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सोमवार , 22 अक्टूबर 2018

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पेट्रोल डीजल की कीमतें - क्यों कम नहीं हो सकती!

ये चमत्कार हुआ डीजल पेट्रोल की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में घटती कीमतों की वजह से।

Petrol diesel prices, why not be less!, naya haryana, नया हरियाणा

23 मई 2018

शरद श्रीवास्तव

इस साल फरवरी में  अरुण जेटली साहब ने अपना तीसरा बजट पेश किया। ये बजट गहराती ग्लोबल मंदी के सायों तले , लगातार दो साल के सूखे मानसून के बीच और घटती इंडस्ट्रियल आउटपुट के साथ आया। बहुत ही विषम परिस्थितियों में। हालाँकि जीडीपी 7% के ऊपर बनी हुई थी , लेकिन एक भी आर्थिक झटका हल्का सा भी भारत की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने के लिए काफी था और अभी भी है। ऐसे में तमाम अर्थशास्त्रियों के अनुसार जेटली साहब के पास दो विकल्प थे। एक अपने बजट के सहारे वित्त मंत्री सरकारी खर्च के सहारे डिमांड में वृद्धि लाएं , और दूसरा विकल्प बजट के सहारे बजट घाटे को नियंत्रण में रखा जाए। जो मंदी आने वाली है उसके मद्देनजर अनुशासन रखा जाए।

लेकिन वित्त मंत्री जेटली साहब ने एक अनोखा तीसरा रास्ता अपनाया जैसे जादूगर अपने हैट से खरगोश निकालते हैं। जेटली साहब ने बताया की पिछले साल का बजटीय घाटा 3.9 % के अंदर है और नए वित्तीय वर्ष में वो 3.5 % रहेगा। इसके लिए सरकार को कठोर वित्तीय अनुशासन की जरूरत पड़ती। सब्सिडी और सरकारी खर्च को कंट्रोल करने की जरूरत होती।अगर आपको याद हो तो इस साल का बजट कृषि क्षेत्र को गाँवों को समर्पित रहा है। पिछले सत्तर सालों में किसी भी बजट में गाँव और कृषि को इतना महत्त्व नहीं दिया गया।इसके अलावा जेटली साहब ने सातवां पे कमीशन लागू किया उसके लिए हजारो करोड़ की व्यवस्था की।साथ ही जेटली साहब ने सेना के जवानों के लिए OROP एक रैंक एक पेंशन स्कीम लागू की। उसके लिए हजारो करोड़ एलॉट किये।मनरेगा स्कीम में काफी बड़ी रकम की व्यवस्था की।

कृषि क्षेत्र में उपज के लिए बीमा योजना शुरू हुई। गाँव में रोड डेवलपमेंट पर जोर आया। ग्राम पंचायतों को करोडो रूपये विकास के लिए दिये गए। किसानो के लिए लोन और क्रेडिट को सुगम बनाया गया। उनकी उपज की बेहतर मार्केटिंग के लिए नयी स्कीम ई-बाजार की शुरुआत की गयी।सबसे बड़ा फोकस सिंचाई योजनाओं पर दिया गया। नदियों को जोड़ने की महती स्कीम की शुरुआत की गयी।और सबसे जरूरी मोदी साहब के एलान की किसानो की आय को पांच सालों में दुगुना किया जायेगा को जेटली साहब ने अपने बजट में दुहराया।इन सबके अलावा स्टार्ट अप इंडिया स्किल इंडिया स्मार्ट सिटी डिजिटल इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ढेरो खर्च। रोड पोर्ट , पावर प्लांट हाईवे न जाने कितने प्रोजेक्ट।इन सब योजनाओं के लिए ढेरो रकम की जरूरत है। सरकार डायरेक्ट और इन डायरेक्ट टैक्सों से इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा सकती। इस बजट में सरकार ने किसी भी नए टैक्स का गरीब और मध्यम वर्ग के लिए एलान नहीं किया। सुपर रिच लोगों पर जरूर सरचार्ज लगा लेकिन उससे मिलने वाली रकम कुछ सौ करोड़ ही है।फिर ये चमत्कार कैसे संभव है।

ये चमत्कार हुआ डीजल पेट्रोल की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में घटती कीमतों की वजह से। जिसके बारे मेंकभी मोदी जी ने अपने भाषण में कहा था की उनकी अच्छी तकदीर है। उनका इशारा यही था।पेट्रोल डीजल की कीमतें बीते दो साल में आधे से कम रह गईं लेकिन जनता को इसका फायदा नहीं मिला। सिवाय कुछ टोकन रुपयों के। सारा पैसा सरकार एक तरह से डकार गयी। और ये छोटा मोटा पैसा नहीं।इंडियन आयल जो तेल की सबसे बड़ी मार्केटिंग कंपनी है , वो विश्व की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में सिर्फ तेल के व्यापार की वजह से शामिल है। समझिए की तेल का व्यापार कितना बड़ा है। और सरकार को टैक्स लगा लगाकर कितनी बड़ी रकम हासिल हुई है।मुझे संतोष है की डीजल पेट्रोल की बढ़ी कीमतों से जो नुक्सान मुझे हुआ वो देश का फायदा बना है। जिस गाँव और किसानो के लिये मैं कभी कुछ न कर सका उसके लिए मेरी मोदी सरकार कर रही है।लोग इस सरकार को अम्बानी अडानी की सरकार कहते हैं , सूट बूट की सरकार कहते हैं। लेकिन मैं असलियत जानता हूँ। ये किसानो मजदूरों की सरकार है। गरीबो और अमीरों सभी की सरकार है।मोदी सरकार देश की सरकार है।

दो साल पुरानी पोस्ट लेकिन मुझे लगता है आज भी प्रासंगिक है


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