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नया हरियाणा

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018

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राज्यपाल तापसे ने देवीलाल का खेल बिगाड़ा, देवीलाल ने 'जड़ा थप्पड़'

कर्नाटक चुनाव में राज्यपाल की भूमिका एक बार फिर संदेह के घेरे में आ गई. ऐसा पहले हरियाणा में भी हो चुका है.

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24 मई 2018

नया हरियाणा

कर्नाटक में भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस के चुनाव में बहुमत न मिलने पर जब वहां के राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने के न्यौता दिया तो एक बार फिर इतिहास से मुर्दे उखाड़े जाने लगे. जाहिर है कांग्रेस जिस लोकतंत्र की दुहाई दे रही है, मुर्दे उखड़ने पर पता चलता है कि सबसे ज्यादा इस तरह लोकतंत्र को कमजोर करने के कारनामे कांग्रेस के नाम दर्ज हैं. आज एक ऐसे ही उदाहरण से आपको रूबरू करवाते हैं, जो हरियाणा से जुड़ा हुआ किस्सा है. जिसमें भजनलाल और देवीलाल के बीच राज्यपाल जेडी तापसे का अलोकतांत्रिक फैसला है.
 1982 में हरियाणा की 90 सदस्यों वाली विधानसभा के चुनाव हुए थे और नतीजे आए तो त्रिशंकु विधानसभा अस्तित्व में आई. कांग्रेस-आई को 35 सीटें मिलीं और लोकदल को 31 सीटें. छह सीटें लोकदल की सहयोगी भाजपा को मिलीं.
राज्य में सरकार बनाने की दावेदारी दोनों ही दलों ने रख दी. कांग्रेस के भजनलाल और लोकदल की तरफ से देवीलाल. लेकिन राज्यपाल गणपति देव तपासे ने कांग्रेस के भजनलाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी. कहा जाता है कि इस बात से गुस्साये देवीलाल ने राज्यपाल तपासे को थप्पड़ मार दिया था. हालांकि सुनने में यह भी आता है कि थप्पड़ नहीं मारा था, बल्कि गला पकड़ा था. बताया यह भी जाता है कि उस समय भजन लाल, देवीलाल और तापसे तीनों आपस में बातचीत कर रहे थे और तापसे भजनलाल की तरफ देखकर बात कर रहे थे. ऐसे में देवीलाल ने उनकी ठोढी पकड़ अपनी तरफ मुंह घुमाया था. पता नहीं सच क्या है? परंतु महामहिम राज्यपाल के द्वारा पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने के इतिहास में बहुत से उदाहरण है. कर्नाटक पहला ऐसा राज्य नहीं है. हालांकि हरियाणा की राजनीति में भजन लाल को जोड़तोड़ की राजनीति का 'बादशाह' कहा जाता है.

हालांकि इसके बाद तापसे के साथ एक बुरी घटना ओर घटी थी। जोगिंदर सिंह हुड्डा ने देवीलाल के साथ हुए अन्याय से क्रोधित होकर तापसे के मुहं पर कालिख पोत दी थी। जिन्हें इसके बाद जोगिंदर सिंह हुड्डा तापसे के नाम जाना पहचाना जाने लगा था। परंतु वो आज इतिहास की स्मृति में कहीं खो गए हैं। राजनीति में कई कर्म केवल गिनाने के लिए रह जाते हैं।


गणपति राव देवजी तापसे का जन्म 15 जुलाई 1909 को हुआ और 3 अक्टूबर 1991 में इनका निधन हुआ. तापसे का जन्म मुबंई में हुआ. इन्होंने फर्ग्यूसन कॉलेज और लॉ कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की. रुकमणी बाई से इनका विवाह हुआ. इनके 4 लड़के और 2 लड़कियां हैं.
1938-46 के मध्य वे सतारा नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य नियुक्त किया गया। 1940 में उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया और जेल गए. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें पुनः जेल भेजा गया. 1946 में वे सतारा जिले से बंबई विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए. 1952 में वे बंबई से ही पुनः विधानसभा के सदस्य नियुक्त हुए तथा उन्हें मंत्री पद भी मिला और वे 11 साल तक मंत्री रहे.
1957 में उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सदस्य बनाया गया। वे 1962 से 1968 तक राज्य सभा के सदस्य रहे. 1968 से 1971 तक वे रेल सेवा आयोग बंबई के अध्यक्ष रहे. 2 अक्टूबर 1977 को वे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल नियुक्त हुए और 27 फरवरी 1977 को कार्यकाल पूरा किया. उसके बाद 28 फरवरी 1980 से 14 जून 1984 तक हरियाणा के राज्यपाल रहे.
 


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