदी पत्रकारिता का शुरुआती वर्ष है 1884 और हरियाणा में हिंदी की पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले संपादक थे जियालाल जैन और इनका समाचार पत्र था जैनप्रकाश. कुछ समय पश्चात इसका नाम हो गया जियालाल प्रकाश हिंदुस्तान. जैन प्रकाश एक मासिक समाचार पत्र था. इसके पश्चात 1887 में गुडगांव से जाट समाचार का प्रकाशन आरंभ हुआ और संपादक थे बाबू कन्हैयालाल सिंह. इस बारे में अपनी पुस्तक में डॉ. केशवानंद ममगाई लिखते हैं कि जैन प्रकाश की कोई प्रति उपलब्ध नहीं है और तथ्य यह है कि इस पत्र के संपादक जियालाल जयंती और उन्होंने जयप्रकाश मासिक पत्र निकाला. जो प्रतियां हमें प्राप्त हुई उन पर 1 अक्टूबर 1885 लिखा है. इसकी प्रिंट लाइन में प्रकाशित होता था. जियालाल जैन प्रकाश मासिक श्रीयुत चौधरी मुंशी पंडित जैनी जिया लाल जी संपादक जैन प्रकाश निवासी फरुखनगर जिला गुड़गांव की आज्ञा अनुसार जेब काशी काशी यंत्रालय से मुद्रित होय. इतना तो लगभग निश्चित है कि हरियाणा का पहला हिंदी पत्र जैन प्रकाश था और शायद जिसका पहला अंक 14 नवंबर 1884 को प्रकाशित हुआ. इन तथ्यों के आधार पर हम यह कहने की स्थिति में है कि श्री जियालाल जैन हरियाणा के हिंदी पहले संपादक थे. ‘दी पंजाब प्रेस’ नामक पुस्तक में भी जैन प्रकाश हिंदुस्तान के बारे में सूचना दी गई है. हम कह सकते हैं कि हिंदी समाचार पत्रिका हरियाणा में पहला फूल खिला फरुखनगर में जिसे औरंगजेब के पुत्र फरुख ने बसाया था. जो गुड़गांव जिले का हिस्सा था. वर्तमान गुरुग्राम को ही यह श्रेय जाता है कि दूसरा समाचार पत्र भी यहीं से प्रकाशित हुआ. गुडगांव से ही जाट समाचार नामक समाचार पत्र सन 1889  का प्रकाशन आरंभ हुआ. इस के संपादक थे बाबू कन्हैयालाल सिंह. समाचार पत्र का अभी वर्तमान में कोई अंक उपलब्ध नहीं है. यह समाचार पत्र विद्या विलास प्रेस आगरा में छपता था. 
हरियाणा की महिलाएं भी पत्रकारिता में किसी से पीछे नहीं थी. 1926 में भक्ति नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ और इस पत्रिका की  संपादिका थी सूरदेवी प्रभाकर. भक्ति मासिक भक्ति आश्रम रेवाड़ी से प्रकाशित एवं मुद्रित होता था. हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में बाबू बालमुकुंद गुप्त, माधव प्रसाद मिश्र, पंडित राधाकृष्ण मिश्र सदा याद किए जाएंगे. बाबू बालमुकुंद गुप्त उर्दू पत्रकारिता से हिंदी पत्रकारिता में आए. पहले वह हिंदुस्तान के संपादकीय मंडल के सदस्य बने. ‘हिंदी बंग वासी’ व ‘भारतमित्र’ के संपादक बनने के बाद गुप्त जी ने हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए. उस वक्त के वायसराय लार्ड कर्जन के खिलाफ भी वह ‘भारतमित्र’ समाचार पत्र में ‘शिव शंभू का चिट्ठा’ नामक आलम में खूब लिखते थे. भारतीय पत्रकारिता और मूलतः हिंदी पत्रकारिता में व्यंग्य शैली की शुरूवात शंभूनाथ के चिट्ठे से भी मानी जाती है.
 पंडित माधव प्रसाद मिश्र सन उन्नीस सौ में सुदर्शन के संपादक बने. विद्वान लोग मानते हैं कि सुदर्शन सरस्वती समाचार पत्र के समकक्ष था. कुछ समय पश्चात वह कोलकाता से प्रकाशित वैश्योंपकारक समाचार पत्र के संपादक बने और इस समाचार पत्र को ऊंचाइयों पर ले कर गए. इंडिया न्यूज़ पंडित राधाकृष्ण मिश्र ने भारत मित्र और वैश्योंपकारक के संपादक के रूप में पत्रकारिता की सराहनीय सेवा की.
 


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