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नया हरियाणा

सोमवार , 20 अगस्त 2018

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रोहतक सीट पर परदादा देवीलाल की हार का बदला ले पाएंगे दुष्यंत चौटाला!

रोहतक से अगर दुष्यंत चुनाव लड़ते हैं तो यह चुनाव हरियाणा का सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहने वाला चुनाव होगा.

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26 मई 2018

नया हरियाणा

सोशल मीडिया और राजनीतिक बहसों में यह बात बार-बार उभरकर आ रही है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में दुष्यंत चौटाला अपने पड़दादा की हार की बदला लेने के लिए रोहतक से चुनाव लड़ सकते हैं. खरी-खरी न्यूज पर लगी एक पोस्ट में यह संकेत मिल रहे हैं कि हिसार से नैना चौटाला(दुष्यंत चौटाला की मां) लोक सभा चुनाव लड़ सकती हैं. अगर दुष्यंत चौटाला रोहतक से चुनाव लड़ते हैं तो हरियाणा के लोकसभा चुनावों की 10 सीटों में से सबसे रोमांचक चुनाव फिर रोहतक का होगा. वैसे 2 बार चुनाव जीत चुके दीपेंद्र हुड्डा की पकड़ यहां के वोटरों पर सबसे मजबूत है. उनकी हार की आशंकाएं रोहतक शहर में हुई हिंसा और लूटपाट के कारण बढ़ गई हैं. गैर जाट वोटर हुड्डा परिवार की भूमिका मानता है. जिसका खामियाजा हुड्डा परिवार को अगले चुनाव में उठाना पड़ सकता है. इन दोनों के आमने-सामने होने पर भाजपा किसे उम्मीदवार बनाती है, यह देखना दिलचस्प होगा.

देशवाली बेल्ट यानी ओल्ड रोहतक के बारे में एक धारणा यह भी है कि यह जब किसी का हाथ थामता है तो उसे आसानी से नहीं छोड़ता, लेकिन जब कोई इससे हाथ छुड़ाता है तो ये उसे माफ भी नहीं करता। महम सैमाण, मोखरा, मदीना, लाखनमाजरा व खरकड़ा सहित कई गांवों में हुक्कों पर बैठे बुजुर्गों को जब टटोला गया तो यह बात भी उभर कर सामने आई कि देवीलाल द्वारा रोहतक से इस्तीफा देने को वे अभी तक भूले नहीं हैं। खुले हुए ताश के पत्तों को हाथों में बंद करते हुए करीब 70 वर्षीय ओमप्रकाश व उसके साथ ही बैठे ताश की बाजी लगा रहे रामपाल ने महम कांड का जिक्र किया ही था कि तपाक से साथ ही बैठे एक और सज्जन ने कहा ‘हमने देवीलाल को देश की सत्ता सौंपी थी, उन्होंने हमारा ही अपमान कर दिया’। ये लोग याद दिला रहे थे, उस वाकये को, जो 1989 के लोकसभा चुनाव के बाद हुआ था। दरअसल, चौ़ देवीलाल ने इस चुनाव में रोहतक सहित एक साथ तीन लोकसभा क्षेत्रों राजस्थान के सीकर व पंजाब के फिरोजपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। देवीलाल ने रोहतक व सीकर से जीत हासिल की। यह वह दौर था, जब देवीलाल अपनी पार्टी को हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश व राजस्थान में फैलाने की कोशिशों में जुटे थे। देवीलाल ने सीकर सीट की सदस्यता रखी ओर रोहतक से इस्तीफा दे दिया। रोहतक से इस्तीफा देने की घटना को लोगों ने अपना ‘अपमान’ माना और नतीजतन, लगातार तीन बार देवीलाल को यहां से लोकसभा का चुनाव हरवा दिया (दैनिक ट्रिब्यून की रिपोर्ट) और भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जीतवा दिया. उनके बाद इस सीट से दो बार सांसद दीपेंद्र हुड्डा बने हैं.


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