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नया हरियाणा

मंगलवार, 25 जून 2019

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पहलवान सुशील कुमार को दीजिए जन्मदिन की शुभकामनाएं!

शेर कभी बूढ़ा नहीं होता, सुनी तो बहुत थी, पर जब सुशील कुमार को खेलते हुए देखते हैं तो लगता है ये कहावत इन पर बिल्कुल सटीक बैठती है.

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26 मई 2018



नया हरियाणा

सुशील कुमार  पहलवान : शेर कभी बूढ़ा नहीं होता

यह कहावत शेर कभी बूढ़ा नहीं होता, सुनी तो बहुत थी, पर जब सुशील कुमार को खेलते हुए देखते हैं तो लगता है ये कहावत इन पर बिल्कुल सटीक बैठती है. 26 मई 1983 को पहलवान सुशील का जन्म हुआ था. 2008 के बीजिंग ओलंपिक हो या 2018 के राष्ट्रमंडल खेल. पूरे 10 साल बाद भी वही तेवर, जुनून और जोश इस खिलाड़ी को दूसरों से अलग कर देता है. जीवन में अच्छे और बुरे दौरों से जो खिलाड़ी उभर जाता है और अपने खेल को बचाए रखता है. वह खिलाड़ी बिरला ही होता है. हुनर होना और हुनर को लगातार निखारते चलना दो अलग-अलग मुकाम हैं और दूसरे मुकाम पर बहुत कम खिलाड़ी पहुंचते हैं. पर पहलवान सुशील कुमार ने अपनी प्रतिभा को लगातार संवारा हैं. दिग्गज पहलवान सुशील कुमार ने केवल एक मिनट के भीतर ही अपने प्रतिद्वंद्वी रूस के जोहानेस बोथा को चित करते हुए 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में अपने स्वर्ण पदकों की हैट्रिक बनाने के साथ अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया.

नजफगढ़ के बापरोला गांव में जन्मे सुशील कुमार के पिता का नाम दीवान सिंह और माता का नाम कमला देवी है. सुशील को बचपन से ही कुश्ती का बहुत ज्यादा शौक था. दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट अपने खेल कौशल के दम पर भारतीय रेलवे में नौकरी लगे.

2012 के लंदन ओलंपिक में रजत पदक, 2008 के बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर लगातार दो ओलंपिक मुकाबलों में जीतने वाले वो पहले भारतीय खिलाड़ी बने थे. 2010, 2014 और 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में इन्होंने स्वर्ण पदक जीता है.


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