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नया हरियाणा

मंगलवार, 23 जनवरी 2018

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राजेंद्र वर्मा खुबडू के कार्टूनों का दीवाना है हरियाणा

आज हम आपसे रू-ब-रू करवा रहे हैं हरियाणवी लोकरंग में बने उन कार्टूनों को बनाने वाली शख्सियत से जो किसी परिचय की मोहताज नहीं है.


rajendr varma khubado ke kartoon ka dewana hai haryana, naya haryana

30 अक्टूबर 2017

डॉ. नवीन रमण

राजेन्द्र वर्मा ख़ूबडू हरियाणा की वो शख्सियत हैं, जिन्होंने चंद शब्दों और रेखाओं के माध्यम से अपनी एक खास पहचान बनाई हैं। कार्टून भले ही अखबार के एक कोने में बहुत कम जगह में आता हो, परंतु उसकी मारक क्षमता और संदेश इतना दमदार होता है कि वह सरकार, विपक्ष और जनता सभी के लिए सबसे अहम् हो जाता है। हर अखबार की जान होते हैं कार्टून और कार्टूनिस्ट। सरकार और विपक्ष पर तंज कसने की जो महारत कार्टून में होती है, वह दो पन्ने के लेख कभी हासिल नहीं कर सकते। दूसरी तरफ जनता के मुद्दों की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम भी कार्टून ही बनते हैं। सरकार और विपक्ष दोनों पर तंज कसने के कारण हर राजनीतिक दल की आंखों में खटकते हैं कार्टूनिस्ट, जबकि जनता के दिलों पर राज करते हैं. सृजन के हर क्षेत्र की असली कसौटी ही यह होती है कि आप जनता की आवाज बनें। जिस पर हरियाणा के प्रसिद्ध कॉमन मैन कार्टूनिस्ट राजेंद्र वर्मा खुबडू जी खरे उतरते हैं। 

राजेंद्र वर्मा जी का जन्म-10 अप्रैल 1968, गांव-खूबड़ू, जिला सोनीपत,हरियाणा में हुआ। उनके पिता श्री झंडू राम वर्मा जी हैं। इन्होंने एम.ए. हिंदी और बीएड की डिग्रियां प्राप्त की हैं। जब राजेंद्र वर्मा ग्यारवहीं कक्षा (1985) में थे तब उन्होंने हरियाणा के तत्कालीन राज्यपाल श्री एच. एम. एस. बर्नी जी का स्कैच बनाया, 1000 रु की राशि से पुरस्कृत हुए। इन्हें बचपन से चित्र ही बनाने का शौक था। कक्षा मे किसी भी सहपाठी की नई कॉपी पर चित्र बनाने की आदत के कारण अध्यापकों ने इनकी पिटाई भी की। वैसे भी कहा जाता है कि हुनर न तो किसी मौकों का मौहताज होता और न उसे किसी तरह दबाया जा सकता है। यही राजेंद्र वर्मा जी के साथ हुआ और उनके कार्टून हम तक लगातार पहुंच रहे हैं।

सन् 1990 से सन् 1996 तक हिंदी के विश्वविख्यात महान उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा जी कॉमिक्स फर्म तुलसी पॉकेट बुक्स, मेरठ में कॉमिक बनाने का काम किया। सन् 1996 से सन् 2000 तक निजी स्कूलों में अध्यापन कार्य किया। सन् 2000 से दैनिक भास्कर में बतौर कार्टूनिस्ट कार्यरत हैं। अनेक सामाजिक संगठनों द्वारा सम्मानित। इसी सरकार द्वारा 3000 जेबीटी को ज्वाइनिंग न देने तथा उनके द्वारा आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज, वाटर केनन स्प्रे व अन्य ज्यादतियों के मुद्दे को  कार्टूनों और वेब द्वारा प्रमुखता से उठाया और सफलता भी मिली। ज्वाइनिंग मिलने के बाद  नवचयनित जेबीटी प्रमुख इनका धन्यवाद करने  घर पर भी आए।

सबसे ख़ास बात यह है की इन्होने कभी ड्राइंग नहीं पढ़ी, केवल शौक ने इन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। आर. के. लक्ष्मण जी के प्रशंसक हैं, उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। केवल You said it कॉलम पढ़ने के लिए ही इन्होंने Times of India खरीदना शुरू किया था। दरअसल कार्टून विधा को सीखने व इसे अपनी जीवनवृत्ति बनाने के लिए बहुत ही धैर्य, परिश्रम, समर्पण और एकाग्रता की जरूरत है। इन सभी कसौटियों को आत्मसात करते हुए राजेंद्र वर्मा जी ने यह महारत हासिल की है।

कार्टून केवल तंज नहीं कसते बल्कि  सोचने-समझने और अपने आप पर हंसने का अवसर प्रदान करके हमें ऊर्जा देते हैं। यह ऊर्जा तब दोगुनी बढ़ जाती है, जब भाषा हरियाणवी और लोकरंग उसमें घुले होते हैं। राजेंद्र वर्मा  हरियाणवी संस्कृति की गहरी समझ रखते हैं, तभी उनके कार्टूनों की रेंज लगातार बढ़ती जा रही है। राजेंद्र वर्मा कार्टून विधा के माध्यम से व्यवस्था की विसंगतियों को उजागर कर समाज को संदेश देने का काम करते हैं। दरअसल कार्टूनों को भी गैर परम्परागत ऊर्जा के स्त्रोतों में गिना जाना चाहिए क्योंकि कार्टून व्यंग्य के जरिए समाज को संदेश देने और चुनौतियों का आभास कराने का काम तो करते ही हैं साथ ही कार्टून हमें सोचने, समझने और अपने आप पर हंसने का अवसर देकर हमारी ऊर्जा भी बढ़ाते हैं। राजेंद्र वर्मा जी ने कहा कि अच्छा कार्टून इशारों-इशारों में सरलता के साथ गूढ़ और महत्वपूर्ण बाते बयां कर देते हैं। 


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