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नया हरियाणा

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018

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कांग्रेस और इनेलो में कौन होगा मुख्यमंत्री का चेहरा!

कांग्रेस और इनेलो के भीतर खुद के अस्तित्व की लड़ाई इन्हें खोखला कर रही हैं.

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26 मई 2018

नया हरियाणा

2014 के हरियाणा विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने भूपेंद्र हुड्डा को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में चुनाव लड़ा था. जबकि इनेलो में ओमप्रकाश चौटाला के नाम पर लड़ा था. दूसरी तरफ भाजपा ने एक साथ कई नेताओं को चुनावी भाषणों में मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाओं वाला दाव चला था. साथ में जीटी रोड बैल्ट पर गैर जाट मुख्यमंत्री वाला दाव भी चला था. लोकसभा में मोदी लहर और इन सभी चुनावी गणितों ने हरियाणा में भाजपा को अपने दम पर बहुमत मिला था.
2019 का चुनाव इसलिए भी दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि हरियाणा में जो दाव पहले भाजपा खेल चुकी है, लगभग उसी दाव को इस बार कांग्रेस खेल सकती है. कांग्रसे में कई विकल्प हैं- भूपेंद्र हुड्डा, कुलदीप बिश्नोई, अशोक तंवर, किरण चौधरी आदि.

दूसरी तरफ देखना यह भी दिलचस्प होगा कि इनेलो ओमप्रकाश चौटाला के नाम पर चुनाव में जाते हैं या अभय चौटाला या दुष्यंत चौटाला को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में उतारते हैं. यह सवाल केवल विपक्ष से जुड़ा सवाल नहीं है बल्कि जनता की दिलचस्पी इस बात में है कि आखिर उसकी वोट से मुख्यमंत्री कौन बनेगा? 
जाहिर भाजपा इस बार हरियाणा विधान सभा का चुनाव मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में लड़ेगी और इसका भाजपा को फायदा होगा या नुकसान होगा. यह 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी निर्भर करता है. अगर 2019 में मोदी सत्ता में काबिज नहीं होते हैं तो भाजपा हरियाणा में सिंगल डिजिट में भी आ सकती है. वहीं अगर केंद्र में मोदी कम बैक करते हैं तो इसका फायदा भाजपा को विधानसभा में मिलना तय है. वह बहुमत के नंबर तक पहुंच पाती है या नहीं, इसका आकलन अभी से करना जल्दबाजी होगी. 
अगर कांग्रेस और इनेलो गोलमोल या बिना चेहरे के चुनाव लड़ते हैं तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलना तय है. क्योंकि भाजपा में नेताओं की मुख्यमंत्री बनने की लालसा तो हो सकती है परंतु कांग्रेस और इनेलो की तरह अंदरूनी गुटबाजी नहीं है. वो भी ध्रुर विरोधी से भी ज्यादा घातक स्तर की है. वहां खुद की सत्ता बचाने का संघर्ष ज्यादा है और राजनीति में  अस्तित्व का संघर्ष मनुष्य तो संकीर्ण बना देता है. नेता अपने अस्तित्व को बचाने के लिए किसी भी स्तर पर जाने के लिए नहीं हिचकता है. यह वह बिंदु है जो कांग्रेस और इनेलो को कमजोर किए हुए है. ठीक उस घुण की तरह, जो हरे भरे पेड़ को अंदर ही अंदर खाता रहता है.
यह देखना दिलचस्प होगा कि 2019 के विधानसभा चुनाव में हरियाणा में किसकी लहर बनती है और जनता किसे बहुमत का ताज पहनाती है?
 


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