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नया हरियाणा

रविवार, 24 जून 2018

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शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने किया कांग्रेस का पिंड दान!

इमरजंसी के इस रोचक किस्से के साथ पढ़िए शरद जोशी की व्यंग्य से भरपूर लोककथा.

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26 मई 2018

नया हरियाणा

हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान में शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा का यह किस्सा एमरजंसी के दिनों का है. उस समय वो करीब 19 महीने जेल में रहे थे. इमरजंसी हटी तो काफी तादाद में राजनीतिक कैदियों को रिहा किया गया था. लेकिन रामबिलास शर्मा को बाद में छोड़ा गया. उसी दौराम लोकसभा चुनावों की घोषणा हो गई.
चुनाव के समय में कांग्रेस के सर्वेसर्वा बंसीलाल एख जनसभा को संबोधित कर रहे थे. उसमें किसी ने पूछ लिया हमारे रामबिलास शर्मा का क्या हुआ? बंसीलाल ने जवाब दिया-“उसे गया जेल में भेजा गया था, और भई! जो गया सो गया.” खैर सारे दिन एक से नहीं रहते. थोड़े दिनों बाद रामबिलास शर्मा को जेल से छोड़ दिया गया. 
शर्मा भी ठहरे हाजिर जवाब. उन्हें जब इस किस्से का पता चला तो उन्होंने कहा-“बंसीलाल ठीक कहते हैं. मैं गया तो गया था, लेकिन वहां मैं इमरजंसी लगाने वालों का पिंड दान करके आया हूं.” (पवन बंसल की किताब से साभार)
इमरजंसी से जुड़ी एक लोककथा- ‘शेर की गुफा में न्याय’ व्यंग्य शैली में शरद जोशी ने लिखी है. यहां उसे रखना भी प्रासंगिक होगा-
जंगल में शेर के उत्पात बहुत बढ़ गए थे। जीवन असुरक्षित था और बेहिसाब मौतें हो रही थीं। शेर कहीं भी, किसी पर हमला कर देता था। इससे परेशान हो जंगल के सारे पशु इकट्ठा हो वनराज शेर से मिलने गए। शेर अपनी गुफा से बाहर निकला - कहिए क्या बात है?
उन सबने अपनी परेशानी बताई और शेर के अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाई। शेर ने अपने भाषण में कहा -
‘प्रशासन की नजर में जो कदम उठाने हमें जरूरी हैं, वे हम उठाएँगे। आप इन लोगों के बहकावे में न आवें जो हमारे खिलाफ हैं। अफवाहों से सावधान रहें, क्योंकि जानवरों की मौत के सही आँकड़े हमारी गुफा में हैं जिन्हें कोई भी जानवर अंदर आकर देख सकता है। फिर भी अगर कोई ऐसा मामला हो तो आप मुझे बता सकते हैं या अदालत में जा सकते हैं।’
चूँकि सारे मामले शेर के खिलाफ थे और शेर से ही उसकी शिकायत करना बेमानी था इसलिए पशुओं ने निश्चय किया कि वे अदालत का दरवाजा खटखटाएँगे।
जानवरों के इस निर्णय की खबर गीदड़ों द्वारा शेर तक पहुँच गई थी। उस रात शेर ने अदालत का शिकार किया। न्याय के आसन को पंजों से घसीट अपनी गुफा में ले आया।
शेर ने अपनी नई घोषणाओं में बताया - जंगल के पशुओं की सुविधा के लिए, गीदड़ मंडली के सुझावों को ध्यान में रखकर हमने अदालत को सचिवालय से जोड़ दिया है, ताकि न्याय की गति बढ़े और व्यर्थ की ढिलाई समाप्त हो। आज से सारे मुकदमों की सुनवाई और फैसले हमारी गुफा में होंगे।
इमर्जेंसी के दौर में जो पशु न्याय की तलाश में शेर की गुफा में घुसा उसका अंतिम फैसला कितनी शीघ्रता से हुआ इसे सब जानते हैं।
 


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