Hindi Online Test Privacy Policy | About Us | Contact

नया हरियाणा

रविवार, 18 अगस्त 2019

पहला पन्‍ना सर्वे लोकप्रिय 90 विधान सभा हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप English

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट : हर साल तेज गति से बढ़ रहे हैं डिप्रेशन के मरीज

भारत में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण भी डिप्रेशन में इजाफा हुआ है.

World Health Organization Report, Depression, indian , naya haryana, नया हरियाणा

29 मई 2018



नया हरियाणा

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार, 
पिछले दस साल में 18 प्रतिशत सालाना की दर से डिप्रेशन के मरीज बढ़े हैं। दुनिया के लगभग 30 करोड़ लोग डिप्रेशन जैसी बीमारी का शिकार हैं। जिसके चलते दुनिया की अर्थव्यवस्था को 67 लाख करोड़ का नुकसान हो रहा है। अमेरिका में तो हालात इतने खराब हैं कि वहाँ हर 5 वयस्क में से 1 वयस्क इस बीमारी का शिकार रहा है। तो वही यूरोप में 8 करोड़ 30 लाख लोग मानसिक असंतुलन के शिकार हैं। 2005 से 2015 तक दुनिया में डिप्रेशन के मरीजों की संख्या में 18 प्रतिशत की दर से सालाना बढ़ोतरी हुई है, जो कि बेहद चिंताजनक स्थिति है। 
अमेरिका के मेंटल हेल्थ के अध्ययन से यह पता चला है कि कार्यक्षेत्र में तनाव, अकेलापन, जिंदगी की बढ़ती महत्वाकांक्षाएं, नौकरी से असंतुष्टि, निजी जिंदगी में रिश्तों में तनाव इत्यादि अलग-अलग कारणों की वजह से लोग इस बीमारी का शिकार होते जा रहे हैं। यह बीमारी अब हर उम्र के लोगों में दिखायी दे रही हैं, फिर वो बच्चा हो, युवा हो, वयस्क या बूढ़ा।

भारत में भी लगातार मानसिक रोगियों अर्थात् डिप्रेशन के मरीज बढ़ रहे हैं. भारत में सबसे खतरनाक बात यह है कि भारत में डिप्रेशन को कोई बीमारी ही नहीं मानी जाती. यहां सीधे मनोरोगी के पास जाने का मतलब लोग पागल मानते हैं. जीवन में बढ़ते तनाव और अस्थायी जीवन शैली ने जीवन की गति में डिप्रेशन को पैदा किया है. दूसरी तरफ जिंदगी की बढ़ती रफ्तार डिप्रेशन का कारण बनती जा रही है.

डिप्रेशन के लक्षण-

उदासी- अगर आपके आसपास खुशनुमा माहौल है, या कोई मजाक कर रहा है फिर भी आपके चेहरे पर न मुस्कान और न ही हंसी आती है. अगर आपको लगता है कि आपकी जिंदगी में कुछ भी आपको खुशी नहीं दे रहा है और आप लगातार उदास हैं तो आप डिप्रेशन के शिकार हैं.
चिड़चिड़ाहट- छोटी-छोटी चीजें अगर आप चिड़चिड़ा बना देती हैं, या सुबह उठते ही आपका मूड ऑफ रहता है जो दिन पर बना रहता है, किसी की कंपनी भी आपको नहीं भाती है तो ये डिप्रेशन के संकेत हैं
अकेलापन- चिड़चिड़ाहट के कारण आपके आसपास के लोग दूर होने लगते हैं. आप भी किसी को अपने पास नहीं आने देना चाहते. आप ज्यादातर अकेले रहते हैं और किसी सोशल मीट का हिस्सा भी नहीं बनते तो सतर्क हो जाइए, क्योंकि ये अवसाद की निशानी है.
भावुकता में कमी- भावनाएं ऐसी चीज हैं जो हमें सही मायने में इनसान बनाती हैं. लेकिन डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति में भावनाओं में कमी आने लगती है. व्यक्ति सिर्फ अपने बारे में सोचने लगता है. उसकी कही बातों या उठाए गए किसी पर क्या असर होगा वो इस बारे में सोचना बंद कर देता है.
नींद में कमी- नींद में कमी अवसाद का एक संकेत है. व्यक्ति सोने के समय भी सोच-विचार करता रहता है. अकेले होने के कारण वो अपनी भावनाओं को किसी को नहीं बताया इससे उसके दिमाग में बातें चलती रहती हैं, जिससे नींद नहीं आती. यही कारण है कि व्यक्ति को दिन भर थकान महसूस होती रहती है. इससे उसके व्यवहार और काम पर असर पड़ने लगता है.


बाकी समाचार