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नया हरियाणा

मंगलवार, 19 जून 2018

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अनिता कुंडू ने 20 लाख का कर्ज लेकर माउंट एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा

आज ही के दिन अनिता कुंडू ने माउंट एवरेस्ट पर चीन की तरफ से की थी फतेह.

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21 मई 2018

नया हरियाणा

पहली नजर में यह पढ़ने पर लगता है कि कोई माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए 20 लाख का भी कर्ज ले सकता है. जबकि अनिता कुंडू की उम्र की लड़कियां इतने पैसे शादी, गाड़ी या घर बनाने में लगाते हैं. दूसरी तरफ अनिता जैसी जुनून और जज्बे वाली लड़की है, जो माउंट पर तिरंगा फहराने के लिए 20 लाख का कर्ज लेती है. दंगल फिल्म का डायलॉग है कि ‘छोरियां के छोरे तै कम सै’, पर अनिता कुंडू तो सारी छोरियों और छोरो सब तै अलग सै. अनिता कुंडू बनी ही जुनून की मिट्टी से है और मेहनत के पसीने से इस मिट्टी को नया रंग रूप दिया है. जिसका नाम अब हर किसी की जुबान पर है.
मिलन सार अनिता कुंडू को पहले ही दुनिया के पटल पर ख्याति मिल गई हो, परंतु उनके स्वभाव की सादगी में अहंकार रूपी पर्वत कभी सिर नहीं उठा पाया. क्योंकि उन्होंने माउंट एवरेस्ट के साथ-साथ अहंकार पर भी फतेह किया है. 

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अनिता कुंडू किसी परिचय की मोहताज नहीं है. 21 मई 2017 के दिन चीन की तरफ से संसार की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतेह करने का काम किया. इसके साथ 18 मई 2013 को नेपाल की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी. अनिता कुंडू ने एवरेस्ट के दोनों तरफ(नेपाल और चीन) से तिरंगा फहराकर भारत का नाम दुनिया के पटल पर रोशन किया. साथ में ऐसा करने वाली वो पहली भारतीय बेटी भी बनी और साथ में हरियाणा का नाम रोशन किया. माउंट एवरेस्ट दुनिया की सबसे मुश्किल एवं दुर्गम चढ़ाइयों में से मानी जाती है.
अनीता कुंडू ने हरियाणा के फरीदपुर गांव में जन्म लिया. इस बेटी के हौसले किसी पहाड़ से कम नहीं है, जो एक बार नहीं दो बार अलग-अलग जगह से एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने का काम किया है. माइनस 60 डिग्री के आसपास के तापमान को सहन करना और मिशन को पूरा करना, आसान तो बिल्कुल नहीं है, क्योंकि सोचकर तो बहुत से लोग जाते हैं. कुछ वापिस आ जाते हैं तो कुछ को मौत हो जाती है. इतने भयानक रास्तों को लांघकर जाना और जीवित वापिस लौटना, दरअसल मौत के घर से वापिस लौटने जैसा है.  
 


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