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इनेलो ओम प्रकाश चौटाला के शब्दों का सम्मान करेगी या अपमान!

जहाँ एक और इंडियन नेशनल लोकदल के सुप्रीमो ॐ प्रकाश चौटाला जेल तोड़कर आ जाने के बयान देकर अपने कार्यकर्ताओं में 'जोश' भरने का काम कर रहे हैं वहीँ यह भी बोल रहे हैं कि जो नेता इनेलो छोड़ गये उन्हें वापिस पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा. क्या ऐसे में यह संभव है कि वर्तमान में इनेलो को संभाल रहे नेता चौटाला के इस बयान को मान सकें और पार्टी छोड़कर गये नेताओं को वापिस शामिल ना करें.

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31 अक्टूबर 2017

जवाहर यादव

इनेलो के सुप्रीमो नेता ओमप्रकाश चौटाला जेल से छुट्टी लेकर आए हैं तो कई राजनीतिक बातें भी कह रहे हैं. उनका ज़ोर इस बात पर है कि उनकी पार्टी के जो लोग उन्हें छोड़कर जा चुके हैं, कार्यकर्ता उन्हें पार्टी में वापिस लेने की सिफारिश ना करें. चौटाला जी उन सभी को गद्दार बता रहे हैं और किसी कीमत पर उन्हें पार्टी में वापिस लेने को तैयार नहीं है। पहला सवाल तो यह है कि क्या आज इनेलो इस स्थिति में है कि कोई इस दल में शामिल होना चाहेगा. निरंतर ढलान पर चल रहे इस दल में कोई शामिल ही नहीं हो रहा है. कहीं वरिष्ठ चौटाला जी इसी बात की झेंप तो नहीं मिटा रहे? दूसरा सवाल यह भी है कि बड़े चौटाला साहब जैसा चाहते हैं, इनेलो की वर्तमान कर्ताधर्ता पीढ़ी भी वैसा सोचती है क्या? इस बात पर लोगों में संशय है कि पार्टी के युवा नेता अपने वरिष्ठतम नेता की बात का सम्मान रखेंगे और इनेलो छोड़कर गए (जिनको ग़द्दार माना है) किसी शख्स को दोबारा पार्टी में नहीं लेंगे. यह भविष्य में तय होगा चौटाला साहब का ख़ुद का परिवार उनके शब्दों का सम्मान करेगा या अपमान?

एक विषय यह भी है कि चौधरी ओमप्रकाश चौटाला आगामी चुनाव के समय जेल तोड़कर आने की बात कह रहे हैं. एक तो यह पूरी तरह गैरकानूनी और अदालत की अवमानना वाली बात है जो पांच बार मुख्यमंत्री रहे शख्स की ज़ुबान से शोभा नहीं देती. जेल तोड़ना अपराध है क्या कोई अपराधी (भगोड़ा) खुले में घूम कर चुनाव प्रचार कैसे कर सकता है. तो फिर ऐसे ब्यान देकर अपने ही कार्यकर्ता को क्यों ठग रहे है चौटाला जी, दूसरे ये भी है कि चौटाला जी पिछले विधानसभा चुनाव के समय भी तो खूब प्रचार में घूमे थे और जेल से ही शपथ लेने की बात कहते थे. नतीजा क्या हुआ? ना नौ मन तेल हुआ, ना राधा नाची. 

बड़े चौटाला जी लोगों से यह भी कह रहे हैं कि वे सत्ता में आते ही अपने कार्यकर्ताओं का सात पीढ़ी का जुगाड़ बैठा देंगे. यानी सबके लिए ऐसा इंतज़ाम कर देंगे कि सात पीढ़ियों तक दिक्कत ना आए. कार्यकर्ताओं का ये सपना भी भविष्य ही तय करेगा. (पूर्व में आप पाँच बार सीएम रहे) हां, इतना जरूर है कि चौधरी देवीलाल परिवार की चौथी पीढ़ी का राजनीति में जुगाड़ ज़रूर बैठ चुका है. इस परिवार की हर पीढ़ी से कोई ना कोई इनके दल का नेता बनने के लिए अपने आप आगे आ जाता है. मतलब राजनीति में आसान एंट्री, कुछ ऐसी ही आसान ज़िन्दगी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की भी कर दें चौटाला जी, तो उनकी बात में दम साबित होगा. तब तक तो सब हवाहवाई है.

(लेखक जवाहर यादव भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और हरियाणा हाऊसिंग बोर्ड के अध्यक्ष हैं)

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