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नया हरियाणा

बुधवार, 13 नवंबर 2019

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जानिए: किसने, कब और क्यूँ बनाई थी 'ग्रीन ब्रिगेड'

सोशल मीडिया के दौर में ग्रीन बिग्रेड की जगह हरिया और टिड्डी दल जैसे विशेषण दिए जा रहे हैं.

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24 मई 2018



नया हरियाणा

सोशल मीडिया के दौर में इनेलो के वर्करों को काफी आक्रामक माना जाता है. जिस तरह की छवि इनेलो के नेताओं की बनी हुई थी. उसी तरह की छवि कार्यकर्ताओं की बन गई. ग्रीन बिग्रेड सबसे ज्यादा चर्चा में महम चुनाव के दौरान आया. महम चौबीसी पंचायत के उम्मीदवार आनंद सिंह दांगी ओम प्रकाश चौटाला को कड़ी टक्कर दे रहे थे. इसी कारण यहां महम कांड भी हरियाणा की राजनीति के इतिहास में काला धब्बा लग गया.
उन दिनों ग्रीन बिग्रेड के मुखिया जयप्रकाश हुआ करते थे. एक बार जनसत्ता के विवेक सक्सेना ने ग्रीन बिग्रेड के बारे में देवीलाल के बेटे रणजीत सिंह का साक्षात्कार छाप दिया. उन्होंने लिख दिया कि-ग्रीन बिग्रेड हरियाणा में आतंक फैला रही है। बस खबर छपते देवीलाल गुस्से से लाल-पीला हो गए. उन्होंने रणजीत के कान खैंचे. खबर का खंडन करने को कहा. अब रणजीत की  वो हालत हो गई, एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई.
रणजीत की तरफ से बयान टाइप करवाकर उस पर रणजीत के साइन करवाए गए.उसमें रणजीत सिंह ने कह दिया कि मेरी किसी सक्सेना से बात नहीं हुई. वो तो सक्सेना के पास कोई टेप थी, तब जाकर इज्जत बची। 
दूसरी तरफ देवीलाल कहते हैं कि ग्रीन बिग्रेड का गठन तो इलाहाबाद उपचुनाव में जहां से वीपी सिंह लड़ रहे थे कांग्रेस की गुंडागर्दी रोकने के लिए किया गया था. इस ग्रीन बिग्रेड के कारनामे यहां तक थे कि इन्होंने जींद के सिंचाई विभाग के विश्राम गृह में एक एसपी का सामान उठाकर फेंक दिया था और जींद में डॉ. कृपाराम पुनिया का मुहं काला कर दिया था. बाद में चौटाला से मतभेद होने के कारण जय प्रकाश बंसीलाल की हविपा में शामिल हो गए थे.जो बंसीलाल जय प्रकाश को गुंडा कहते थे वो उनके लिए शाह हो गया.
 

फोटो- getty image से साभार


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