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नया हरियाणा

रविवार, 19 अगस्त 2018

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लोकतंत्र में रिजोर्ट : तुम हमें रिजार्ट दो, हम तुम्हें विकास देंगे!

पांच साल तक इलाका-देश-प्रदेश विधायक मुक्त रहे, इससे बड़ी राष्ट्र सेवा कुछ ना हो सकती।

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22 मई 2018

आलोक पुराणिक

लोकतंत्र पर आम जनता का ज्ञानवर्धन के लिए एक पुस्तिका तैयार की गयी है, उसके कतिपय महत्वपूर्ण अंश इस प्रकार हैं-

सवाल-लोकतंत्र में रिजार्ट का क्या महात्म्य है।

जवाब-भारत में लोकतंत्र रिजार्ट के मजबूत खंभों पर टिका होता है। विधायक जीतकर विधानसभा नहीं जाते, रिजार्ट जाते हैं। रिजार्ट में मौज मस्ती करते हैं।

सवाल-विधायक रिजार्ट में मौज-मस्ती क्यों करते हैं।

जवाब-इसलिए कि जनता देख समझ ले कि रिजार्ट की जीवन शैली विधायक जनहित में जी रहा है। रिजार्ट की जीवन शैली देखकर ही समझ में आता है विधायकजी के कि जनता को किस तरह की जीवन शैली दिलवानी है। वैसी जीवन शैली विधायकजी खुद जीकर देखते हैं। तब ही तो आगे प्रामिस कर सकते हैं कि रोटी कपड़ा और रिजार्ट दिलवाया जायेगा।

सवाल-अभी तो सारी पब्लिक के पास रोटी कपड़ा ही नहीं है, तब रिजार्ट की बात कैसे की जा सकती है।

जवाब-देखिये, हमें आगे की सोचनी चाहिए। अभी सारी पब्लिक के पास रोटी नहीं है पर सारी पब्लिक के पास मोबाइल तो है ना है। बहुत जल्दी हर बंदे के पास दो दो स्मार्ट मोबाइल फोन होंगे। रोटी हो या ना हो, स्मार्ट मोबाइल फोन होना चाहिए। ऐसे ही रोटी हो या ना हो रिजार्ट के सपने तो होने ही चाहिए।

सवाल-पर सवाल यह है कि रिजार्ट में तो विधायक बरसों से जा रहे हैं। इन फेक्ट वो ही जा पा रहे हैं, आम पब्लिक तो ना जा पा रही रिजार्ट में।

जवाब-यह सवाल बदतमीजी है। बरसों से विधायक लोग रिजार्ट में जाकर क्वालिटी चेक कर रहे हैं, हर तरह से। कहीं कोई कमी बेशी ना रह जाये रिजार्ट में। विधायक लोग रिजार्ट में जाकर यही चिंतन करते हैं कि राष्ट्र निर्माण कैसे हो। राष्ट्र निर्माण के चिंतन में कहीं कोई कमी ना रह जाये, इसीलिए तो बार बार विधायकों को रिजार्ट में जाना पड़ता है। दो तीन शताब्दियों तक विधायक जाते रहेंगे रिजार्ट में। उसके बाद कभी जनता का भी नंबर आये

सवाल-पर विधायकों के रिजार्ट जाने से पब्लिक को क्या राहत मिलती है।

जवाब-बहुत राहत मिलती है। आप पिछले दस दिनों की टीवी कवरेज देखिये, किम जोंग ने एटम बम नहीं चलाये। पाकिस्तान को मिटा देंगे-टाइप कार्यक्रम टीवी पर नहीं चले। भाभीजी को किस नयी टेकनीक से छेड़ेंगे विभूति भईया-टाइप कार्यक्रमों से बच गये आप टीवी पर। टीवी चैनलों पर सिर्फ रिजार्ट रहा। रिजार्ट ने विभूति भैया की छिछोरगर्दी को दबोच लिया टीवी पर। और कितनी राहत लेंगे रिजार्ट से।

सवाल-विधायक बार बार रिजार्ट में जाते रहें, क्या इसे विकास माना जा सकता है।

जवाब-नहीं, कुछ खास विकास नहीं है। असली विकास तो तब माना जायेगा जब भारत के विधायक अमेरिका या दुबई के रिजार्ट में मौज काट रहे होंगे।  लोकतंत्र का परम विकास तो तब मान लिया जायेगा जब विधायक पांच साल दुबई या अमेरिका में ही रिजार्टमय जीवन काट लें। भारत आये ही नहीं।

जी बिलकुल सही कहा, पांच साल तक इलाका-देश-प्रदेश विधायक मुक्त रहे, इससे बड़ी राष्ट्र सेवा कुछ ना हो सकती।

यह लेख राष्ट्रीय सहारा (22 मई 2018, मंगलवार) के संपादकीय पेज पर प्रकाशित हुआ है.


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