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नया हरियाणा

गुरूवार, 13 दिसंबर 2018

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विज्ञान : थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी

आइंस्टीन द्वारा दिया गया यह सिद्धांत यह कहता है कि रिलेटिविटी हमारी पृथ्वी का आधारभूत अव्यय है।

Theory of reletivity, naya haryana, नया हरियाणा

24 मई 2018

विजय सिंह ठकुराय

●Earth's Core Is Younger Than You Think●
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1960 के दशक में महान वैज्ञानिक रिचर्ड फाइनमेन ने एक लेक्चर में कहा था कि अगर उनकी कैलकुलेशन सही है तो पृथ्वी का केंद्र सतह के मुकाबले एक या दो दिन नया (कम आयु का) होना चाहिए। 
क्या यह सुनने में अजीब लगता है?
बिल्कुल नही... अगर आप रिलेटिविटी के सिद्धांतों से परिचित हैं तो...
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आइंस्टीन द्वारा लगभग 100 वर्ष पूर्व प्रस्तावित और वर्तमान भौतिकी के आधार स्तंभ में से एक "थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी" के अनुसार "तेज गति से चलने पर अथवा अधिक द्रव्यमान वाले क्षेत्र में" समय अपेक्षाकृत धीमी गति से व्यतीत होता है। 
तो चूंकि पृथ्वी का केंद्र सतह के मुकाबले अधिक सघन है इसलिए पृथ्वी के केंद्र में समय सतह के मुकाबले धीमी गति से व्यतीत होता है। 
लॉजिक सिंपल है और अप्रैल 2016 में तीन डेनिश वैज्ञानिकों ने कैलकुलेट किया कि रिचर्ड गलत थे !!!
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सतह के मुकाबले पृथ्वी का केंद्र लगभग एक या दो दिन नया नही बल्कि 2.5 वर्ष नया है। 
यही नही... इसी लॉजिक का पालन करते हुए उन वैज्ञानिकों ने साबित किया कि सूर्य का केंद्र बेहद अधिक सघन है इसलिए सूर्य का केंद्र सतह के मुकाबले लगभग 39000 वर्ष नया है। 
तो क्या रिचर्ड गलत थे?
शायद नही... क्योंकि रिचर्ड के ओरिजनल लेक्चर की बजाय सिर्फ लेक्चर की ट्रांसक्रिप्ट ही उपलब्ध हैं तो हो सकता है कि रिचर्ड ने अपने लेक्चर में "वर्ष" का ही उल्लेख किया हो जिसे लोगों ने गलती से "दिन" प्रचारित कर दिया हो। 
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बहरहाल... जो भी है... अपनी अजीबोगरीब मान्यताओं के बावजूद रिलेटिविटी ना केवल सही है बल्कि हमारे दैनिक जीवन को भी प्रभावित करती है। 
हमारे सैटेलाइट्स चूंकि पृथ्वी के केंद्र से लगभग 20000 किलोमीटर दूर हैं इसलिए सैटेलाइट्स के निवासियों के लिए समय पृथ्वीवासियों की बजाय अधिक तेजी से बीतता है। समय का अंतर प्रतिदिन सिर्फ 4 माइक्रो सेकंड का ही होता है इसके बावजूद....सैटेलाइट्स पर मौजूद एटॉमिक क्लॉक को रिलेटिविटी को मद्देनजर रखते हुए सेट किया जाता है क्योंकि अगर ऐसा ना हो तो एक दिन में सैटेलाइट्स की जीपीएस पोजिशनिंग लगभग 8 किलोमीटर भटक चुकी होती है। 
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लार्जर स्केल में कहा जाए तो रिलेटिविटी हमारे ब्रह्मांड का आधारभूत अवयव है। ब्रह्मांड का हर कण अपनी भिन्न स्थिति और वेग के अनुसार अलग-अलग समय मे जीता है। 
यहां तक कि आपके शरीर के सभी कण एक साथ रह कर आपकी बायोलॉजिकल मशीनरी को संचालित करने के बावजूद तकनीकी रूप से अलग-अलग कालखंड में जीते हैं। यही ब्रह्मांड की खूबसूरती और यही विरोधाभास है। यहां सापेक्षता ही सत्य है। औरप्रत्येक सत्य सापेक्ष है। 
 


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