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नया हरियाणा

बुधवार, 16 अक्टूबर 2019

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1987 की देवीलाल सरकार कहलाई इस्तीफों की सरकार!

इस्तीफों का आलम यह रहा कि एक बार तो खुद देवीलाल ने भी इस्तीफे की पेशकश कर दी.

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23 मई 2018



नया हरियाणा

यह बात है 1987 में बनी देवीलाल सरकार की. जो कि अपने कार्यकाल में हुए अनेक इस्तीफों के कारण इस्तीफों की सरकार कहलाई. उस समय की सरकार में  भाजपा भी शामिल थी.
बताया जाता है कि उस चौधरी देवीलाल ने अपने बेटों ओमप्रकाश चौटाला और रणजीत सिंह की लड़ाई से तंग आकर सारे मंत्रीमंडल से इस्तीफा ले लिया था. कुछ-कुछ वैसे ही हालात या मनोस्थिति अब ओमप्रकाश चौटाला की हो रही होगी. मीडिया खबरों की माने तो राजनीतिक उतराधिकारी को लेकर अभय सिंह और अजय सिंह में विवाद चल रहा है. हालांकि परिवार इस तरह की खबरों का खंडन करता रहा है.
देवीलाल सरकार में धर्मबीर ने इस्तीफा दिया. मास्टर हुकुम सिंह और रणसिंह मान के विवाद में मास्टर जी ने इस्तीफा दिया. उसी दौरान महम के उप-चुनाव हुए. उस समय बैंसी कांड हुआ. इसके बाद वीरेंद्र सिंह, रणजीत सिंह डॉक्टर रघुवीर कादियान और रणसिंह मान ने इस्तीफे दिए.
इस्तीफे यहीं नहीं रूके. पुलिस भर्ती को लेकर गृहमंत्री संपत्त सिंह के खिलाफ देवीलाल ने कुछ कह दिया तो संपत्त सिंह ने अपनी गृहमंत्री(पत्नी) के हाथ अपना इस्तीफा भेज दिया.
सबसे गजब तो ये हुआ कि खुद देवीलाल ने भी अपना इस्तीफा देने की पेशकश कर दी. बड़ी मुश्किल से  वीपी सिंह तथा अरुण नेहरू ने दिल्ली से आकर देवीलाल को मनाया. जबकि देवीलाल रूठकर पिजौंर में जा बैठे थे.
1987 में हरियाणा विधानसभा के चुनाव में देवीलाल ने 90 में 85 सीटें हासिल कर कांग्रेस को महज पांच सीटों पर ला दिया था. उनकी इस कामयाबी के बाद ही ये रुपरेखा बनने लगी थी कि देवीलाल केंद्रीय स्तर पर कांग्रेस विरोधी मोर्चे का चेहरा हो सकते हैं. 1987 में हरियाणा का दूसरी बार मुख्य मंत्री बनने के बाद उन्होंने देशभर के विपक्षी दलों को कांग्रेस के खिलाफ एक मंच पर इकट्ठा किया. 1989 में केंद्र में जनता दल की सरकार बनी.
 


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